Latest Updates
-
International Literacy Day 2026: साक्षरता दिवस पर ये संदेश भेज सबको करें जागरूक, बताएं पढ़ने-लिखने का महत्व -
Aja Ekadashi Vrat Katha: अजा एकादशी पर पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगा अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य -
Aja Ekadashi 2026: नारायण की कृपा...इन संदेशों के साथ अपने प्रियजनों को भेजें अजा एकादशी की शुभकामनाएं -
National Nutrition Week: प्रेग्नेंसी में जरूरी है सही न्यूट्रिशन, जानें गर्भावस्था में क्या खाएं-क्या न खाएं -
Aja Ekadashi 2026: कब है अजा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और पारण समय -
Teacher's Day 2026: 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस? जानिए क्या है इसका इतिहास और महत्व -
Teacher's Day 2026 Sanskrit Wishes: इन संस्कृत श्लोकोंं के जरिए गुरुजनों को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं -
Teacher’s Day 2026 Wishes: गुरु का ज्ञान...इन संदेशों के साथ अपने टीचर्स को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं -
Dahi Handi 2026: 5 या 6 सितंबर, कब है दही हांडी? जानें क्यों और कैसे मनाते हैं ये पर्व -
Janmashtami 2026: धन, प्रेम विवाह और संतान प्राप्ति के लिए जन्माष्टमी पर करें ये अचूक उपाय, पूरी होगी मनोकामना
ईद उल अजहा, ईद उल फितर और ईद मिलाद-उन-नबी, क्या है इनका फर्क? जानें तीनों की कहानी
Difference between Eid ul Adha Eid ul Fitr and Eid Milad: अक्सर लोग सोचते हैं कि मुसलमान केवल ईद उल फितर (मीठी ईद) ईद उल अजहा (बकरा ईद) ही मनाते हैं। लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है और इस्लाम में ईद मिलाद-उन-नबी भी उतनी ही अहमियत रखती है जितनी पहली दो ईद रखती है। बल्कि कुछ लोग को मीठी ईद और बकरा ईद से भी ज्यादा अहम ईद मिलाद-उन-नबी को मानते हैं। बता दें कि हर ईद का अपना एक अलग संदेश और धार्मिक महत्व है। कहीं रोजों की खुशी मनाई जाती है, तो कहीं कुर्बानी और बलिदान की याद ताजा होती है, और एक ईद पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिन के सम्मान में मनाई जाती है।
ईद उल फितर, ईद उल अजहा और ईद मिलाद-उन-नबी ये तीनों ईदें अपने आप में खास और बेहद पवित्र मानी जाती हैं। मगर बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें इन तीनों में अंतर भी नहीं पता है। आइए आज हम आपको इन तीनों ईदों के बीच के अंतर को आसान भाषा में समझाते हैं।

1. ईद उल फितर
ईद उल फितर को रोजों की खुशियों का त्योहार कहा जाता है। रमजान के पाक महीने में पूरे एक महीने तक रोजे रखने के बाद ईद उल फितर आती है जिसे मीठी ईद भी कहा जाता है। वहीं कुछ लोग इसे रोजा तोड़ने वाली ईद भी कहा जाता है। इस ईद में सुबह नमाज पढ़ने के बाद गले मिलकर "ईद मुबारक" कहा जाता है। गरीबों और जरूरतमंदों को फितरा दिया जाता है, ताकि वो भी इस त्योहार में शामिल हो सकें। हर घर में मीठे पकवान बनते हैं जिनमें सबसे ज्यादा सेवइयां बनाई जाती हैं।

2. ईद उल अजहा
ईद उल अजहा को कुर्बानी और बलिदान का त्योहार माना जाता है जिसे बकरीद भी कहा जाता है। इसकी जड़ें हजरत इब्राहीम की उस कहानी से जुड़ी हैं जब उन्होंने अल्लाह के हुक्म पर अपने बेटे की कुर्बानी देने का इरादा किया था।अल्लाह ने उनकी आस्था देखकर बेटे की जगह एक भेड़ भेज दी। तभी से इस दिन कुर्बानी दी जाती है और उसका मांस तीन हिस्सों में बांटा जाता है जो गरीबों को, रिश्तेदारों को और अपने परिवार को दिया जाता है। ये त्योहार त्याग, आस्था और इंसानियत का संदेश देता है।
3. ईद मिलाद-उन-नबी
ईद मिलाद-उन-नबी को पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्मदिन पर मनाया जाने वाला पर्व जिसे पैगंबर के जन्मदिन की ईद भी कहते हैं। इस दिन इस्लाम के पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का जन्मदिन मनाया जाता है। इसे मिलाद या बारावफात भी कहा जाता है। इस ईद के दिन इस्लाम को मानने वाले लोग जुलूस निकालते हैं नमाज पढ़ते हैं और नात (धार्मिक कविताएं) पढ़ते हैं। माना जाता है कि इस दिन मुसलमान पैगंबर की शिक्षाओं और उनके जीवन से सीख लेते हैं और उनके संदेशों को याद किया जाता है।



Click it and Unblock the Notifications
