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Lakshmi Panchami 2026: कब है लक्ष्मी पंचमी? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
Lakshmi Panchami 2026: हिंदू धर्म में लक्ष्मी पंचमी का विशेष महत्व है। यह दिन धन, समृद्धि और वैभव की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को लक्ष्मी पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इसे श्री पंचमी या श्री व्रत भी कहा जाता है। लक्ष्मी पंचमी इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह नवरात्र के पांचवी तिथि पर पड़ता है। इस दिन लोग माता लक्ष्मी की पूरे विधि-विधान से पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पूजन करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और उनके आशीर्वाद से धन-धान्य में वृद्धि होती है। साथ ही, साल भर घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। तो आइए, जानते हैं इस साल लक्ष्मी पंचमी की तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि के बारे में विस्तार से -

लक्ष्मी पंचमी 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 22 मार्च 2025, रविवार को रात 9 बजकर 16 मिनट पर हो रही है। वहीं, इस तिथि का समापन 23 मार्च, सोमवार को शाम 06 बजकर 38 मिनट पर होगा। ऐसे में, उदया तिथि के अनुसार, लक्ष्मी पंचमी का व्रत 22 मार्च को रखा जाएगा।
लक्ष्मी पंचमी 2026 शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 4 बजकर 47 मिनट से 5 बजकर 35 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त - दोपहर 12 बजकर 3 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक
विजय मुहूर्त - दोपहर 2 बजकर 30 मिनट दोपहर से 3 बजकर 19 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त - शाम 6 बजकर 33 मिनट शाम से 6 बजकर 56 मिनट तक
अमृत काल - शाम 6 बजकर 37 मिनट शाम से 8 बजकर 5 मिनट तक
लक्ष्मी पंचमी का महत्व
लक्ष्मी पंचमी हिन्दू धर्म के महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है। इस दिन लोग धन-समृद्धि की देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं और अपने सुख-समृद्धि व खुशहाली के लिए आशीर्वाद मांगते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लक्ष्मी पंचमी का व्रत रखने और इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने से धन-धान्य में वृद्धि होती हैं और जीवन में आर्थिक संकट भी नहीं आते। साथ ही, कुंडली में मौजूद धन से जुड़े दोष भी दूर हो जाते हैं। इस दिन माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने से पारिवारिक जीवन में भी शुभ फल प्राप्त होते हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।
लक्ष्मी पंचमी पूजा विधि
लक्ष्मी पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
इसके बाद पूजा स्थल को गंगाजल से साफ करें।
अब एक चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं और उस पर माता लक्ष्मी की मूर्ति या प्रतिमा को स्थापित करें।
माता लक्ष्मी को पुष्प, फल, चंदन, सुपारी, रोली और लाल कपड़ा अर्पित करें। साथ ही, माता को मिठाई या खीर का भोग लगाएं।
अब धूप-दीप जलाकर माता की पूजा करें। पूजा के समय माता लक्ष्मी के विभिन्न मंत्रों का जाप करना चाहिए।
माता लक्ष्मी की पूजा के दौरान लक्ष्मी स्तोत्र या फिर श्री सूक्त का पाठ करना शुभ माना जाता है।
लक्ष्मी पंचमी के दिन कथा का पाठ करना या सुनना चाहिए।
पूजा के अंत में माता लक्ष्मी की आरती का पाठ करें।
पूजा समाप्त होने के बाद मिठाई और फल प्रसाद के रूप में वितरित करें।



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