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Navratri 2025 : नवरात्रि में नाखून-बाल काटने की मनाही, फिर क्यों कराते हैं बच्चों का मुंडन?
Navratri 2025 Mundan : शारदीय नवरात्रि 2025, जो 22 सितंबर 2025 से शुरू हो रही है, न केवल देवी आदिशक्ति की पूजा-अर्चना का पर्व है, बल्कि यह नई शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। नवरात्रि में नौ दिन तक माता का आशीर्वाद पाने और पवित्रता बनाए रखने के लिए बाल, दाढ़ी और नाखून न काटने की सलाह दी जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि छोटे बच्चों का मुंडन नवरात्रि में क्यों शुभ माना जाता है और इससे क्या लाभ होते हैं।

मुंडन क्यों किया जाता है
मुंडन संस्कार को चूड़ाकर्म भी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, मुंडन कराने से बच्चे का मानसिक और शारीरिक विकास होता है। गर्मियों में बच्चे के बाल अपवित्र माने जाते हैं और मुंडन के माध्यम से बालों को पवित्र किया जाता है। यह संस्कार बच्चे को नकारात्मक प्रभावों से दूर रखने और उसके जीवन को शुद्ध बनाने का एक महत्वपूर्ण तरीका है।
नवरात्रि में मुंडन संस्कार का महत्व
नवरात्रि का पर्व नई शुरुआत का प्रतीक है। इस दौरान बच्चों का मुंडन कराने से उन्हें मां आदिशक्ति की कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि मुंडन संस्कार कराने से बच्चे पर ग्रहदोष का प्रभाव नहीं पड़ता और वह सौभाग्यशाली बनता है। साथ ही, इस समय मुंडन कराने से सिद्धियां प्राप्त करने का मार्ग भी सुगम होता है।
नवरात्रि में मुंडन की परंपरा बहुत पुरानी है। माना जाता है कि यह संस्कार बच्चे को शुद्ध करता है और किसी भी नकारात्मक ऊर्जा या प्रभाव को दूर करता है।
बच्चों का मुंडन: शुद्धि का प्रतीक
मुंडन से बालों का कटना शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह संस्कार बच्चों को बुरे प्रभावों से मुक्त करता है और उन्हें अच्छे स्वास्थ्य, मानसिक विकास और समृद्धि की प्राप्ति होती है। नवरात्रि में मुंडन कराने से माता की कृपा बनी रहती है और बच्चे जीवन में कभी भी परेशानियों का सामना नहीं करते।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
नवरात्रि के बाद ठंड का मौसम शुरू हो जाता है। इस समय बच्चे के बाल मुंडवाने का एक वैज्ञानिक कारण भी है। सिर पर सीधे धूप लगने से बच्चे को विटामिन डी मिलती है, जो मस्तिष्क और हड्डियों के विकास में मदद करती है। इस तरह नवरात्रि में मुंडन केवल धार्मिक रूप से ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी लाभकारी माना जाता है।
नवरात्रि में मुंडन कैसे करें
मुंडन संस्कार घर के आंगन में तुलसी के पास या किसी धार्मिक स्थल जैसे माता के मंदिर में किया जा सकता है। प्रक्रिया इस प्रकार है:
- मां बच्चे को अपनी गोद में लेकर उसका मुंह पश्चिम दिशा में हवन की अग्नि की तरफ रखती हैं।
- इसके बाद बच्चे के बाल उतारे जाते हैं।
- बाल काटने के बाद सिर को गंगाजल से धोकर हल्दी का लेप लगाया जाता है।
- अंत में बच्चे को नए कपड़े पहनाए जाते हैं और पूजा की विधि पूरी की जाती है।
- इस प्रक्रिया से बच्चे का शरीर, मन और आत्मा शुद्ध होती है और उसे माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।



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