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Somvar Vrat Katha: सोमवार व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, भगवान शिव पूरी करेंगे हर मनोकामना
Somvar Vrat Katha In Hindi: सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दिन भक्त महादेव को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और कई लोग व्रत भी रखते हैं। मान्यता है कि सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा और व्रत करने से भोलेनाथ जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। वहीं इस दिन भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करने से अविवाहित कन्याओं को मनचाहा जीवनसाथी मिलने का आशीर्वाद मिलता है। कई लड़कियां सोलह सोमवार का व्रत भी करती हैं। ऐसा माना जाता है कि सोमवार का व्रत करने से सुख-समृद्धि और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है। सोमवार व्रत के दिन जब शिव पूजा करें, तो सोमवार की व्रत कथा जरूर पढ़ें। इसके व्रत कथा के बिना सोमवार व्रत अधूरा माना जाता है। तो आइए, जानते हैं सोमवार की व्रत कथा -

सोमवार व्रत कथा
एक समय की बात है, एक नगर में एक बहुत अमीर साहूकार रहता था। उसके पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी, लेकिन संतान न होने के कारण वह बहुत दुखी रहता था। संतान पाने के लिए वह हर सोमवार को व्रत रखता और शिव मंदिर जाकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करता था। उसकी सच्ची भक्ति देखकर एक दिन माता पार्वती ने भगवान शिव से उसकी इच्छा पूरी करने को कहा। भगवान शिव ने कहा कि हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार ही फल मिलता है, लेकिन माता पार्वती के बार-बार कहने पर उन्होंने साहूकार को पुत्र का वरदान दिया। साथ ही यह भी कहा कि यह पुत्र सिर्फ 12 साल तक ही जीवित रहेगा।
साहूकार के पुत्र का हुआ विवाह
कुछ समय बाद साहूकार के घर एक पुत्र का जन्म हुआ। जब वह 11 साल का हुआ, तो उसे पढ़ाई के लिए काशी भेजा गया। साहूकार ने उसके मामा को साथ भेजा और कहा कि रास्ते में यज्ञ करते रहना और ब्राह्मणों को दान देना। रास्ते में एक नगर में वे रुके, जहां एक राजकुमारी का विवाह हो रहा था। दूल्हा एक आंख से काना था, इसलिए उसके पिता ने साहूकार के बेटे को दूल्हा बनाकर विवाह करवा दिया।
साहूकार के पुत्र की मृत्यु
साहूकार का पुत्र ईमानदार था। उसने राजकुमारी के दुपट्टे पर सच लिख दिया। जब राजकुमारी को सच्चाई पता चली, तो उसने अपने माता-पिता को बता दिया और शादी के बाद विदा नहीं हुई। इसके बाद लड़का और उसका मामा काशी पहुंच गए। जब लड़का 12 साल का हुआ, तो यज्ञ के दौरान उसकी तबीयत खराब हुई और कुछ ही समय में उसकी मृत्यु हो गई। मामा बहुत दुखी होकर रोने लगे।
भगवान शिव की कृपा से साहूकार के बेटे को मिला जीवनदान
उसी समय भगवान शिव और माता पार्वती उधर से जा रहे थे। माता पार्वती को मामा का दुख देखा नहीं गया और उन्होंने शिवजी से बालक को जीवित करने की प्रार्थना की। माता पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने उस बालक को फिर से जीवन दे दिया। शिवजी की कृपा से वह लड़का जीवित हो गया। पढ़ाई पूरी करके वह लड़का अपने मामा के साथ वापस लौट रहा था। रास्ते में उसी नगर में रुका जहां उसका विवाह हुआ था। वहां राजा ने उसे पहचान लिया और अपनी बेटी को उसके साथ विदा कर दिया।
सबकी मनोकामनाएं होती हैं पूरी
उधर साहूकार और उसकी पत्नी अपने बेटे के इंतजार में बहुत दुखी थे। उन्होंने निश्चय किया था कि अगर बेटे की मृत्यु की खबर मिली तो वे भी प्राण त्याग देंगे। लेकिन जब उनका बेटा जीवित वापस आया, तो वे बहुत खुश हुए। उस रात भगवान शिव ने साहूकार के सपने में आकर कहा कि सोमवार का व्रत और कथा सुनने से प्रसन्न होकर उन्होंने उसके पुत्र को लंबी आयु दी है। इसी प्रकार जो भी व्यक्ति सोमवार का व्रत करता है और यह कथा सुनता या पढ़ता है, उसके सभी दुख दूर होते हैं और उसकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।



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