धनतेरस समृद्धि का स्वागत करने का दिन, लेकिन घर में शांति बनाए रखना भी उतना ही जरूरी: ज्योतिषी रिन्ही सुबरवाल

धनतेरस को त्योहारों के मौसम के सबसे शुभ अवसरों में से एक माना जाता है। यह दिन धन, समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और नई शुरुआत का प्रतीक है। ज्योतिषी, टैरो कार्ड रीडर, क्रिस्टल हीलर और अंक ज्योतिषी रिन्ही सुबरवाल ने धनतेरस के महत्व, इस दिन निभाई जाने वाली परंपराओं और विभिन्न राशियों पर होने वाले ज्योतिषीय प्रभावों के बारे में बात की।

Jyotishi Rinhi Subarwal

धनतेरस के महत्व को समझाते हुए रिन्ही कहती हैं, "धनतेरस दो शब्दों से मिलकर बना है, 'धन' और 'तेरस'। धन का अर्थ संपत्ति और समृद्धि से है, जबकि तेरस कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को दर्शाता है। इस दिन से जुड़ी एक बहुत सुंदर कथा है। राजा हिम के पुत्र की कुंडली में कम उम्र में मृत्यु का योग बताया गया था। लेकिन उनकी पत्नी को इस भविष्यवाणी के बारे में पता था और उन्होंने अपने पति की रक्षा करने का फैसला किया। उन्होंने पूरे घर को सोने और आभूषणों से सजाया, दीपक जलाए और पूरी रात भजन-गीत गाती रहीं। जब यमराज वहां पहुंचे, तो घर की रोशनी और चमक से उनका ध्यान भटक गया। आखिरकार वे राजकुमार के प्राण लिए बिना ही लौट गए। यही वजह है कि धनतेरस को समृद्धि, सुरक्षा और अंधकार पर प्रकाश की जीत से जोड़कर देखा जाता है।"

वह इस दिन के धार्मिक महत्व पर भी बात करती हैं। उनके अनुसार, धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। वहीं, पांच दिवसीय दीपावली उत्सव के दौरान मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की आराधना का भी विशेष महत्व है।

धनतेरस पर किन चीजों की खरीदारी करनी चाहिए, इस बारे में रिन्ही कहती हैं, "परंपरा के अनुसार, इस दिन झाड़ू, अनाज, सोना या चांदी खरीदना शुभ माना जाता है। पीतल और तांबे की वस्तुएं खरीदना भी अच्छा माना जाता है। हालांकि, मेरी सलाह है कि इस दिन स्टील, लोहा, पेट्रोल, तेल और शनि से जुड़ी अन्य चीजें खरीदने से बचना चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य घर में समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत करना है।"

ज्योतिषीय भविष्यवाणियों के बारे में बात करते हुए वह मानती हैं कि 31 अक्टूबर को गुरु के सिंह राशि में गोचर के बाद कुछ राशियों के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो सकती हैं। वह कहती हैं, "सिंह, धनु और मेष राशि के जातकों के लिए सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। कुंभ राशि के जातकों के लिए भी अनुकूल समय शुरू हो सकता है, जबकि मीन राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव कम होने की उम्मीद है। धनु और सिंह राशि के लोगों को ढैय्या के प्रभाव से भी कुछ राहत मिल सकती है। इसके अलावा, 12 नवंबर और 25 नवंबर के आसपास बुध, शुक्र और राहु-केतु से जुड़े ग्रहों के बदलाव विभिन्न राशियों के जीवन में कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकते हैं।"

रिन्ही दीपावली के दौरान सही पूजा-पाठ और मंत्रों के जाप के महत्व पर भी जोर देती हैं। उनका मानना है कि आमतौर पर लोग भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं, लेकिन इस दौरान मां सरस्वती और भगवान कुबेर को भी पूजा में शामिल करना चाहिए।

वह बताती हैं, "मां लक्ष्मी के लिए 'श्रीं' और भगवान कुबेर के लिए 'धं' मंत्र का जाप किया जा सकता है। इसके अलावा, 'ॐ महालक्ष्म्यै नमः', 'ॐ सरस्वत्यै नमः', 'ॐ धन्वंतरये नमः' और 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्रों का जाप भी शुभ माना जाता है। 'ॐ देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः' मंत्र भी बहुत शक्तिशाली माना जाता है। इन मंत्रों के जाप से व्यक्ति दिव्य ऊर्जा से जुड़ता है और समृद्धि, बुद्धि, शक्ति तथा अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मांग सकता है।"

त्योहार के इस खास मौके पर एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए रिन्ही लोगों को अपने विचारों, शब्दों और व्यवहार पर ध्यान देने की सलाह देती हैं। उनका मानना है कि घर में सुख-शांति बनाए रखना पूजा-पाठ करने जितना ही जरूरी है।

वह कहती हैं, "इन दिनों लोगों को बेवजह की बहस, टकराव और झगड़ों से बचना चाहिए। मान्यता है कि मां लक्ष्मी उन्हीं घरों में वास करती हैं, जहां शांति और आपसी प्रेम बना रहता है। शांत रहें, अपने आसपास के माहौल को समझें और अपने आसपास की ऊर्जा के प्रति सजग रहें। हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, ठीक उसी तरह जैसे रोशनी और अंधेरा दोनों का अपना महत्व है। कई बार चुप रहना ही सबसे समझदारी भरा फैसला होता है। जैसा कि कहा भी गया है, 'मौनं पण्डित लक्षणम्'।"

Story first published: Friday, November 6, 2026, 10:18 [IST]
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