Latest Updates
-
‘बबीता सिंह रिपोर्टिंग’ के बाद निमिषा सजयन ने ऐसे घटाया 14 किलो वजन, एक्ट्रेस ने शेयर की वेट लॉस जर्नी -
Paryushana Mahaparva 2026: आज से शुरू हुआ हुआ पर्युषण महापर्व, जानें आठ दिनों का महत्व और नियम -
पेरिस में बना फ्रांस का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर, 1970 के संकल्प से 2026 तक ऐसे पूरा हुआ सफर -
International Literacy Day 2026: क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस? जानें इतिहास, महत्व और थीम -
International Literacy Day 2026: साक्षरता दिवस पर ये संदेश भेज सबको करें जागरूक, बताएं पढ़ने-लिखने का महत्व -
Aja Ekadashi Vrat Katha: अजा एकादशी पर पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगा अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य -
Aja Ekadashi 2026: नारायण की कृपा...इन संदेशों के साथ अपने प्रियजनों को भेजें अजा एकादशी की शुभकामनाएं -
National Nutrition Week: प्रेग्नेंसी में जरूरी है सही न्यूट्रिशन, जानें गर्भावस्था में क्या खाएं-क्या न खाएं -
Aja Ekadashi 2026: कब है अजा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और पारण समय -
Teacher's Day 2026: 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस? जानिए क्या है इसका इतिहास और महत्व
Kharmas 2025: आज से शुरू हुआ खरमास, इस दौरान क्या करें और क्या न करें, जानें सभी जरूरी नियम
Kharmas 2025 Do's And Dont's: खरमास की शुरुआत आज यानी 15 दिसंबर 2025, सोमवार से हो रही है। हिंदू धर्म में खरमास दौरान कोई भी शुभ मांगलिक कार्य करना वर्जित माना जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, जब सूर्य देव धनु राशि या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो उसे खरमास या मलमास कहा जाता है। माना जाता है कि इस दौरान सूर्य की ऊर्जा कम हो जाती है, जिसके चलते इस अवधि में शुभ कार्यों पर रोक लगा दी जाती है। खरमास के 30 दिनों में कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है। इस दौरान शादी-विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे शुभ कार्य वर्जित होते हैं। तो, आइए जानते हैं, खरमास 2025 कितने बजे शुरू होगा, कब समाप्त होगा और इस अवधि में किन नियमों का पालन करना चाहिए?

खरमास 2025 कब से कब तक रहेगा?
हिंदू पंचांग के अनुसार, सूर्य देव 16 दिसंबर 2025 को धनु राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ -
खरमास की शुरुआत: 16 दिसंबर 2025, मंगलवार को सुबह 4 बजकर 27 मिनट से
खरमास का समापन: 14 जनवरी 2026, मंगलवार को मकर संक्रांति के दिन
मकर संक्रांति के दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे और इसी के साथ खरमास समाप्त हो जाएगा। इसके बाद फिर से सभी शुभ कार्य किए जा सकेंगे।
खरमास में शुभ कार्य क्यों नहीं किए जाते?
हिंदू धर्म और ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, धनु और मीन राशि बृहस्पति की राशियां हैं। जब सूर्य इन राशियों में गोचर करते हैं, तो बृहस्पति के प्रभाव से सूर्य की ऊर्जा मंद यानी कमजोर पड़ जाती है। ऐसे में, इस अवधि किए गए मांगलिक और शुभ कार्यों में अपेक्षित सफलता और स्थिरता नहीं मिलती है। इसी कारण शास्त्रों में इस अवधि को विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों को वर्जित माना गया है।
खरमास में किन नियमों का पालन करना चाहिए?
रोज सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल अर्पित करें।
इस दौरान किसी पवित्र नदी में स्नान करना विशेष फलदायी माना जाता है।
खरमास के दौरान ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पूजा-पाठ और ध्यान करना शुभ रहता है।
इस दौरान हनुमान जी की आराधना करना लाभकारी माना गया है।
खरमास में संयम और ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए ईश्वर का स्मरण करना चाहिए।
खरमास में भूलकर भी न करें ये काम
खरमास के दौरान विवाह, सगाई, मुंडन, जनेऊ संस्कार और गृह निर्माण जैसे मांगलिक कार्य शुभ नहीं माने जाते।
इस अवधि में गृह प्रवेश नहीं करना चाहिए, क्योंकि मान्यता है कि इससे घर में परेशानी और अशांति बढ़ सकती है।
खरमास में गोद भराई, बहू का गृह प्रवेश और बड़े पारिवारिक आयोजन भी नहीं करने चाहिए।
खरमास के 30 दिनों में नया वाहन या घर खरीदने से बचना चाहिए।
इस अवधि में झगड़ा, विवाद और अनावश्यक बहस से दूरी रखें।
खरमास में मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन करने से भी परहेज करना चाहिए, क्योंकि इससे नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
खरमास में क्या करना चाहिए
खरमास का समय शुभ कार्यों के बजाय पूजा, भक्ति और दान के लिए उत्तम माना गया है।
खरमास में दान-पुण्य और धर्म-कर्म करने से अच्छे फल की प्राप्ति होती है।
इस दौरान रामायण, गीता और सत्यनारायण कथा का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है।
खरमास में पूजा-पाठ, हवन और दान करने से घर में सुख-शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहता है।
इन 30 दिनों में सूर्यदेव की आराधना का विशेष महत्व होता है, इसलिए श्रद्धापूर्वक सूर्य देव की पूजा करनी चाहिए।



Click it and Unblock the Notifications
