Latest Updates
-
पार्टी में जल्दी बिगड़ जाता है मेकअप? केकी और पैची लुक से बचने के लिए अपनाएं ये 5 टिप्स -
दशहरा के बाद दिल्ली की हवा हुई जहरीली, 200 के पार पहुंचा AQI, प्रदूषण से बचाव के लिए फॉलो करें ये टिप्स -
कुल्लू दशहरा में नहीं जलता रावण का पुतला, देवलोक से आते हैं देवी-देवता, जानिए क्या है सदियों पुरानी परंपरा -
Papankusha Ekadashi 2026: कब है पापांकुशा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
Navratri Ke Baad Jau Ka Kya Kare: नवरात्रि समाप्त होने के बाद उगे हुए जौ का क्या करें? जानें सही नियम और उपाय -
दीपिका पादुकोण-रणवीर सिंह ने किया दूसरी बेटी के नाम का खुलासा, दशहरे पर दिखाई पहली झलक -
Shardiya Navratri 2026 Day 8: नवरात्रि के आठवें दिन करें मां महागौरी की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग और आरती -
Durga Ashtami 2026 Wishes: महागौरी की कृपा...इन संदेशों के साथ अपनों को दें दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं -
सिर्फ गांठ ही नहीं, ये 5 संकेत भी हो सकते हैं ब्रेस्ट कैंसर का लक्षण, साधारण समझकर इग्नोर करने की न करें भूल -
Maha Navami 2026: 19 या 20 अक्तूबर, महानवमी कब है? जानें तिथि, हवन और कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त
Chanakya Niti: सांप से भी ज्यादा खतरनाक होते हैं ऐसे लोग
आचार्य चाणक्य ने अपने जीवन के अनुभवों, ज्ञान और शिक्षा के आधार पर मानव जीवन से संबंधित कई महत्वपूर्ण नीतियां बताई हैं। ये नीतियां भले ही थोड़ी कठोर लगें लेकिन सैकड़ों सालों पूर्व लिखी गए ये नियम आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने बताया कि एक दुष्ट आदमी सांप से भी ज्यादा ज़हरीला होता है। कुछ इसी प्रकार की सीख और नीतियां आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति में लिखीं। आज हम आपके लिए कुछ ऐसी ही जीवन सम्बन्धी नीतियां लेकर आए हैं -

दुष्ट व्यक्ति होता है सर्प से भी बुरा
चाणक्य नीति में आचार्य कई जगहों पर दुष्ट या गलत आदमी की पहचान और उनसे दूर रहने की सलाह देते हैं। उनके अनुसार दुर्जन व्यक्ति सांप से भी बुरा होता है। उनके अनुसार कोई सांप स्वयं को खतरा महसूस होने पर ही हमला करता है परन्तु दुष्ट आदमी अपने लाभ के लिए पग पग पर दूसरों को हानि पहुंचाने से पीछे नहीं हटता। वे एक श्लोक के माध्यम से यह नीति बताते हैं -
दुर्जनेषु च सर्पेषु वरं सर्पो न दुर्जनः ।
सर्पो दंशति कालेन दुर्जनस्तु पदे-पदे ।।

आचरण से होती है मनुष्य की पहचान
चाणक्य के अनुसार मनुष्य के कुल और उसकी पहचान उसके आचरण से हो जाती है। वह खुद के मुख से स्वयं की कितनी भी प्रशंसा भले ही क्यों ना करें, परन्तु उस व्यक्ति की असली पहचान उसके आचरण से ही होती है।

मूर्खों को ना बनाएं मित्र
चाणक्य के अनुसार मूर्खों से हमेशा दूरी बनाये रखनी चाहिए। वे कहते हैं कि मूर्खों को मित्र नहीं बनाना चाहिए। वे प्रत्यक्ष तौर पर दो पैर वाले पशु के समान होता है, ऐसे में उसे त्यागना ही सही होता है।

संतान को देनी चाहिए अच्छी शिक्षा
आचार्य के अनुसार अपनी संतान को बहुत अच्छी शिक्षा प्राप्त करानी चाहिए। साथ ही लड़की का विवाह अच्छे कुल में ही करना चाहिए। अपने पुत्र को अच्छी शिक्षा देने के साथ ही अपने मित्रों को धर्म के कार्यों में लगाना चाहिए।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
