कब से शुरू हो रहे हैं श्राद्ध? जानें तिथि, धार्मिक महत्व और पितरों के तर्पण की सही विधि

Pitru Paksha 2026 Start And End Date: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) का एक विशेष और गहरा आध्यात्मिक महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर अमावस्या तक के 15 दिनों की अवधि को पितरों को समर्पित किया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन 15 दिनों में हमारे पूर्वज (पितर) यमलोक से पृथ्वी पर अपने परिजनों के बीच किसी न किसी रूप में आते हैं। अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और श्रद्धा प्रकट करने के लिए इस दौरान तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान जैसे पवित्र अनुष्ठान किए जाते हैं। मान्यता है कि इन कार्यों से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और वे अपने वंशजों को सुख, समृद्धि, दीर्घायु और शांति का अखंड आशीर्वाद देते हैं। आइए जानते हैं कि साल 2026 में पितृ पक्ष कब से शुरू हो रहा है, इसका धार्मिक महत्व क्या है और श्राद्ध की प्रमुख तिथियां कौन सी हैं।

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साल 2026 में पितृ पक्ष कब से शुरू है? (Pitru Paksha 2026 Start & End Date)

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, भाद्रपद माह की पूर्णिमा के बाद अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की शुरुआत होती है। साल 2026 में प्रतिपदा तिथि 26 सितंबर 2026 को रात 10 बजकर 18 मिनट पर प्रारंभ हो रही है, इसलिए इसी दिन से पूर्णिमा श्राद्ध के साथ पितृ पक्ष की शुरुआत हो जाएगी। पितृ पक्ष का यह पवित्र समय 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के दिन समाप्त होगा।

क्यों माना जाता है पितृ पक्ष को इतना फलदायी?

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान किए गए तर्पण और श्राद्ध से न केवल पितृ दोष से मुक्ति मिलती है, बल्कि जीवन के कई संकट भी दूर होते हैं। ऐसा माना जाता है कि प्रसन्न होकर पितर अपनी संतानों को दीर्घायु, धन, ज्ञान, और संतान सुख का वरदान देते हैं। इस अवधि में दान-पुण्य करने से व्यक्ति को आंतरिक व मानसिक शांति मिलती है और घर का वातावरण सकारात्मक बनता है।

पितृ पक्ष 2026: श्राद्ध की प्रमुख तिथियां (Pitru Paksha 2026 Shradh Dates)

इस वर्ष तिथियों के उतार-चढ़ाव के कारण कुछ श्राद्ध एक ही दिन पड़ रहे हैं। यहां देखें पूरी सूची:

तिथि और श्राद्ध तारीख (2026)
पूर्णिमा श्राद्ध 26 सितंबर 2026
प्रतिपदा श्राद्ध 27 सितंबर 2026
द्वितीया श्राद्ध 28 सितंबर 2026
तृतीया श्राद्ध 29 सितंबर 2026
चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध 30 सितंबर 2026
षष्ठी श्राद्ध 01 अक्टूबर 2026
सप्तमी श्राद्ध 02 अक्टूबर 2026
अष्टमी श्राद्ध 03 अक्टूबर 2026
नवमी श्राद्ध (मातृ नवमी) 04 अक्टूबर 2026
दशमी श्राद्ध 05 अक्टूबर 2026
एकादशी श्राद्ध 06 अक्टूबर 2026
द्वादशी और माघ श्राद्ध 07 अक्टूबर 2026
त्रयोदशी श्राद्ध 08 अक्टूबर 2026
चतुर्दशी श्राद्ध 09 अक्टूबर 2026
सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026

पितरों को जल देने (तर्पण करने) की सही विधि क्या है?

पितृ पक्ष के दौरान रोजाना या फिर अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि पर पूरी श्रद्धा के साथ तर्पण करना चाहिए। नीचे इस बारे में विस्तार से बताया गया है तर्पण किस तरह करना चाहिए?

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दिशा और समय: तर्पण हमेशा दोपहर के समय दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके करना चाहिए।

सामग्री का महत्व: तांबे के पात्र में स्वच्छ जल लेकर उसमें काले तिल मिलाएं। इसके बाद हाथ में कुश घास धारण करके अपने पूर्वजों का ध्यान करते हुए उन्हें जल अर्पित करें।

ब्राह्मण भोजन और दान: तर्पण अनुष्ठान पूरा होने के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े और अन्य जरूरी वस्तुओं का दान करें। इसके बाद आदरपूर्वक ब्राह्मणों को भोजन कराने से पितर अत्यंत तृप्त होते हैं और घर में हमेशा सुख-शांति का वास रहता है।

Story first published: Friday, June 19, 2026, 18:34 [IST]
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