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Chaitra Purnima 2023: चैत्र पूर्णिमा की डेट को लेकर न हों कंफ्यूज, यहां देखें सही तिथि, मुहूर्त व चंद्रोदय समय
हिन्दू धर्म में चैत्र पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। यह पूर्णिमा तिथि चन्द्र देव और माता लक्ष्मी को समर्पित मानी जाती है। हिन्दू नववर्ष का पहला महीना चैत्र का महीना होता है।
वहीं चैत्र पूर्णिमा नव संवत्सर की पहली पूर्णिमा होती है। इस दिन भगवान विष्णु और उनके विभिन्न अवतारों की अराधना होती है। जानते हैं चैत्र पूर्णिमा की तिथि, चंद्रोदय मुहूर्त, महत्व के बारे में विस्तार से -

चन्द्र पूर्णिमा तिथि एवं मुहूर्त
चैत्र पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 5 अप्रैल को सुबह 09 बजकर 19 मिनट से होगी और समापन 6 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 04 मिनट पर होगा। पूर्णिमा का व्रत 5 अप्रैल को रखा जाएगा और अगले दिन 6 को पारण किया जाएगा।
चैत्र पूर्णिमा पूजा मुहूर्त 6 अप्रैल की सुबह 06 बजकर 15 मिनट से 07 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। वहीं अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 07 बजकर 48 मिनट से 09 बजकर 22 मिनट तक होगा।

चंद्रोदय का समय
पूर्णिमा की तिथि यानि 5 अप्रैल को ही चन्द्र देव की पूजा की जाएगी। शाम 06 बजकर 01 मिनट पर चंद्रोदय का समय है, चंद्रमा उदय के पश्चात ही चंद्रदेव की पूजा करें।

चैत्र पूर्णिमा का महत्व
चैत्र पूर्णिमा को चैती पूनम भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता अनुसार त्रेता युग में चैत्र पूर्णिमा के दिन ही प्रभु श्री राम के परमभक्त और शिव के अंश महावीर हनुमान का जन्म हुआ था। मान्यता अनुसार इसी दिन श्रीकृष्ण ने गोपियों संग रास रचाया था।
इस दिन के महत्व को देखते हुए इस तिथि पर मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में धन की दरिद्रता नहीं होती है और संपत्ति में वृद्धि बनी रहती है। साथ ही इस दिन दान का बहुत अधिक महत्व होता है। गरीबों को तिल, अनाज, सुरई, फल और वस्त्र का दान करना बहुत अधिक शुभ माना जाता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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