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Dussehra 2025 Sanskrit Wishes : धर्मो विजयते नित्यम्..संस्कृत में भेंजे अपनों को विजयदशमी की शुभकामनाएं
Happy Dussehra 2025 Wishes in Sanskrit : बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व दशहरा पूरे देश में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीराम ने लंका के राजा रावण का वध कर धर्म की स्थापना की थी। तभी से विजयादशमी का पर्व असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। दशहरे के दिन रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है, जो यह संदेश देता है कि हमें अपने भीतर छिपे क्रोध, अहंकार, लोभ और ईर्ष्या जैसी बुराइयों को खत्म करना चाहिए।
इस शुभ अवसर पर लोग एक-दूसरे को बधाई संदेश भेजते हैं। अगर आप इस बार की शुभकामनाओं को खास बनाना चाहते हैं, तो संस्कृत में संदेश भेजना उत्तम रहेगा। संस्कृत में दिए गए संदेश परंपरा और आध्यात्मिकता का सुंदर समन्वय करते हैं।

Happy Dussehra 2025 Wishes in Sanskrit (संस्कृत में विजयादशमी की शुभकामनाएं संदेश )
- देवी दुर्गा भवतः सर्वान् कामनाः प्रदातु, सुस्वास्थ्य, सफलता, सुखस्य च आशीर्वादं ददातु।
विजयादशमीपर्वणः हार्दाः शुभाशयाः
- शुभं विजयादशमी! धर्मो विजयते नित्यम्।
- एषः दशहराः पृथिव्यां सर्वान् विषादं दुःखं च दहतु,
भवतः सुखं समृद्धिं च जनयतु।
विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं!
- भगवान् रामः भवन्तं बलेन साहसेन च सद्धर्मस्य मार्गं अनुसृत्य आशीर्वादं ददातु।
आनन्दमय विजयादशमी हेतु शुभकामनाएं !
- भगवान् रामः भवतः सफलतायाः मार्गं प्रकाशयन् एव भवतु,
जीवनस्य प्रत्येकस्मिन् चरणे भवतः विजयः भवतु।
जय श्री राम। दशहरा हार्दिक शुभकामना!

- रावणस्य ज्वलन्तप्रतिमायाः साक्षिणः भवन्तः
स्मर्यतां यत् भवतः सर्वाणि
चिन्तानि चिन्ताश्च तेन सह दह्यन्ते,
भवतः जीवने भवतः परितः च सुखस्य,
उत्साहस्य च मार्गं प्रशस्तं करिष्यन्ति।
भवतः परिवाराय च दशहरायाः अतीव शुभकामना।
- ज्येष्ठस्तस्य महाबाहुः पुत्रः प्रियकरः प्रभुः।
पितुर्निदेशान्निष्क्रान्तः प्रविष्टो दण्डकावनम्।।
विजयादशमीपर्वणः हार्दाः शुभाशयाः

- न चापि त्रिषु लोकेषु राजन्विद्येत कश्चन।
राघवस्य व्यलीकं यः कृत्वा सुखमवाप्नुयात्।।
विजयादशमीपर्वणः हार्दाः शुभाशयाः
- न तु धर्मोपसंहारमधर्मफलसंहितम् ।
तदेव फलमन्वेति धर्मश्चाधर्मनाशन:।।
विजयादशमीपर्वणः हार्दाः शुभाशयाः
- तस्य तां स्पृशतो गात्रं तपसा न विनाशितम्।
न तदग्निशिखा कुर्यात्संस्पृष्टा पाणिना सती।।
विजयादशमीपर्वणः हार्दाः शुभाशयाः
- जनकस्यात्मजा कुर्याद्यत्क्रोधकलुषीकृता।
जाम्बवत्प्रमुखान् सर्वाननुज्ञाप्य महाहरीन्।।
विजयादशमीपर्वणः हार्दाः शुभाशयाः
- अहं तु रावणं युद्धे ससैन्यं सपुरस्सरम्।
सहपुत्त्रं वधिष्यामि सहोदरयुतं युधि।।
विजयादशमीपर्वणः हार्दाः शुभाशयाः
- सागरोऽप्यतियाद्वेलां मन्दरः प्रचलेदपि।
न जाम्बवन्तं समरे कम्पयेदरिवाहिनी।।
विजयादशमीपर्वणः हार्दाः शुभाशयाः

- पनसस्योरुवेगेन नीलस्य च महात्मनः।
मन्दरोऽप्यवशीर्येत किंपुनर्युधि राक्षसाः।।
विजयादशमीपर्वणः हार्दाः शुभाशयाः
- अश्विपुत्रौ महाभागावेतौ प्लवगसत्तमौ।
एतयोः प्रतियोद्दारं न पश्यामि रणाजिरे।।
विजयादशमीपर्वणः हार्दाः शुभाशयाः
- देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।
विजयादशमीपर्वणः हार्दाः शुभाशयाः



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