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Chhathi Maiya Kaun Hai: क्या आप जानते हैं भगवान शिव की बहु हैं छठी माता, जानें सूर्य भगवान से इनका संबंध
Chhathi Maiya Kaun Hai: छठी मैया हिंदू धर्म में एक विशेष देवी हैं, जिन्हें संतान, सुख-समृद्धि, और परिवार की खुशहाली के लिए पूजा जाता है। छठी मैया का संबंध प्रकृति से गहराई से जुड़ा है, और उन्हें सृष्टि की रचना तथा संतान की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है।
उनकी पूजा विशेष रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, और नेपाल के तराई क्षेत्रों में लोकप्रिय है, जहां छठ पर्व के माध्यम से उन्हें विशेष सम्मान और आस्था के साथ पूजते हैं।

छठी माता कौन है?
मान्यता है कि छठी मैया सूर्य देव की बहन और भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय की पत्नी हैं। उन्हें ऐसी देवी माना जाता है जो अपने भक्तों को स्वास्थ्य, समृद्धि, और खुशी का आशीर्वाद देती हैं। छठी मैया प्रकृति की पोषण और सुरक्षा देने वाली शक्ति का प्रतीक हैं। उनकी पूजा करने से परिवार में कल्याण और शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही, यह भी मान्यता है कि छठी मैया की आराधना करने से संतान सुख मिलता है और उनकी सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
माता सीता ने की थी छठी माता की उपासना
भगवान राम और माता सीता से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार, जब राम और सीता अयोध्या लौटे और राम का राज्याभिषेक हुआ, तब उन्होंने कार्तिक मास में सूर्य देव की आराधना की। माता सीता ने छठ व्रत रखा और सूर्य देव तथा छठी मैया का आशीर्वाद प्राप्त किया। माना जाता है कि तभी से यह परंपरा चली आ रही है।
जब पांडवों के लिए द्रौपदी ने की छठी माता की पूजा
महाभारत काल से जुड़ी एक कथा के अनुसार, जब पांडव जुए में अपना सारा राज्य हार गए थे, तब द्रौपदी ने छठ व्रत का संकल्प लिया। उन्होंने सूर्य देव और छठी मैया की उपासना की, जिससे उनकी सभी इच्छाएं पूरी हुईं और पांडवों को उनका खोया हुआ राज्य वापस मिल गया। यह कथा यह दर्शाती है कि छठ पूजा से भक्तों को कठिन परिस्थितियों से छुटकारा मिल सकता है और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
छठ पर्व सूर्य देव की उपासना का पर्व है, और इससे जुड़ी एक कथा महाभारत के पात्र सूर्यपुत्र कर्ण से भी संबंधित है। कर्ण सूर्य देव के परम भक्त थे और रोज घंटों उनकी उपासना किया करते थे। सूर्य देव की कृपा से ही कर्ण को विशेष शक्तियां प्राप्त हुईं। मान्यता है कि छठ पूजा की परंपरा की शुरुआत कर्ण ने ही की थी।
छठी माता की कथा
छठी मैया को प्रकृति और संतान की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। एक लोककथा के अनुसार, राजा प्रियव्रत और उनकी पत्नी मालिनी संतानहीन थे। महर्षि कश्यप के सुझाव पर उन्होंने यज्ञ किया, जिससे उन्हें संतान प्राप्त हुई, लेकिन वह मृत पैदा हुई। इस दुख से व्याकुल होकर राजा और रानी ने कठोर तपस्या करते हुए छठी मैया की आराधना की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवी प्रकट हुईं और उन्हें संतान का आशीर्वाद प्रदान किया।
इस तरह की मान्यताओं के कारण ही संतान सुख और परिवार की खुशहाली के लिए लोग छठी मैया की आराधना करते हैं। इस पूजा में महिलाएं चार दिन का कठिन निर्जला व्रत करती हैं, जिसमें वे सूर्योदय और सूर्यास्त के समय जल अर्पण करती हैं। यह पूजा अत्यंत शुद्धता और संकल्प से की जाती है, और इसका उद्देश्य है कि छठी मैया का आशीर्वाद प्राप्त हो, जिससे संतान और परिवार को खुशहाली और सुख मिले।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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