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भगवान विष्णु का एकमात्र स्त्री अवतार है मोहिनी, आखिर क्यों लेना पड़ा ये मनमोहक रूप
वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का दिन मोहिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। देश के कई हिस्सों में मोहिनी एकादशी 3 मई को मनाई गयी तो वहीं अधिकतर स्थानों पर 4 मई को पूजा की जा रही है। ऐसी मान्यता है कि मोहिनी एकादशी का व्रत करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। मोहिनी एकादशी को काफी प्रभावशाली माना गया है और कहा जाता है कि इस व्रत को करने वाला व्यक्ति जीवन में सभी तरह के दुखों से दूर रहता है तथा उसे बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु का स्मरण करें और रात्रि के समय भजन कीर्तन करना चाहिए।

विष्णु जी ने क्यों धारण किया मोहिनी रूप
समुद्र मंथन के पश्चात् जब अमृत से भरा हुआ घड़ा निकला तब राक्षस उसे पाने के लिए देवताओं से युद्ध करने लगे। राक्षसों द्वारा अमृत का सेवन कर लिया जाता तो वे मनुष्यों के साथ साथ देवताओं के बीच अपना आतंक मचाने में कामयाब हो जाते। देवगण इस भयंकर विपत्ति से बचने के लिए भगवान विष्णु के पास सहायता के लिए पहुंचे।
विष्णु जी ने मोहिनी नाम की अप्सरा का रूप धारण किया। उनकी वो मनमोहक छवि देखकर राक्षस ही नहीं देवता भी उनपर मोहित हो उठे थे। अपने इस रूप से राक्षसों को रिझाते हुए भगवान विष्णु ने छल से अमृत कलश असुरों से हासिल कर लिया और समस्त देवतागण को एक बड़ी विपदा से बचाया। विष्णु जी के मोहिनी रूप के कारण अमृत पाने के इस युद्ध में देवताओं की विजय हुई और असुरों की हार।

एकादशी के दिन करें ये काम
प्रातः स्नानादि के पश्चात् तुलसी पर जल चढ़ाएं।
भगवान विष्णु के समक्ष व्रत तथा दान का संकल्प लें।
संभव हो तो इस दिन कुछ न खाएं। अगर ऐसा करना मुमकिन न हो तो फलाहार कर सकते हैं।
इस दिन जल से भरा मिट्टी का पात्र दान करें।
प्रातः और सांझ में तुलसी के पास दीपक जलाएं।
शाम के समय भगवान विष्णु और लक्ष्मी मां की पूजा करें।

एकादशी के दिन न करें ये काम
इस दिन देर तक सोने से बचें।
गुस्से पर नियंत्रण रखें। घर परिवार में किसी से झगड़ा न करें।
इस दिन तामसिक भोजन न करें।
इस दिन व्यक्ति को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
अपने मन में किसी भी शख्स के लिए बुरी भावना न लाएं।



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