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किस्सा कारगिल का : जब दिलीप कुमार ने नवाज को फोन पर सुनाई खरी-खोटी, दे डाली थी ये नसीहत
Kargil vijay diwas 2023: पूरा देश 24 वां कारगिल विजय दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है। इस दिन भारत ने कारगिल युद्ध में पाकिस्तान पर जीत हासिल की थी।
तारीख थी 26 जुलाई 1999 और दिन था सोमवार। ये दिन उन बहादुर सैनिकों की याद में मनाया जाता है, जिन्होंने भारत मां की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
कारगिल दिवस आते ही इस युद्ध से जुड़े कई किस्सों का जिक्र होता है। कारगिल युद्ध के 24 वर्ष पूरे होने के मौके पर आज हम आपको इससे जुड़ा एक मजेदार किस्सा बता रहे है, जो सीधा बॉलीवुड के महान अभिनेता दिलीप कुमार से जुड़ा हुआ है।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और अभिनेता दिलीप कुमार के रिश्ते काफी अच्छे रहे हैं। यही वजह है कि जब कारगिल युद्ध में अटल बिहारी वाजपेयी को दुखी देख दिलीप कुमार ने तत्कालीन पाक पीएम नवाज शरीफ को खरी-खरी सुना दी थी। आइए जानते हैं कि क्या था पूरा मामला।

गुस्से से भर गए थे अटल बिहारी वाजपेयी
दरअसल ये मामला कारगिल युद्ध से ठीक पहले का है, जब अटल बिहारी वाजपेयी की 1999 की लाहौर यात्रा में घोषणा पत्र के साथ ऐसी उम्मीद जताई जा रही थी कि अब दोनों देशों के रिश्ते दोस्ताना हो सकते हैं। वाजपेयी की यात्रा के दौरान पाकिस्तान के कई कट्टरपंथी संगठनों ने विरोध भी किया था। लेकिन ये दोस्ती दोनों देशों के बीच टिक नहीं नहीं सकी। पकिस्तान के नए-नए बने सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ की शह पर कारगिल में घुसपैठ शुरू हो गई और स्थिति फिर से तनावपूर्ण हो गई और कुछ दिनों के भीतर युद्ध शुरु हो गया।
अटल बिहारी वाजपेयी ने दिलीप कुमार को थमा दिया था फोन
1999 में कारगिल युद्ध के दौरान भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को फोन मिला और कहा कि आपने मेरे साथ बुरा सलूक किया है। एक तरफ लाहौर में गले मिले और दूसरी तरफ कारगिल की पहाड़ियों पर कब्जा कर रहे हैं। जिसके जवाब में नवाज शरीफ ने कहा था कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। वह परवेज मुशर्रफ (तब पाकिस्तानी सेना के प्रमुख थे) से बात करके फिर फोन करेंगे। नवाज शरीफ से बात करते वक्त वाजपेयी ने अचानक फोन अपने पास ही बैठे दिलीप कुमार को थमा दिया था।
तब अटल बिहारी वाजपेयी ने नवाज शरीफ से कहा था कि आप एक साहब से बात करें जो मेरे बगल में बैठे हुए हैं। नवाज शरीफ उस वक्त सकते में आ गए क्योंकि फोन पर अगली आवाज मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार थी।
पाक के पूर्व विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी ने अपनी आत्मकथा में किया जिक्र
पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी अपनी आत्मकथा 'नीदर अ हॉक नौर अ डव' के मुताबिक दिलीप कुमार ने फोन पर शरीफ से बात करते हुए कहा, 'मियां साहेब हमें आपसे ये उम्मीद नहीं थी। आपको शायद पता नहीं कि जब भी भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव होता है, भारतीय मुस्लमानों की स्थिति बहुत पेचीदा हो जाती है और उन्हें अपने घरों तक से बाहर निकलने में दिक्कत हो जाती है। हालत पर काबू करने के लिए कुछ करिए।' बता दें कि दिलीप कुमार का जन्म स्थान भले ही पाकिस्तान में हुआ था, लेकिन उनके दिल में हिंदुस्तान बसता था। दिलीप कुमार पाकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'निशान-ए-इम्तियाज' से सम्मानित भी हो चुके हैं।



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