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कैसे तय होता है मृत्यु के बाद स्वर्ग मिलेगा या नरक, प्रेमानंद जी महाराज ने बताया गुप्त राज
Premanand Ji Maharaj Pravachan: वृंदावन वाले प्रेमानंद महाराज जी सोशल मीडिया पर बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध है। उनके सत्संग को सुनने के लिए लोग देश विदेश से पहुँचते हैं। महाराज जी के पास सत्संग के दौरान अपने भक्तों के विभिन्न सवालों का जवाब देने का एक अनोखा अंदाज है। हाल ही में एक भक्त ने महाराज जी से सवाल किया कि मरने के पश्चात स्वर्ग और नर्क में कौन जाता है?
मृत्यु के बाद स्वर्ग मिलेगा या नरक?
महाराज जी ने अपनी मधुर वाणी से जवाब देते हुए कहा कि मानव के तीन शरीर है। सर्वप्रथम मानव का स्थूल शरीर होता है यह कभी छूटता नहीं है। महाराज जी बताते हैं दूसरा शरीर सूक्ष्म का है और अंतिम शरीर से तात्पर्य जीव के स्वभाव से है।

कर्म के अनुसार
प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि मानव शरीर, मन, बुद्धि चित्त, अहंकार, पाँच ज्ञानेंद्रिय, सूक्ष्म पांच कर्मेंद्रियाँ संपूर्ण ढाँचे का निर्माण करता है जिसके टूटने के पश्चात मानव के कर्म के मुताबिक उनको स्वर्ग और नरक मिलता है।
महाराज जी एक महत्वपूर्ण बात कहते हैं कि अगर कोई स्वर्ग जाता है तो वह देवी देवताओं का हो जाता है और अगर कोई नर्क जाता है तो वह यातना का हो जाता है। इसका उदाहरण देते हुए महाराज जी कहते हैं कि जब हमारा स्थूल शरीर शैय्या पर पड़ा होता है तो हम सपना देखते हैं अच्छा या बुरा।
अनुभव
महाराज जी कहते हैं कि जब हमारा शरीर पड़ा होता है और अगर कोई इसकी पिटाई करता है तो बहुत ही कष्ट दायक होता है। इस कारण हमारे अंदर डर भी समा जाता है।
सुख और दुख
प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि सबसे महत्वपूर्ण हमारा कर्म है। शरीर छूटने के पश्चात नर्क का दुख और स्वर्ग का सुख दोनों कर्म के मुताबिक हमें भोगना पड़ता है।
स्थिति
प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि जीते जी आप भागवत रूपी नैया पर सवार हो। भगवान के चरण में जाकर नाम जप करें। इससे आने वाले कर्म में किसी प्रकार के न दुख रहेगा न कष्ट का संशय रहेगा।
भगवान के चरणों में मन
प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि आप ज्यादा से ज्यादा समय भगवान श्री बांके बिहारी के चरणों पर मन लगाएँ जिससे हर प्रकार के पाप समेत सभी कष्ट नष्ट हो जाएंगे।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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