Latest Updates
-
Aaj Ka Rashifal 17 April 2026: वैशाख अमावस्या पर कर्क और तुला का चमकेगा भाग्य, जानें अपना राशिफल -
जुबिन नौटियाल ने उत्तराखंड में गुपचुप रचाई शादी, जानें कौन है सिंगर की दुल्हन -
Mango Varieties In India: तोतापुरी से लेकर बंगीनापल्ली तक, जानें भारत की प्रसिद्ध आम की किस्में और इनकी पहचान -
Heatwave Alert: दिल्ली समेत कई राज्यों में हीटवेव का अलर्ट, जानें भीषण गर्मी का सेहत पर असर और बचाव के टिप्स -
Guru Bhairavaikya Mandira: कर्नाटक का गुरु भैरवैक्य मंदिर क्यों है इतना खास? जिसका पीएम मोदी ने किया उद्घाटन -
Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर भूलकर भी न खरीदें ये 5 चीजें, दरवाजे से लौट जाएंगी मां लक्ष्मी -
डायबिटीज में चीकू खाना चाहिए या नहीं? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट -
Aaj Ka Rashifal 16 April 2026: सर्वार्थ सिद्धि योग से चमकेगा तुला और कुंभ का भाग्य, जानें अपना भविष्यफल -
Akshaya Tritiya पर किस भगवान की होती है पूजा? जानें इस दिन का महत्व और पौराणिक कथा -
Parshuram Jayanti 2026 Sanskrit Wishes: परशुराम जयंती पर इन संस्कृत श्लोकों व संदेशों से दें अपनों को बधाई
Ekadashi Vrat 2025: एकादशी के दिन क्यों नहीं खाते हैं चावल? जानें इसका धार्मिक और वैज्ञानिक कारण
Why Rice Is Avoided on Ekadashi: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है और इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। मान्यता है कि एकादशी व्रत रखने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं और उसे सुख-शांति की प्राप्ति होती है। यह व्रत सूर्योदय से शुरू होकर अगले दिन द्वादशी तिथि को समाप्त होता है।
एकादशी के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी होता है, जिनमें से एक प्रमुख नियम है चावल न खाना। कई लोग इस दिन भोजन में चावल को शामिल नहीं करते हैं। इसके पीछे न सिर्फ धार्मिक, बल्कि वैज्ञानिक कारण भी मौजूद हैं।

धार्मिक कारण
शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है। माना जाता है कि इस दिन चावल खाने वाला व्यक्ति पुण्य का भागी नहीं बनता, बल्कि उसे पाप का फल मिलता है। विष्णु पुराण में उल्लेख है कि एकादशी पर चावल खाना मांसाहार के समान माना जाता है। इसके अलावा यह भी मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन चावल खाता है, वह अगले जन्म में रेंगने वाले जीव की योनि में जन्म लेता है। चावल को "हविष्य अन्न" यानी देवताओं का अन्न कहा गया है, इसलिए देवी-देवताओं के सम्मान में एकादशी पर चावल न खाने का निर्देश दिया गया है।
वैज्ञानिक कारण
धार्मिक कारणों के साथ-साथ एकादशी पर चावल न खाने के पीछे वैज्ञानिक वजह भी बताई जाती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो चावल में पानी की मात्रा अधिक होती है और पानी पर चंद्रमा का गहरा प्रभाव होता है। एकादशी तिथि पर चंद्रमा की गति मानसिक स्थिति पर प्रभाव डालती है। ऐसे में अधिक जलयुक्त भोजन, जैसे चावल खाने से मन अस्थिर और चंचल हो सकता है। इससे ध्यान पूजा और साधना में नहीं लग पाता। यही कारण है कि एकादशी के दिन चावल खाने से बचने की सलाह दी जाती है।



Click it and Unblock the Notifications











