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आप भी तो नहीं खा रहे केमिकल से पके आम? ऐसे करें असली-नकली की पहचान, जानें सेहत को होने वाले नुकसान
Chemical Se Pake Aam Ki Kaise Kare Pehchan: गर्मियों का मौसम आते ही बाजारों में हर तरफ रसीले आमों की बहार आ जाती है। लेकिन इस बार आम के सीजन की शुरुआत एक बेहद चिंताजनक खबर के साथ हुई है। मार्च 2026 में भारतीय आम प्रसंस्करण केंद्रों (Processing Centers) की जांच के दौरान कुछ गंभीर कमियां पाई गईं, जिसके बाद जापान ने इस साल के लिए भारतीय आमों के आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। अब आमों को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल भी उठने लगे हैं। सबसे बड़ा चिंता का विषय है आमों को कैमिकल द्वारा पकाकर बाजार में बेचना और लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करना। मुनाफे के चक्कर में कई कारोबारी आमों को पेड़ पर प्राकृतिक रूप से पकने का समय ही नहीं देते। वे इन्हें समय से पहले तोड़कर कैलशियम कार्बाइड (Calcium Carbide) और एथिलीन राइपनर जैसे खतरनाक रसायनों से पका रहे हैं। केमिकल से पके ये आम बाहर से तो बहुत चमकदार और एकदम पीले दिखते हैं, लेकिन अंदर से ये एक धीमा जहर बन चुके होते हैं। आइए जान लेते हैं कि कैमिकल से पके आमों को खाने से क्या नुकसान हो सकते हैं और इनकी पहचान कैसे करें।

कैसे करें केमिकल और नेचुरल आम की पहचान? (How to Identify Chemically Ripened Mangoes)
1. रंग का एक समान होना
प्राकृतिक रूप से पका आम कहीं से पीला, तो कहीं से हल्का हरा या लाल दिखाई देगा। वहीं, केमिकल से पकाया गया आम पूरी तरह से एक समान चमकीला पीला दिखेगा, जिस पर कोई प्राकृतिक धब्बा नहीं होगा।
2. हरे पैच का दिखना
यदि आम पूरा पीला है लेकिन उसमें कहीं-कहीं अचानक गहरे हरे रंग के चट्टे या पैच दिखाई दे रहे हैं, तो समझ जाएं कि उसे कार्बाइड से पकाया गया है। केमिकल के संपर्क में आने से आम का वह हिस्सा कच्चा रह जाता है।

3. पानी का टेस्ट
आम खरीदने के बाद उन्हें पानी से भरी एक बाल्टी में डालें। जो आम पानी के नीचे डूब जाते हैं, वे प्राकृतिक रूप से पके होते हैं। इसके विपरीत, जो आम पानी की सतह पर तैरने लगते हैं, वे केमिकल से पकाए गए होते हैं क्योंकि केमिकल के कारण उनके अंदर हवा और गैस भर जाती है।
4. स्वाद और काटने पर बनावट
जब आप प्राकृतिक आम काटेंगे, तो उसका गूदा पूरा गहरा पीला या नारंगी होगा और रस से भरा होगा। केमिकल से पके आम को काटने पर वह ऊपर से पीला लेकिन अंदर से हल्का सफेद या कड़ा निकलेगा और उसका स्वाद भी कहीं मीठा तो कहीं कसैला (फीका) लगेगा।
केमिकल के जहर से बचने के 3 अचूक उपाय
अगर आप बाजार से आम खरीद कर ले आए हैं, तो अनजाने में भी उन्हें सीधा खाने की गलती न करें। रसायनों के असर को पूरी तरह खत्म करने के लिए इन 3 अचूक उपायों को अपनाएं:
1. गुनगुने पानी और बेकिंग सोडा का इस्तेमाल
आम को घर लाते ही सबसे पहले एक बड़े बर्तन में गुनगुना पानी लें और उसमें एक से दो चम्मच बेकिंग सोडा (Sodium Bicarbonate) मिला दें। अब इन आमों को कम से कम 15 से 20 मिनट के लिए इस पानी में डूबा रहने दें। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि बेकिंग सोडा फलों की ऊपरी सतह पर जमा पेस्टीसाइड्स और रसायनों को 90% तक पूरी तरह से नष्ट कर देता है। इसके बाद आमों को साफ बहते पानी से धो लें।
2. छिलके को गहराई से निकालें और डंठल का हिस्सा काटें
केमिकल का सबसे ज्यादा असर आम के छिलके और उसके डंठल (Stalk) वाले हिस्से पर होता है, जहाँ से केमिकल अंदर प्रवेश करता है। इसलिए आम खाने से पहले उसके ऊपर के डंठल वाले हिस्से को करीब आधा इंच गहरा काट कर अलग कर दें। साथ ही, आम को कभी भी छिलके समेत दांतों से चूसकर न खाएं। चाकू से छिलके की एक मोटी परत उतारने के बाद ही उसके गूदे का सेवन करें।
3. सीजन से पहले और अत्यधिक सस्ते आम खरीदने से बचें
मार्केट के इस ट्रेंड को समझें समय से पहले आने वाले फल हमेशा केमिकल की मदद से ही तैयार किए जाते हैं। जब तक आम का असली सीजन (आमतौर पर मई के मध्य से जून) न आ जाए, तब तक आम खरीदने में जल्दबाजी न करें। इसके अलावा, बाजार में बहुत कम दाम पर मिलने वाले अत्यधिक पीले और चमकदार आमों के झांसे में न आएं। हमेशा विश्वसनीय या स्थानीय किसानों से ही फल खरीदने का प्रयास करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।
महंगे केमिकल वाश खरीदने की कोई जरूरत नहीं है। आपके किचन में मौजूद बेकिंग सोडा (मीठा सोडा) सबसे बेहतरीन और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित विकल्प है। गुनगुने पानी में 2 चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर आमों को 20 मिनट के लिए छोड़ देने से उसकी ऊपरी सतह पर जमा 90% से ज्यादा पेस्टीसाइड्स और कार्बाइड का असर खत्म हो जाता है।
कारोबारी सबसे ज्यादा कैल्शियम कार्बाइड (Calcium Carbide) का इस्तेमाल करते हैं, जिसे स्थानीय भाषा में 'मसाला' भी कहा जाता है। इसमें आर्सेनिक और फास्फोरस जैसे जहरीले तत्व होते हैं। इसके अलावा एथिलीन राइपनर के पाउच का भी गलत तरीके से इस्तेमाल होता है। इनसे पकाए गए आम खाने से सिरदर्द, चक्कर आना, पेट में मरोड़, उल्टी, लिवर खराब होना और लंबे समय में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं।



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