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पद्मिनी एकादशी: पुत्र प्राप्ति और धन लाभ के लिए करें व्रत और पूजा
पद्मिनी एकादशी को कमला एकादशी भी कहा जाता है। यह एकादशी तीन साल में एक बार आती है। इस वर्ष पद्मिनी एकादशी ज्येष्ठ महीने में पड़ रही है। अधिकमास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, शिव जी और माता पार्वती की पूजा की जाती है। पद्मिनी एकादशी पर व्रत और पूजा बहुत ही लाभकारी माना गया है। इस बार पद्मिनी एकादशी 25 मई, 2018, शुक्रवार को है।
इस एकादशी पर दान का बड़ा ही महत्व होता है इसलिए जो लोग व्रत नहीं कर पाते वह मात्र दान करके व्रत के बराबर फल प्राप्त कर सकते हैं। इस वर्ष पद्मिनी एकादशी पर विशेष संयोग बन रहा है अगर आप इस एकादशी पर विधिपूर्वक पूजा अर्चना करेंगे तो आपको मनवांछित फल की प्राप्ति होगी। जो लोग पुत्र प्राप्ति की कामना रखते हैं, इस दिन पूजा और व्रत करने से भगवान उनकी मनोकामना ज़रूर पूरी करते हैं। आइए जानते हैं पद्मिनी एकादशी की कथा, महत्व और इसके व्रत और पूजा विधि के बारे में।

व्रत कथा
प्राचीन काल में कीर्तिवीर्य नामक राजा थे। उनकी 1000 रानियां थीं परन्तु उस राजा का एक भी पुत्र नहीं था। इस कारण वह हमेशा दुखी रहते थे। उन्हें हर समय इस बात की चिंता सताती थी कि उनके बाद सारा राज पाट कौन संभालेगा और कौन उनके वंश को आगे बढ़ाएगा। उन्होंने अपनी समस्या के समाधान के लिए हर तरह के उपाय कर लिए थे किन्तु उन्हें सफलता नहीं मिली। अंत में राजा ने निश्चय किया कि वह ईश्वर की शरण में जाएंगे।
तब राजा ने अपनी रानी जो की इश्वाकु वंश के राजा हरिशचंद्र की पुत्री पद्मिनी थी के साथ वन की ओर तपस्या के लिए निकल पड़े। राजा ने अपना सारा राज पाट अपने मंत्रियों को सौंप दिया और यह प्रण लिया कि जब तक भगवान उनकी मनोकामना पूरी नहीं करते तब तक वह तपस्या करते रहेंगे। किन्तु हज़ारों वर्ष कठोर तपस्या करने के बाद भी ईश्वर ने उनकी प्रार्थना स्वीकार नहीं की। तब सती अनुसूया ने रानी पद्मिनी को इस एकादशी व्रत के बारे में बताया। यह सुनकर राजा और रानी दोनों ने ही इस व्रत को पूरी श्रद्धा और सच्चे मन से किया, तब ईश्वर की कृपा से उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई।
व्रत और पूजा विधि
पद्मिनी एकादशी पर पवित्र नदी में स्नान करना बहुत ही शुभ माना जाता है। यदि आप किसी नदी में स्नान नहीं कर पाते तो नहाने के पानी में गंगा जल डालकर उसे शुद्ध कर लें। साथ ही स्नान में तिल, मिट्टी, कुश व आंवले के चुर्ण भी शामिल करें। इसके बाद सफेद वस्त्र धारण करके भगवान की धुप, दीप, नैवेद्य, पुष्प, केसर आदि से पूजा करें। इसके बाद व्रत कथा पढ़ें या सुने। अगर आप में इस व्रत में निर्जल रहने की शक्ति है तो ठीक है, नहीं तो आप फलाहार से भी व्रत कर सकते हैं।
पद्मिनी एकादशी का महत्व
व्रत और पूजन करने से मनुष्य की सभी इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं और भगवान के आशीर्वाद से उसे धन की भी कमी नहीं होती। साथ ही उपासक का स्वास्थ भी अच्छा रहता है और जाने अनजाने हुए उसके सभी पापों का नाश हो जाता है। शास्त्रों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि पद्मिनी एकादशी के महत्व के बारे में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया था। इस दिन दान करने से अनेक पुण्यों की प्राप्ति होती है। इस दिन ज़रूरतमंदों को तिल, वस्त्र, धन, फल और मिठाई आदि का दान करना चाहिए।
इन बातों का रखें ध्यान
1. नमक का सेवन न करें।
2. ब्रह्मचर्य का पालन करें।
3. बिस्तर पर न सोकर ज़मीन पर सोएं।
4. रात्रि जागरण करें और भगवान का स्मरण करें।
5. सूर्योदय तक जागरण करें और स्नान करके ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
6. प्रति पहर भगवान की पूजा करें।
7. पहले पहर में भगवान को नारियल, दूसरे में बिल्वफल, तीसरे में सीताफल और चौथे में सुपारी, नारंगी अर्पित करें।
8. झूठ और छल से दूर रहें।
9. स्नान करते समय वरुण मंत्र का जाप करें - ॐ वम वरुणाय नमः।
10. इस व्रत को करने के लिए दशमी के दिन कांसे के बर्तन में भोजन करें।
शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि शुरू: 24 मई 2018 को शाम 06:18 बजे
एकादशी तिथि समाप्त : 25 मई 2018 को शाम 05:47 बजे
पारण: 26 मई को सुबह 05:29 से 08:13 बजे



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