Dhanteras 2025 Wishes In Sanskrit: इस बार संस्कृत में अपने प्रियजनों को भेजें धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं

Happy Dhanteras 2025 Wishes In Sanskrit: हिंदू धर्म में धनतेरस पर्व का विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाया जाता है। इस दिन धन, स्वास्थ्य और समृद्धि के देवता धन्वंतरि की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन समुद्र मंथन से धन्वंतरि अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे। इसी कारण यह दिन 'धनतेरस' के नाम से जाना जाता है। इस साल धनतेरस का पर्व आज 18 अक्तूबर को मनाया जा रहा है।

धनतेरस पर सोने-चांदी खरीदारी करना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन लोग सोने-चांदी के आभूषण, नए बर्तन, गाड़ी, लक्ष्मी-गणेश की मूर्ती और अन्य मूलयवान वस्तुएं खरीदते हैं, जिससे उन्हें घर में सुख-समृद्धि का वास हो। धनतेरस के खास मौके पर आप भी अपने दोस्तों-रिश्तेदारों को संस्कृत में ये बधाई संदेश भेजें। यहां देखें धनतेरस की शुभकामनाएं संस्कृत में -

Happy Dhanteras 2025 Wishes And Quotes In Sanskrit

1. अन्वेषितं च सविधिं आरोग्यमस्य।

गूढं निगूढं औषध्यरूपम्, धन्वन्तरिं च सततं प्रणमामि नित्यं॥

2. त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप।
श्री धनवंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः।।

3. धनतेरसः पावनः सदा, समृद्धिपूर्णं जीवनं प्राप्नुहि।

लक्ष्मीः तव गृहे वासं करोतु, सुखं, स्वास्थ्यं च वर्धताम्।

4. ॐ नमो भगवते धन्वन्तरये अमृतकलशहस्ताय सर्व आमय।

विनाशनाय त्रिलोकनाथाय श्रीमहाविष्णुवे नम:।।

5. ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतरये

अमृतकलशहस्ताय सर्वभयविनाशाय सर्वरोगनिवारणाय।

Dhanteras Wishes

Dhanteras Wishes 2025 In Sanskrit

6. सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि।

मन्त्रपूते सदा देवि महालक्ष्मि नमोस्तु ते ॥

7. क्षीरोदमथनोद्भूतं दिव्यगन्धानुलेपिनम्।

सुधाकलशहस्तं तं वन्दे धन्वन्तरिं हरिम्॥

8. धन्वन्तरेरिमं श्लोकं भक्त्या नित्यं पठन्ति ये।
अनारोग्यं न तेषां स्यात् सुखं जीवन्ति ते चिरम्।।

Happy Dhanteras 2025 Wishes And Messages In Sanskrit

9. ॐ शंखं चक्रं जलौकां दधदमृतघटं चारुदोर्भिश्चतुर्मिः।
सूक्ष्मस्वच्छातिहृद्यांशुक परिविलसन्मौलिमंभोजनेत्रम।।
कालाम्भोदोज्ज्वलांगं कटितटविलसच्चारूपीतांबराढ्यम।
वन्दे धन्वंतरिं तं निखिलगदवनप्रौढदावाग्निलीलम।।

10. ओम तत शुद्धाय विद्महे अमृत कलसा हस्ताय
धीमहि तन्नो धनवंतरि प्रबोधयात्।"

11. नमानी धनवंतरी अदि देवम, सुरसुरा वंदितम पद पद्म,
लोके जरा रग्भय मृत्यु नशकम, दथाराम एशम विदेहुशदहिनम।

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