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Sawan Pradosh Vrat: जीवन में सुख, शांति, यश, सम्मान, लंबी आयु के लिए करें सावन का दूसरा प्रदोष व्रत
Sawan Pradosh Vrat: हिन्दू पंचांग के अनुसार हर महीने में दो एकादशी और दो प्रदोष व्रत आते हैं। हालांकि इस वर्ष का सावन माह ख़ास है क्योंकि इसकी अवधि 59 दिनों यानि लगभग दो महीनों की है।
इस तरह श्रावन के माह में इस बार चार एकादशी और चार प्रदोष व्रत आने वाले हैं। हर माह में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है।

इस दिन भगवान् शिव और माता पार्वती की सच्चे मन से पूजा अर्चना की जाती है इसलिए सावन माह में आने वाले प्रदोष व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है। जानते हैं सावन के दूसरे प्रदोष व्रत की तिथि, मुहूर्त और महत्व के बारे में विस्तार से -
सावन के दूसरा प्रदोष व्रत की तिथि एवं शुभ मुहूर्त
सावन अधिकमास शुरू हो चुका है। शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 30 जुलाई को सुबह 10:34 बजे होगा और समापन 31 जुलाई को सुबह 07:26 बजे होगा। प्रदोष व्रत में शाम की पूजा का महत्व होता है इसलिए यह 30 जुलाई को माना जाएगा। यह रविवार के दिन पड़ रहा है इसलिए इसे रवि प्रदोष व्रत का नाम दिया गया है।
शिव-पार्वती पूजा का मुहूर्त 30 जुलाई को शाम 07:14 से रात के 09:17 बजे तक रहेगा।

प्रदोष व्रत का महत्व
प्रदोष व्रत हफ्ते के जिस दिन पड़ता है उसे उस दिन का नाम मिल जाता है जैसे रवि प्रदोष व्रत। इस दिन शिव पार्वती की आराधन से विवाहित स्त्रियों को सौभाग्य प्राप्त होता है। इसके साथ ही प्रदोष व्रत के पालन से जीवन में रोगों और दोषों से मुक्ति मिलती हैं और सुख समृद्धि व खुशहाली का आगमन भी होता है।
रवि प्रदोष व्रत के दिन बन रहे हैं ये विशेष योग
प्रदोष व्रत के साथ साथ सर्वार्थ सिद्धि योग, इंद्र योग और रवि योग भी बन रहे हैं।
सर्वार्थ सिद्धि योग - सुबह 06:10 से 09:02 बजे तक का है।
इंद्र योग - 29 जुलाई की सुबह 09:34 बजे से शुरू होकर 30 जुलाई की सुबह 06:34 बजे तक रहेगा।
रवि योग - 09:02 बजे से शुरू होकर 30 जुलाई के दिन भर रहने वाला है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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