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क्या होता है वेपर हीट ट्रीटमेट? वो टेक्नोलॉजी जिसके टेस्ट में फेल होने पर जापान ने बैन किए भारतीय आम
Vapor Heat Treatment Kya Hai: भारत के आमों की मिठास दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन्हें बेचने के लिए सिर्फ स्वाद ही काफी नहीं होता, बल्कि इन्हें कई सारे मानकों पर खरा उतरना पड़ता है। जापान द्वारा लगभग 20 सालों में पहली बार भारतीय आमों के आयात पर प्रतिबंध लगाने की खबर ने कृषि जगत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में हलचल मचा दी है। दरअसल, हाल ही में जापान ने भारत से भेजी गई कुछ आमों की खेप को वेपर हीट ट्रीटमेंट (Vapor Heat Treatment - VHT) के मानकों पर खरा न उतरने के कारण अस्वीकार कर दिया। इसके बाद यह तकनीक चर्चा का विषय बन गई है। आखिर वेपर हीट ट्रीटमेंट क्या है, यह कैसे काम करती है और विदेशी बाजारों में भारतीय फलों के निर्यात के लिए इसे इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है? आइए जानते हैं कि यह अनूठी और आधुनिक तकनीक क्या है, यह क्यों जरूरी है और इसके पीछे का पूरा विज्ञान क्या है।

क्या होता है वेपर हीट ट्रीटमेंट? (What is Vapor Heat Treatment?)
वेपर हीट ट्रीटमेंट एक बेहद आधुनिक, गैर-रासायनिक (Non-Chemical) और पर्यावरण के अनुकूल तकनीक है, जिसका उपयोग फलों विशेषकर आम, पपीता और अमरूद को अंतरराष्ट्रीय निर्यात के लिए तैयार करने के लिए किया जाता है। सरल शब्दों में कहें तो यह फलों को भाप से नहलाने या शुद्ध करने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों, खासकर जापान, अमेरिका और यूरोपीय संघ के बहुत कड़े क्वारंटाइन नियम होते हैं। उनका मानना होता है कि भारत जैसे उष्णकटिबंधीय (Tropical) देशों से आने वाले फलों के साथ 'फ्रूट फ्लाई' (Fruit Fly - फल मक्खी) और उनके अंडे या लार्वा भी उनके देश में आ सकते हैं। अगर ये मक्खियां उनके स्थानीय खेतों में फैल गईं, तो वहां की पूरी फसल बर्बाद हो सकती है। इसी 'फ्रूट फ्लाई' और अन्य हानिकारक कीटों को पूरी तरह नष्ट करने के लिए वेपर हीट ट्रीटमेंट का इस्तेमाल किया जाता है।
कैसे काम करती है यह VHT तकनीक?
बहुत से लोग ये नहीं जानते होंगे कि आखिर कैसे काम करती है यह VHT तकनीक? दरअसल, इस पूरी प्रक्रिया को एक विशेष रूप से डिजाइन किए गए हाई-टेक चैंबर में अंजाम दिया जाता है, जिसे 4 मुख्य चरणों में समझा जा सकता है जिनके बारे में नीचे बताया गया है।
1. तापमान और नमी का सटीक नियंत्रण
चुने गए प्रीमियम आमों को VHT चैंबर के भीतर रखा जाता है। इसके बाद चैंबर में संतृप्त जल वाष्प यानी 95% से अधिक नमी वाली गर्म भाप छोड़ी जाती है।

2. कोर टेम्परेचर को बढ़ाना
इस प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि सिर्फ आम की बाहरी सतह को ही नहीं, बल्कि आम के बिल्कुल अंदरूनी हिस्से यानी गुठली के पास के तापमान को धीरे-धीरे 47.5°C से 48°C तक पहुंचाया जाता है।
3. होल्डिंग टाइम
एक बार जब आम के अंदर का तापमान 47.5°C तक पहुंच जाता है, तो उसे लगभग 20 से 30 मिनट तक इसी स्थिर तापमान पर रखा जाता है। इस सटीक तापमान पर आम के गूदे या स्वाद को कोई नुकसान नहीं पहुंचता, लेकिन इसके भीतर मौजूद 'फ्रूट फ्लाई' के सारे अंडे और लार्वा पूरी तरह मर जाते हैं।
4. रैपिड कूलिंग और पैकिंग
ट्रीटमेंट पूरा होने के बाद, आमों को तुरंत ठंडी हवा या ठंडे पानी की बौछार से सामान्य तापमान पर लाया जाता है। इसके बाद इन्हें पूरी तरह से सीलबंद और कीट-मुक्त डिब्बों में पैक करके सीधे एयरपोर्ट भेजा जाता है।
भारतीय आम खाने के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं। जापान का यह प्रतिबंध आम की क्वालिटी की वजह से नहीं, बल्कि निर्यात प्रक्रिया (Export Protocol) में आई तकनीकी खामियों और कीटनाशकों (जैसे मैलाथियान) के अवशेषों के कारण लगा है। जापान के क्वारंटाइन नियमों के अनुसार, अगर VHT चैंबर के तापमान लॉग या डॉक्यूमेंटेशन में थोड़ी भी गड़बड़ी मिलती है, तो वे पूरे शिपमेंट को रिजेक्ट कर देते हैं।
नहीं, दोनों में अंतर है। हॉट वाटर ट्रीटमेंट (HWT) में आमों को सीधे गर्म पानी में डुबोया जाता है, जिसका उपयोग ज्यादातर यूरोपीय देशों में निर्यात के लिए होता है। वहीं, वेपर हीट ट्रीटमेंट (VHT) में पानी की जगह गर्म पानी की भाप (Vapor) का उपयोग किया जाता है। जापान, न्यूजीलैंड और दक्षिण कोरिया जैसे देश केवल VHT प्रमाणित आमों को ही मंजूरी देते हैं।



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