Navratri Fast In Periods: क्या पीरियड्स में नवरात्रि का व्रत रख सकती हैं महिलाएं? जानें क्या हैं नियम

Navratri Fast In Periods: नवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्यौहार है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस साल शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर, रविवार से शुरू हो रही है। मान्यता है कि पूरे विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा और व्रत करने से मां का आशीर्वाद मिलता है और सुख-समृद्धि बनी रहती है। लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि नवरात्रि के दौरान कई महिलाओं को पीरियड आ जाते हैं। ऐसे में, कई महिलाओं के मन में यह सवाल आता है कि अगर नवरात्रि से पहले या व्रत के दौरान पीरियड्स आ जाएं, तो क्या व्रत रखा जा सकता है? आइए जानते हैं इसका जवाब -

Navratri Fast In Periods

क्या पीरियड्स के दौरान नवरात्रि का व्रत रखा जा सकता है?

ज्योतिष विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि किसी महिला को नवरात्रि की पूजा शुरू करने से पहले या पूजा के बीच में पीरियड्स आ जाएं, तो वह व्रत जारी रख सकती हैं। शास्त्रों में भी इसका उल्लेख मिलता है कि व्रत शुरू होने के बाद पीरियड्स आने से व्रत का फल समाप्त नहीं होता। ऐसी स्थिति में महिलाएं मानसिक रूप से मां दुर्गा का ध्यान, मंत्र-जप और प्रार्थना कर सकती हैं। क्योंकि पीरियड्स एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है, इसलिए इसे लेकर किसी तरह का अपराधबोध या चिंता नहीं रखनी चाहिए। श्रद्धा और सच्चे मन से की गई भक्ति को ही सबसे अधिक महत्व दिया गया है। हालांकि, पूजा-पाठ और भोग से जुड़े कुछ पारंपरिक नियमों का ध्यान रखना चाहिए।

नवरात्रि में पीरियड्स आएं तो इन बातों का रखें ध्यान

अगर नवरात्रि के दौरान मासिक धर्म शुरू हो जाए, तो पूजा-पाठ और भोग से जुड़े कुछ नियमों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है -

माता की मूर्ति और पूजा सामग्री को न छुएं: मासिक धर्म के दौरान घर के मंदिर, माता रानी की मूर्ति, देवी-देवताओं की तस्वीर और पूजा की थाली को स्पर्श नहीं करना चाहिए। ऐसे में पूजा से जुड़े काम परिवार के दूसरे सदस्य की मदद से किए जा सकते हैं।

मानसिक जप करें: पीरियड्स के दौरान पूजा घर और पूजा सामग्री को स्पर्श नहीं करना चाहिए। ऐसे में दूर बैठकर माता रानी का ध्यान कर सकती हैं। दुर्गा चालीसा, नवार्ण मंत्र या माता के भजनों का मन ही मन जाप कर सकती हैं।

शुरुआती तीन दिनों तक न बनाएं माता का भोग: मासिक धर्म के पहले तीन दिनों में माता रानी के भोग के लिए रखे बर्तनों और राशन को हाथ नहीं लगाना चाहिए। इस दौरान माता के लिए प्रसाद भी स्वयं नहीं बनाना चाहिए। इसके लिए घर के किसी दूसरे सदस्य की मदद ली जा सकती है।

चौथे या पांचवें दिन फिर शुरू करें पूजा: आमतौर पर मासिक धर्म बंद होने के बाद चौथे या पांचवें दिन बाल धोकर स्नान करने और फिर से नियमित पूजा शुरू करने की बात कही जाती है। इसके बाद सामान्य तरीके से पूजा-पाठ कर सकती हैं।

खुद न करें घटस्थापना: मासिक धर्म के दौरान घटस्थापना, अखंड ज्योति जलाने और जौ बोने का काम स्वयं नहीं करना चाहिए। इसके लिए परिवार के किसी सदस्य की सहायता ले सकती हैं। अगर घर में कोई मदद करने वाला नहीं है, तो पंडितजी से पूजा की विधि पूरी करवा सकती हैं।

Story first published: Saturday, October 10, 2026, 17:00 [IST]
Desktop Bottom Promotion