असम के पिराम‍िड यूनेस्को वर्ल्ड हैरिटेज में शामिल, 700 साल पुराना है इतिहास, जानें क्‍यों हैं मशहूर?

Assam's Charaideo Maidam : शुक्रवार को यूनेस्को ने असम के पिरामड के नाम से प्रसिद्ध मोइदम (शाही परिवार का कब्रिस्तान) को विश्व धरोहर स्थल के रूप में शाम‍िल करते हुए हेरिटेज साइट के रूप में मान्यता दे दी है। खुशी बात इसल‍िए भी है क्‍योंक‍ि यह पहली बार है जब नॉर्थ ईस्ट की एक सांस्कृतिक महत्व की जगह को यूनेस्को की लिस्ट में जगह म‍िली। इससे पहले काजीरंगा और मानस नेशनल पार्क जैसे प्राकृतिक स्‍थलों को वर्ल्ड हैरिटेज घोषित किया जा चुका है।

मोइदम, अहोम वंश के राजाओं, रानियों और की कब्रें हैं। जिन्‍हें असम के पिराम‍िड भी कहा जाता है। यहां अहोम वंश के शाही परिवार के सदस्‍यों को उनकी प्रिय वस्तुओं के साथ टीलेनुमा संरचना में दफनाया जाता था जिसे 'मैदाम' या 'मोइदम ' कहते हैं।

यह एक तरह का शव दफनाने की व्‍यवस्‍था हुआ करती थी, जो 700 पुरानी व्‍यवस्‍था है। आइए डिटेल में जानते हैं इस हेरिटेज साइट की खासियत और इतिहास के बारे में।

Assam s Charaideo Maidam in UNESCO World Heritage List

चराइदेव मोइदम क्‍या है?

चराइदेव मोइदाम असम के पुराने राजवंश अहोम साम्राज्य से सम्बंधित है। जहां चीन से आईं ताई-अहोम जनजातियों के राजाओं और शाही परिवार के परिवारों के कब्र स्थल हैं। इसकी स्थापना चाओ लुंग सिउ-का-फा ने (Chao Lung Siu-Ka-Pha) ने 1253 में की थी। इसे असम का पिरामिड भी कहा जाता है।

चराईदेव में खोजे गए 386 मोइदम में से 90 शाही कब्रें, इस परंपरा की सबसे अच्छी संरक्षित और बेहतर संरचनाएं हैं। मोइदम में मृतक को उनके सामान के साथ दफनाते, लेकिन 18वीं शताब्दी के बाद अहोम शासकों ने ह‍िंदूओं की तरह दाह संस्कार की पद्धति अपना ली। यह ऐतिहासिक स्थल शिवसागर शहर से लगभग 28 किमी दूर स्थित है।

चराइदेव का मतलब जानें

चराइदेव, जिसका ताई-अहोम भाषा में मतलब एक प्रमुख पहाड़ी शहर ( (चे = शहर, राय = प्रमुख, दोई = पहाड़ी) ) है। यह राजा सुकफा की स्थापित पहली राजधानी थी। राज्य के संस्थापक जो दक्षिण पूर्व एशियाई मूल के थे और उन्होंने असम को इसका वर्तमान नाम भी दिया। हालांकि अहोम ने कई बार अपनी राजधानी बदली।

42 मकबरे हैं यहां मौजूद

अहोम वंश के पहले राजा चौ-लुंग सिउ-का-फा को उनकी मृत्यु के बाद चराईदेव में दफनाया गया था। पटकाई पहाड़ियों के नीचे कई एकड़ में फैले इस स्‍थान में राजाओं और रानियों के 42 मकबरे मौजूद हैं। जिस वजह से इनका धार्मिक म‍हत्‍व भी है। इस समुदाय का मानना था कि उनके राजा पृथ्वी पर देवता (स्वर्गदेव) थे और इसलिए शाही परिवार के सदस्‍यों को उनके राज्य के पवित्र केंद्र चराइदेव में दफनाने का फैसला किया।

कई एशियन कंट्री में हैं मोईदाम

न सिर्फ चीन और पूर्वोत्तर भारत में बल्कि मोइदाम को उत्तरी वियतनाम, लाओस, थाईलैंड, उत्तरी बर्मा, दक्षिणी चीन और गके विभिन्न हिस्सों में देखा गया है लेकिन चाराइदेव में मोइदाम बड़े पैमाने में समूह में मौजूद हैं। एकाग्रता और ताई-अहोम्स की सबसे पवित्र स्थान में स्थित होने के वजह से इनका विशेष ही महत्‍व हैं।

भारत से इतनी साइट है यूनेस्‍को में शाम‍िल

भारत में वर्तमान में कुल 43 यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स है जिसमें 34 कल्चरल साइट्स, 08 नेचुरल साइट्स और 01 मिक्स्ड साइट शामिल है।

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