Latest Updates
-
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर करिश्मा तन्ना के घर गूंजी किलकारी, इस शुभ दिन जन्मे बच्चों के लिए चुनें ये खास नाम -
30 जुलाई या 2 अगस्त, फ्रेंडशिप डे कब है? जानें International Friendship Day और Friendship Day में फर्क -
Happy Sawan 2026 Wishes: ...इन संदेशों के जरिए अपने प्रियजनों को दें सावन की शुभकामनाएं -
कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? जानिए कौन था पहला कांवड़िया, जिसने सबसे पहले चढ़ाया था शिवलिंग पर जल -
कलौंजी के तेल से बनाएं बालों को लंबा और घना, जानें इसे घर पर बनाने का तरीका -
देव आनंद के बेटे सुनील आनंद का हार्ट अटैक से निधन, जिस अस्पताल में पिता ने ली थी अंतिम सांस वहीं तोड़ा दम -
Guru Purnima 2026 Speech: गुरु पूर्णिमा पर दें ये सरल और दमदार भाषण, तालियों से गूंज उठेगा पूरा हॉल -
Guru Purnima 2026 Wishes: गुरु से ही ज्ञान...गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरुजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
World Nature Conservation Day 2026: क्यों मनाते हैं विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
World Hepatitis Day 2026: हेपेटाइटिस क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण, प्रकार और बचाव के उपाय
Chanakya Niti: सांप से भी ज्यादा खतरनाक होते हैं ऐसे लोग
आचार्य चाणक्य ने अपने जीवन के अनुभवों, ज्ञान और शिक्षा के आधार पर मानव जीवन से संबंधित कई महत्वपूर्ण नीतियां बताई हैं। ये नीतियां भले ही थोड़ी कठोर लगें लेकिन सैकड़ों सालों पूर्व लिखी गए ये नियम आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने बताया कि एक दुष्ट आदमी सांप से भी ज्यादा ज़हरीला होता है। कुछ इसी प्रकार की सीख और नीतियां आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति में लिखीं। आज हम आपके लिए कुछ ऐसी ही जीवन सम्बन्धी नीतियां लेकर आए हैं -

दुष्ट व्यक्ति होता है सर्प से भी बुरा
चाणक्य नीति में आचार्य कई जगहों पर दुष्ट या गलत आदमी की पहचान और उनसे दूर रहने की सलाह देते हैं। उनके अनुसार दुर्जन व्यक्ति सांप से भी बुरा होता है। उनके अनुसार कोई सांप स्वयं को खतरा महसूस होने पर ही हमला करता है परन्तु दुष्ट आदमी अपने लाभ के लिए पग पग पर दूसरों को हानि पहुंचाने से पीछे नहीं हटता। वे एक श्लोक के माध्यम से यह नीति बताते हैं -
दुर्जनेषु च सर्पेषु वरं सर्पो न दुर्जनः ।
सर्पो दंशति कालेन दुर्जनस्तु पदे-पदे ।।

आचरण से होती है मनुष्य की पहचान
चाणक्य के अनुसार मनुष्य के कुल और उसकी पहचान उसके आचरण से हो जाती है। वह खुद के मुख से स्वयं की कितनी भी प्रशंसा भले ही क्यों ना करें, परन्तु उस व्यक्ति की असली पहचान उसके आचरण से ही होती है।

मूर्खों को ना बनाएं मित्र
चाणक्य के अनुसार मूर्खों से हमेशा दूरी बनाये रखनी चाहिए। वे कहते हैं कि मूर्खों को मित्र नहीं बनाना चाहिए। वे प्रत्यक्ष तौर पर दो पैर वाले पशु के समान होता है, ऐसे में उसे त्यागना ही सही होता है।

संतान को देनी चाहिए अच्छी शिक्षा
आचार्य के अनुसार अपनी संतान को बहुत अच्छी शिक्षा प्राप्त करानी चाहिए। साथ ही लड़की का विवाह अच्छे कुल में ही करना चाहिए। अपने पुत्र को अच्छी शिक्षा देने के साथ ही अपने मित्रों को धर्म के कार्यों में लगाना चाहिए।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications