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Gangaur Ke Geet : 'गौर ए गणगौर माता खोल ए किवाड़ी'... यहां देखें गणगौर पूजन से जुड़े लोकगीत
Gangaur Ke Geet : होली के दूसरे दिन से 16 दिन तक मनाए जाने वाले गणगौर फेस्टिवल की धूम राजस्थान, मध्यप्रदेश, यूपी, हरियाणा और गुजरात के कुछ हिस्सों में धूम देखने को मिल रही हैं। 16 दिन तक महिलाएं, कुंवारी लड़कियां और नवविवाहित महिलाएं शिव और गौरी के प्रतीक गणगौर और ईसर की पूजा अर्चना करती हैं और लोकगीत गाती हैं।
आपको बता दें कि गणगौर की पूजा गीतों के बिना अधूरी है। गणगौर की पूजा में शृंगार से लेकर पानी पिलाने तक के लिए अलग-अलग गीतों को गाया जाता है।

इन पारंपारिक गीतों का गंवर यानी गणगौर पूजा में खास महत्व हैं इसलिए हम आपके लिए यहां पूजा से जुड़े कुछ गीत लेकर आए हैं जिन्हें गाकर आप गणगौर-ईसर की विधि-विधान से पूजा कर सकती हैं।
1. गणगौर का गीत - बधावा (Gangaur Ka Geet - Badhava)
चाँद चढ़यो गिरनार, किरत्यां ढल रही जी ढल रही
जा बाई रोवा घरा पधार माऊजी मारेला जी मारेला
बापू जी देवला गाल, बडोड़ो बीरो बरजेलो जी बरजेलो,
थे मत दयो म्हारी बाई न गाल,
बाई म्हारी चिड़कोली जी चिड़कोली।
आज उड़ पर बात सवार बाई उड़ ज्यासी जी उड़ ज्यासी,
गोरायारं दिन चार जावईडो ले जासी जी ले जासी
2. गणगौर का गीत - ओड़ो कोड़ो (Gangaur Ka Geet - Odo Kodo)
ओड़ो कोड़ो छ रावलो ये राई चन्दन को रोख
ये कुण गौरा छै पातला ऐ कुणा माथ ऐ मोल
ईसरदास जी गोरा छ पातला ऐ ब्रह्मा माथे मोल
बाई थारो काई को रूसणो ये काई को सिंगार
बाई म्हारे सोना को रूसणों ऐ मोतिया रो सिंगार
अब जाऊँ म्हारे बाप के ऐ ल्याउली नौसर हार
चौसर हार गढ़ाए ,पाटे पुवाए गोरक सुधों मूंदडो,
गोरा ईसरदास जी ब्रह्मदास जी जोगो मूंदडो,
वाकी रानिया होए बाई बेटिया होए आठ गढ़ाए
पाटे पुवाए गोरक सुधो मूंदडो
गोरा चाँद, सूरज, महादेव पार्वती जोगो मूंदडो
गोरा मालन, माली, पोल्या - पोली जोगो मूंदडो मूंदड़ो,
3. गणगौर का गीत - ज्वारा का (Gangaur ka Geet - Jwara Ka)
म्हारा हरया ए ज्वारा ऐ, गेन्हूला सरस बध्या
गोरा ईसरदास जी रा बायां ऐ वाकी रानी सींच लिया
गोरा ब्रह्मदास जी रा बायां ऐ वाकी रानी सींच लिया
वे तो सींच न जाने ये आड़ा ऊबा सरस बध्या
बाई रो सरस पोटलों ये, गेंहूडा सरस बध्या
म्हारा हरिया ए ज्वारा ये गेन्हुला सरस बध्या
गोरा चाँद सूरज बाया ये वाकी रानी सींच लिया
वे तो सींच न जाने ये आड़ा ऊबा सरस बध्या
बाई रो सरस पोटलो ये गेन्हुला सरस बध्या
मालीदास जी, पोलीदास जी बाया ऐ वाकी रानी सींच लिया
वे तो सींच न जाने ये आड़ा ऊबा सरस बध्या

4. सूरज को अर्ध्य देने का गीत (Sooraj Dev Ko Arak Dene Ka Geet)
अल खल नदी जाय यो पाणी कहा जाय
आदो जाती अणया गलया आदो ईसर न्हासी
ईसर थे घरा पदारो गौरा जायो बैटो
अरदा लाओ परदा ल्याओ बन्दर बाल लगाओ
सार कीए सूई भाभी पाट काए तागा
सीम दरजी बेटा ईसर जी का बागा
सीमा लार सीमा आला मोत्या की लड़-जड़ पोउला थे चालो म्हे आवला।
5. गणगौर के किवाड़ी खुलवाने के गीत (Gangaur ka Geet Kiwadi khulvane ka)
गौर ए गणगौर माता खोल ए किवाड़ी
बाहर ऊबी थारी पूजण वाली।
पूजो ए पूजो बाईयां, काई काई मांगों
म्हे मांगा अन्न धन, लाछर लक्ष्मी।
जलहर जामी बाबुल मांगा, राता देई मायड़
कान कंवर सो बीरो मांगा , राई सी भौजाई।
ऊँट चढयो बहनोई मांगा , चूंदड़ वाली बहना
पूस उड़ावन फूफो मांगा , चूड़ला वाली भुवा।
काले घोड़े काको मांगा , बिणजारी सी काकी
कजल्यो सो बहनोई मांगा , गौरा बाई बहना।
भल मांगू पीहर सासरो ये भल मांगू सौ परिवार ये
गौर ए गणगौर माता खोल ए किवाड़ी।
6. बिंदी लगाने का गीत (Gangaur Ke Bindi Lagane Ke Geet )
आ टीकी बहू गोराँ ने सोवै,
तो ईसरदासजी बैठ घडावै ओ टीकी,
रमाक झमाँ, टीकी, पानाँ क फूलाँ टीकी, हरयो नगीनो
एआ टीकी बाई रोयणदे ने सोवै,
तो सूरजमलजी बैठ घडावै ओ टीकी,
रमाक झमाँ, टीकी, पानाँ क फूलाँ टीकी, हरयो नगीनो
एआ टीकी बहू ने सोवै, तो बेटा बैठ घडावै ओ टीकी,
रमाक झमाँ, टीकी, पानाँ क फूलाँ टीकी, हरयो नगीनो ऐ।
7. गणगौर को पानी पिलाने का गीत (Gangaur Ko Pani Pilane Ka Geet)
म्हारी गोर तिसांई जी, राज घटियांरो मुकुट करो।
म्हारी गँवरा पानीडो सो पाय घटियांरो मुकुट करो
म्हारी गवर तिसांई ओ राज घाटयांरो मुकुट करो।
ब्रह्मदास जी रा ईशरदास जी ओ राज घाटयांरो मुकुट करो।
म्हारी गवरा पानीड़ो पिलाय घांटा रो मुकुट करो।
म्हारी गवरा तिसाई ओ राज घांटा रो मुकुट करो।
8. गणगौर के गीत - पावडिया (Gangaur Ke Geet - Pawadiya)
पग दे पावडिया, ईसरदास जी चढया, लैर बाई रोवां, देवो ना सभी देव आशीष जी,
पग दे पावडिया, कानीराभ चढया, लैर बाई रोवां, देवो ना सभी देव आशीष जी।



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