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Hal Shashthi 2026: हल षष्ठी या बलराम जयंती कब है? जानें तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
Hal Shashthi 2026: भाद्रपद महीने में आने वाला हलषष्ठी का व्रत संतान की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से रखा जाता है। इसे हलछठ, हरछठ और ललही छठ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम का जन्मदिन मनाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है। मान्यता है कि उनके हाथ में रहने वाला हल इस पर्व से जुड़ा है, इसलिए व्रत के दौरान हल से उगी फसलों और उनसे बने अन्न का सेवन नहीं किया जाता। कई जगह महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में तिन्नी का चावल, महुआ और बिना हल से जोती जमीन या पानी में उगने वाली चीजें खाई जाती हैं। आइए, जानते हैं इस साल हल षष्ठी व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि के बारे में -

हलषष्ठी 2026 तारीख
हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि 2 सितंबर की सुबह 6 बजकर 12 मिनट से शुरू होगी। यह तिथि अगले दिन 3 सितंबर की सुबह 4 बजकर 25 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर हल षष्ठी व्रत 2 सितंबर 2026, बुधवार को रखा जाएगा।
हल छठ 2026 मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: 04:29 ए एम से 05:14 एएम
लाभ-उन्नति मुहूर्त: 05:59 ए एम से 07:35 एएम
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: 07:35 ए एम से 09:10 एएम
शुभ-उत्तम मुहूर्त: 10:45 ए एम से 12:21 पीएम
चर-सामान्य मुहूर्त: 03:31 पी एम से 05:06 पीएम
लाभ-उन्नति मुहूर्त: 05:06 पी एम से 06:42 पीएम
हलषष्ठी व्रत का महत्व
हलषष्ठी का व्रत संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से रखा जाता है। खासतौर पर माताएं इस दिन भगवान बलराम और षष्ठी माता की पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा के साथ व्रत और पूजा करने से संतान पर देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। इस व्रत का संबंध खेती और भगवान बलराम के हल से भी माना जाता है। इसी वजह से हलषष्ठी के दिन हल से जोते गए खेत में पैदा होने वाले अनाज का सेवन नहीं किया जाता। तिन्नी का चावल, महुआ और जल या बिना जोती जमीन में मिलने वाली चीजों को व्रत के भोजन में शामिल करने की परंपरा कई क्षेत्रों में है।
हलषष्ठी व्रत में हल से उगा अनाज नहीं खाते
हलषष्ठी के दिन खाने-पीने को लेकर खास नियम माना जाता है। इस दिन हल से जोती गई जमीन में उगा अनाज खाने की परंपरा नहीं है। इसलिए गेहूं, धान और इनसे बनी चीजों के अलावा खेत में उगने वाली दूसरी फसलों से भी परहेज किया जाता है। व्रत के दौरान ऐसी चीजें खाने की परंपरा है जो पानी में उगती हैं या बिना हल चलाए जमीन पर पैदा होती हैं। इनमें तिन्नी का चावल खास माना जाता है। कई जगह महुआ और करेमुआ का साग भी खाया जाता है। हालांकि, खाने की चीजों को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय परंपराएं भी हैं।
गाय के दूध की जगह भैंस के दूध का उपयोग
हलषष्ठी के व्रत में गाय के दूध और उससे बने दही का इस्तेमाल नहीं किया जाता। कई जगह व्रत रखने वाली महिलाएं भैंस के दूध, दही और घी का प्रयोग करती हैं। यह नियम भी अलग-अलग जगहों की परंपरा के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है।
पूजा में इन चीजों को किया जाता है शामिल
हलषष्ठी की पूजा में महुआ, तिन्नी का चावल, फूल, दूब, रोली, चंदन, नारियल और कुश जैसी चीजें रखी जाती हैं। इसके अलावा बिना हल से जोती जमीन में मिलने वाली स्थानीय सामग्री भी पूजा में शामिल की जाती है। कई जगह भैंस के गोबर से षष्ठी माता का चित्र बनाकर पूजा की जाती है। इसके बाद बलराम जी और षष्ठी माता को पूजा जाता है। कुछ स्थानों पर इसी पूजा के दौरान गणेश जी, भगवान शिव, माता पार्वती और दूसरे देवी-देवताओं की भी पूजा करने की परंपरा है।
हलषष्ठी व्रत की पूजा विधि
सुबह उठकर स्नान करें और पूजा वाली जगह को साफ कर लें।
आपके इलाके में अगर भैंस के गोबर से षष्ठी माता का चित्र बनाने की परंपरा है, तो इसे बनाया जा सकता है।
इसके बाद बलराम जी और षष्ठी माता की पूजा करें।
पूजा में रोली, चंदन, अक्षत, फूल, दूब, महुआ, तिन्नी का चावल, नारियल और फल चढ़ाएं।
भगवान बलराम को प्रणाम करके बच्चों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना करें। इसके बाद हलषष्ठी की कथा सुनें।
पूजा पूरी होने के बाद अपने क्षेत्र में चली आ रही परंपरा के अनुसार व्रत खोलें।
हलषष्ठी के दिन बनेंगे ये योग
2 सितंबर को ध्रुव योग रात 9 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। इसके बाद व्याघात योग शुरू हो जाएगा। रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग रात 1 बजकर 43 मिनट से शुरू होकर 3 सितंबर की सुबह 6 बजे तक रहेंगे। भरणी नक्षत्र भी 2 सितंबर की रात 1 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। इस दिन राहुकाल दोपहर 12 बजकर 21 मिनट से 1 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। इस समय पूजा करने से बचने की सलाह दी जाती है। पंचांग की गणना के अनुसार भद्रा 3 सितंबर की सुबह 4 बजकर 25 मिनट से 6 बजे तक रहेगी और इस दौरान उसका वास स्वर्ग में बताया गया है।



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