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भारत का अंतिम ज्योतिर्लिंग है घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग, जानिए इससे जुड़े फैक्ट्स

भारत में भगवान शिव के कई प्राचीन मंदिर हैं। हर मंदिर की अपनी अलग पौराणिक मान्यता है। देश दुनिया से श्रद्धालु इन मंदिरों में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने आते हैं। लेकिन भारत के मशहूर भगवान शिव के इन 12 ज्योतिर्लिंग का अपना अलग ही महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इन 12 ज्योतिर्लिंगों में भगवान शिव ने खुद प्रकट होकर अपने दर्शन दिए थे। जिसके बाद इन सभी जगहों पर 12 ज्योतिर्लिंगों की स्थापना की गई। इन सभी ज्योतिर्लिंगों की अपनी अलग विशेषताएं हैं। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति अपनी लाइफ में सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करता है, उसके सात जन्मों के पाप माफ हो जाते हैं। इन्हीं 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग भी है। जो सभी ज्योतिर्लिंग में सबसे अंतिम और छोटा ज्योतिर्लिंग है। तो आइए जानते हैं घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में...
घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग की खासियत
1. घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत का सबसे छोटा ज्योतिर्लिंग है। इस मंदिर का आकार 240 * 185 फीट है। मंदिर के बीच भगवान विष्णु के दशावतार का चित्रण भी हुआ है।
2. घृष्णेश्वर मंदिर में तीन द्वार का निर्माण किया गया है। गर्भगृह के सामने एक बड़ा सा मंडप भी बनाया गया है। मंदिर के निर्माण में 24 खंभे बनाए गए हैं। इन सभी खंभों पर प्राचीन समय के शिलालेख और हस्तलिपियां बनी हुई हैं।
3. इस मंदिर में भगवान शिव के पिण्ड का मुंह पूर्व दिशा की ओर रखा गया है। इतना ही नहीं इस मंदिर की दीवारों पर प्राचीन समय के हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरें भी बनाई गई हैं। गर्भगृह के पूर्व दिशा की ओर शिवलिंग है।
4. इतिहास से पता चलता है कि भगवान शिव के इस मंदिर का पुनर्निर्माण देवी अहिल्याबाई होल्कर ने अपनी देख रेख में करवाया था। इस मंदिर से थोड़ी ही दूरी पर एलोरा की विश्व प्रसिद्ध गुफाएं भी हैं। इन गुफाओं में कैलाश नाम की गुफा सर्वश्रेष्ठ और सबसे सुंदर है। पहाड़ को काटकर इन गुफाओं का निर्माण किया गया है।
5. शास्त्रों के मुताबिक इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से भक्तों की सभी मनोकामना पूरी होती है। श्रद्धालुओं को सुख-शांति और संतान की प्राप्ति भी होती है।
6. पौराणिक कथाओं के मुताबिक घुश्मा नाम की महिला की भक्ति से खुश होकर भगवान शिव ने इस स्थान पर उन्हें अपने दर्शन दिए थे। जिसके बाद घुश्मा को भगवान शिव ने संतान सुख का आशीर्वाद भी दिया था। इस ज्योतिर्लिंग को लेकर ये मान्याता है कि जिन जोड़ों को संतान नहीं होती, अगर वो एक साथ यहां आकर संतान प्राप्ति की मनोकामना मांगे तो वो जरूर पूरी होती है।
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