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Chanakya Niti: ऐसी जगहों पर एक पल के लिए रुकना भी पड़ सकता है भारी, हमेशा बना रहता है मृत्यु का भय
वर्तमान समय में मानव जीवन के लिए कई तरह के खतरे, कई परेशानियां ऐसी होती हैं, जिससे व्यक्ति को तुरंत बाहर निकलना चाहिए। चाणक्य अपने नीति ग्रन्थ चाणक्य नीति में एक श्लोक के माध्यम से यह बताते हैं कि किन जगहों और किन परिस्थितियों से व्यक्ति को तुरंत बाहर निकलना चाहिए -
श्लोक:
उपसर्गेऽन्यचक्रे च दुर्भिक्षे च भयावहे।
असाधुजनसंपर्के य: पलायति स जीवति।।

हिंसा
आचार्य चाणक्य यह सलाह देते हैं कि व्यक्ति को हिंसा की आशंका या हिंसा वाली जगह को तुरंत छोड़ देना चाहिए। ऐसी परिस्थिति में व्यक्ति को न केवल शारीरिक चोट बल्कि जान तक का भी ख़तरा हो सकता है। आज के युग में जहां सोशल मीडिया के कारण लोगों का व्यवहार आक्रामक हो चुका है और भीड़ की हिंसाएं बढ़ चुकी हैं, ऐसे में व्यक्ति को हिंसा की आशंका वाली जगहों में बेहद सतर्क रहना चाहिए।
आकस्मिक हमला
किसी देश या राज्य में आकस्मिक हमले की परिस्थिति में भी व्यक्ति को तुरंत वहां से निकलकर सुरक्षित स्थान पर जाना चाहिए। हमले की स्थिति में ना केवल देश की सीमाएं बल्कि आम जनता भी खतरे में पड़ जाती है। इसलिए व्यक्ति को किसी भी आकस्मिक हमले की स्थिति में अपने परिवार के साथ सुरक्षित स्थान के लिए निकलना चाहिए।
अकाल या भुखमरी
चाणक्य सुझाव देते हैं कि जिस क्षेत्र में अकाल की परिस्थितियां उभर रहीं हों वहाँ से जल्द से जल्द निकलकर अपने रहने का स्थान बदलना चाहिए। लम्बे समय से सूखा पड़ने के कारण अकाल की परिस्थितियां पैदा होती हैं, जिससे व्यक्ति को बचना चाहिए। अकाल के समय धीरे धीरे खाद्य पदार्थ महंगे होते हैं फिर उनकी उपलब्धता खत्म होने लग जाती है।
चरित्रहीन या अपराधी की उपस्थिति
जिस जगह अपराधी प्रवृति के लोगों की उपस्थिति हो वहां से भी व्यक्ति को जल्द से जल्द निकल जाना चाहिए। अपराधी लोगों के होने से अपराध की संभावना बढ़ जाती है। इससे आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा को खतरा होता है। इसलिए ऐसी जगहों से सावधान रहना चाहिए।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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