Latest Updates
-
Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि व्रत में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं? जानें व्रत के जरूरी नियम -
Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ क्यों किया जाता है? जानें इसका महत्व -
Bigg Boss 20: कौन हैं नकुल ढुल? वाइल्ड कार्ड एंट्री के बाद बिग बॉस ने आधी रात को शो से क्यों निकाला बाहर -
World Arthritis Day 2026: आर्थराइटिस के मरीज भूलकर भी न करें इन 7 चीजों का सेवन, बढ़ जाएगा दर्द -
Shardiya Navratri Day 2: नवरात्रि के दूसरे दिन ऐसे करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग, आरती -
Shardiya Navratri Day 1: शारदीय नवरात्रि के पहले दिन करें मां शैलपुत्री की पूजा, जानें विधि, मंत्र और भोग -
Shardiya Navratri 2026 Wishes in Sanskrit: इन संस्कृत श्लोकों से अपनों को दें शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं -
Happy Navratri 2026 Wishes: नवदुर्गा का आशीर्वाद...इन संदेशों से अपनों को दें शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं -
Navratri Fast In Periods: क्या पीरियड्स में नवरात्रि का व्रत रख सकती हैं महिलाएं? जानें क्या हैं नियम -
Navratri 2026: नवरात्रि के 9 दिन किस देवी को समर्पित हैं? जानें मां दुर्गा के 9 स्वरूप, मंत्र और महत्व
जंतर-मंतर पर अब नहीं रहा प्रोटेस्ट साइट, जानें मुगल काल की यह ऐतिहासिक धरोहर कैसे बनी लोकतंत्र की आवाज
Jantar Mantar Denotified: दिल्ली का जंतर-मंतर लंबे समय से लोगों की मांगों और विरोध-प्रदर्शनों की आवाज सरकार तक पहुंचाने का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां कई बड़े मुद्दों पर धरने और प्रदर्शन हुए, जिनमें किसान आंदोलन से लेकर पहलवानों का विरोध भी शामिल हैं। लेकिन अब जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल का दर्जा नहीं रहेगा। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को धरना-प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का फैसला लिया है। अब प्रदर्शन के लिए तीन नए स्थान चुने हैं, जिसमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड शामिल है। ऐसे में, आइए जानते हैं कि आखिर जंतर-मंतर आंदोलनों का इतना बड़ा केंद्र कैसे बना और अब यहां प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं होगी?

अब जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन नहीं हो सकेगा?
गृह मंत्रालय की एक कमेटी ने प्रदर्शन करने वाले लोगों के लिए दूसरी जगह तय करने की सिफारिश की थी। इस कमेटी की सिफारिश के बाद जंतर-मंतर को अब प्रोटेस्ट साइट से डिनोटिफाई कर दिया गया है. यानी कि अब जंतर मंतर पर धरना-प्रदर्शन नहीं किया जा सकेगा.
अब कहां कर सकेंगे प्रदर्शन?
दिल्ली पुलिस ने धरना-प्रदर्शन के लिए तीन जगह तय की हैं। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड शामिल हैं। इन जगहों पर प्रदर्शन कैसे होंगे और इसके लिए किन नियमों का पालन करना होगा, इसकी जानकारी अलग से जारी की जाएगी। दिल्ली पुलिस के अनुसार इन तीन जगहों पर प्रदर्शन और धरना आयोजित करने के लिए डिटेल SOP अलग से जारी करेगी. ये 28 अप्रैल 2022 को जारी आदेश में आंशिक सुधार है। जंतर-मंतर संसद और सरकारी दफ्तरों के पास होने की वजह से प्रदर्शन करने वालों के लिए अहम जगह रहा है। यहां लोग अपनी मांगों को लेकर धरना देते थे। लेकिन नए आदेश के बाद अब इसे आधिकारिक प्रदर्शन स्थल के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
कहां स्थित है जंतर-मंतर?
दिल्ली के लुटियंस इलाके में बना जंतर-मंतर कनॉट प्लेस से करीब 100 मीटर और संसद भवन से लगभग 500 मीटर की दूरी पर है। संसद के पास होने की वजह से यह इलाका सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। आजादी से पहले बना यह स्थल कभी खगोलीय गणनाओं और ग्रहों की चाल समझने के लिए इस्तेमाल होता था। समय के साथ इसकी पहचान एक ऐतिहासिक धरोहर के साथ-साथ विरोध-प्रदर्शनों की जगह के रूप में भी बन गई।
जंतर-मंतर का निर्माण किसने करवाया था?
जंतर-मंतर का निर्माण 1724 में जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने करवाया था। उस समय दिल्ली पर मुगल बादशाह मुहम्मद शाह का शासन था। महाराजा जय सिंह को खगोल विज्ञान में गहरी दिलचस्पी थी। वे ग्रहों की स्थिति और चाल का पता लगाने के लिए इस्तेमाल होने वाले छोटे उपकरणों से संतुष्ट नहीं थे, इसलिए उन्होंने बड़े-बड़े खगोलीय यंत्रों वाली वेधशाला बनवाई। यह जगह वास्तुकला, गणित और विज्ञान के मेल का उदाहरण है।
जंतर-मंतर में मौजूद यंत्रों की मदद से सूर्य और दूसरे खगोलीय पिंडों की स्थिति का अध्ययन किया जाता था। यहां पत्थर से बनी एक विशाल सूर्यघड़ी भी है। इसकी ऊंचाई करीब 70 फीट, लंबाई 114 फीट और चौड़ाई 10 फीट बताई जाती है। इससे समय की गणना की जा सकती है। यहां ऐसे यंत्र भी मौजूद हैं, जिनसे साल के सबसे लंबे और सबसे छोटे दिन का पता लगाया जा सकता है।
समय बीतने के साथ जंतर-मंतर की पहचान खगोलीय अध्ययन से आगे बढ़कर विरोध-प्रदर्शनों के केंद्र के रूप में भी बनी। 1993 के बाद यहां धरने और आंदोलन होने लगे। साल 2011 में अन्ना हजारे के लोकपाल आंदोलन के दौरान भी यह जगह चर्चा में रही। हालांकि, प्रदर्शनकारियों की बढ़ती संख्या और जगह कम पड़ने के कारण आंदोलन को बाद में रामलीला मैदान में स्थानांतरित कर दिया गया। इस तरह जंतर-मंतर विज्ञान और इतिहास से जुड़ी धरोहर होने के साथ-साथ कई बड़े आंदोलनों का गवाह भी बना।



Click it and Unblock the Notifications
