Sawan Somwar Vrat 2026: क्या पीरियड्स में सावन सोमवार का व्रत रखा जा सकता है? जानें क्या कहते हैं शास्त्र

Sawan Somwar Vrat 2026 In Periods: सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र और शुभ माना जाता है। इस दौरान आने वाले हर सोमवार का विशेष महत्व होता है। सावन सोमवार को श्रद्धालु शिव जी का जलाभिषेक करते हैं, व्रत रखते हैं और पूजा-अर्चना कर उनकी कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। वर्ष 2026 में सावन की शुरुआत 30 जुलाई से हो रही है और पहला सावन सोमवार 3 अगस्त को पड़ेगा। कई बार व्रत के दिन या उससे ठीक पहले महिलाओं को मासिक धर्म (पीरियड्स) शुरू हो जाता है। ऐसे में, महिलाओं के मन में यह सवाल उठता है कि क्या पीरियड्स के दौरान व्रत व्रत रखना चाहिए? अगर आपके मन में भी यही सवाल हैं, तो आइए जानते हैं कि पीरियड्स के दौरान सावन सोमवार का व्रत रख सकते हैं या नहीं -

Sawan Somwar Vrat In Periods

पीरियड्स के दौरान सावन सोमवार का व्रत रखा जा सकता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि किसी महिला ने पहले से सावन सोमवार का व्रत करने का संकल्प लिया है और उसी दौरान मासिक धर्म शुरू हो जाए, तो व्रत छोड़ा नहीं जाता। ऐसी स्थिति में व्रत जारी रखा जा सकता है, क्योंकि इसे श्रद्धा और संकल्प से जुड़ा माना गया है। हालांकि, इस दौरान पूजा-पद्धति में कुछ नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है।

मासिक धर्म के दौरान व्रत के नियम क्या हैं?

शास्त्रों में मासिक धर्म को महिलाओं की प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया माना गया है। यदि व्रत के बीच पीरियड्स शुरू हो जाएं, तो व्रत जारी रखा जा सकता है। जरूरत के अनुसार फलाहार या हल्का भोजन लिया जा सकता है। हालांकि, इस दौरान शिवलिंग का स्पर्श करना, जलाभिषेक करना या पूजा की सामग्री अर्पित करना उचित नहीं माना जाता।

मानसिक रूप से करें भगवान शिव की आराधना

यदि पीरियड्स के कारण प्रत्यक्ष पूजा करना संभव न हो, तो मन ही मन भगवान शिव का ध्यान करना भी उतना ही शुभ माना गया है। इस दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप किया जा सकता है। इसके अलावा शिव चालीसा, शिव पुराण या सावन सोमवार व्रत कथा का श्रवण मोबाइल या ऑडियो के माध्यम से किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं में मानसिक पूजा को भी विशेष महत्व दिया गया है।

परिवार का कोई सदस्य कर सकता है पूजा

यदि महिला स्वयं पूजा नहीं कर सकती, तो अपने नाम से घर के किसी अन्य सदस्य से पूजा करवाई जा सकती है। पति, माता, बहन, सास या परिवार का कोई अन्य सदस्य भगवान शिव का अभिषेक और पूजा कर सकता है। ऐसी मान्यता है कि श्रद्धा और संकल्प के साथ कराई गई पूजा का पुण्य व्रत रखने वाले व्यक्ति को भी प्राप्त होता है।

स्वच्छता और स्वास्थ्य का भी रखें ध्यान

व्रत के दौरान धार्मिक नियमों के साथ-साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। मासिक धर्म के समय शरीर को पर्याप्त आराम दें, साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और यदि कमजोरी महसूस हो तो अपनी क्षमता के अनुसार ही उपवास करें। धर्म शास्त्रों में भी आस्था के साथ विवेक और स्वास्थ्य को महत्व दिया गया है।

Story first published: Saturday, August 1, 2026, 12:47 [IST]
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