Latest Updates
-
Paryushana Mahaparva 2026: आज से शुरू हुआ हुआ पर्युषण महापर्व, जानें आठ दिनों का महत्व और नियम -
पेरिस में बना फ्रांस का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर, 1970 के संकल्प से 2026 तक ऐसे पूरा हुआ सफर -
International Literacy Day 2026: क्यों मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस? जानें इतिहास, महत्व और थीम -
International Literacy Day 2026: साक्षरता दिवस पर ये संदेश भेज सबको करें जागरूक, बताएं पढ़ने-लिखने का महत्व -
Aja Ekadashi Vrat Katha: अजा एकादशी पर पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगा अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य -
Aja Ekadashi 2026: नारायण की कृपा...इन संदेशों के साथ अपने प्रियजनों को भेजें अजा एकादशी की शुभकामनाएं -
National Nutrition Week: प्रेग्नेंसी में जरूरी है सही न्यूट्रिशन, जानें गर्भावस्था में क्या खाएं-क्या न खाएं -
Aja Ekadashi 2026: कब है अजा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और पारण समय -
Teacher's Day 2026: 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है शिक्षक दिवस? जानिए क्या है इसका इतिहास और महत्व -
Teacher's Day 2026 Sanskrit Wishes: इन संस्कृत श्लोकोंं के जरिए गुरुजनों को भेजें शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं
Nirjala Ekadashi 2023: निर्जला एकादशी का व्रत किया तो विष्णु प्रसन्न होकर करते हैं सुख समृद्धि की बारिश
एकादशी भगवान् विष्णु को बहुत प्रिय है। एकादशी का व्रत करने वालों से विष्णु बहुत प्रसन्न होते हैं और सुख समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। लेकिन किसी कारणवश आप एकादशी का व्रत नहीं कर पाए तो फिर एक उपाय ये है कि आप एक निर्जला एकादशी कर लीजिये।
ऐसी मान्यता है कि एक निर्जला एकादशी करने से सारे एकादशियों का फल मिल जाता है। लेकिन ये व्रत बहुत कठिन है और इस दिन जल भी ग्रहण नहीं करते हैं।

इस व्रत को करने से सुहागिनों को बहुत फायदा होता है। पति की लम्बी उम्र और घर में सुख समृद्धि की बढ़ोतरी के लिए निर्जला एकादशी को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस प्रकार निर्जला एकादशी का कितना महत्व है ये आप समझ गए होंगे। आइये अब आपको बताते हैं इस वर्ष कब है निर्जला एकादशी।
निर्जला एकादशी 2023 की तिथि और मुहूर्त
ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष 2023 में ये तिथि आरंभ हो रही है 30 मई, दिन मंगलवार को दोपहर 1 बजकर 7 मिनट से और इसका समापन होगा 31 मई, दिन बुधवार को दोपहर 1 बजकर 45 मिनट पर। लेकिन उदया तिथि के अनुसार व्रत 31 मई को ही करना श्रेयस्कर होगा।

निर्जला एकादशी व्रत की पूजा विधि
सुबह सुबह स्नान कर लें।
घर के पूजा स्थल के पास आसन बिछा कर बैठ जाएं।
एक चौकी पर पीले रंग का कपडा बिछाएं।
भगवान विष्णु की तस्वीर रखें।
फिर गंगाजल छिड़क कर पूजा प्रारंभ करें।
फूल चन्दन धुप नैवेद्य और दीप से पूजा करें।
भगवन विष्णु को जो भी भोग लगायें उसमे तुलसी का पत्ता जरुर डालें।
एकादशी व्रत की कथा पढ़ें।
सुहाग का सामान चढ़ाएं और अगले दिन उसका दान कर दें।
पूरे व्रत के दौरान पानी तक नहीं पीना है।
अगले दिन मुहूर्त के अनुसार व्रत तोड़ कर पारण करें।
एकादशी व्रत के पारण का मुहूर्त
गुरुवार 1 जून को सुबह 5 बजकर 24 मिनट से 8 बजकर 10 मिनट के बीच व्रत संपन्न कर के पारण किया जा सकता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
