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कोलकाता कांड के बाद क्यों बढ़ी Central Protection Act की मांग? जानिए सजा के क्या हैं प्रावधान
What is Central Protection Act : कोलकाता में 31 वर्षीय महिला डॉक्टर के साथ रेप और हत्या के बाद पूरे देश में आक्रोश का माहोल है। इस घटनाक्रम के बाद प्रदर्शनकारी डॉक्टर्स ने सुरक्षा के लिए सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग की।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से भी सेंट्रल प्रोटेक्शन बिल को जल्द से जल्द लागू करने की मांग की है। आइए इसी के साथ जानते हैं कि आखिर इस बिल में ऐसा क्या है और यह कानून कैसे डॉक्टरों को सुरक्षा प्रदान करेगा?

क्यों कर रहे CPA की मांग?
दरअसल चिकित्सा कर्मचारियों के लिए केंद्रीय सुरक्षा अधिनियम के नाम से जाना जाने वाला यह बिल दो साल पहले लोकसभा में पेश किया गया था। यह बिल डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा को परिभाषित करता है और सजा का प्रावधान करता है। यह बिल डॉक्टरों, नर्सों, मेडिकल स्टूडेंट्स और अस्पताल के अन्य कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान करेगा। अगर ये बिल पास हो जाता है तो स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ हिंसा गैर-जमानती अपराध बन जाएगा। इससे ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।
मिलेगी यह सजा
अगर यह बिल पास होता है तो इस कानून के मुताबिक अगर किसी भी हेल्थकेयर प्रोफेशनल के साथ किसी भी तरह की हिंसा या बदसलूकी होती है तो यह गैर जमानती अपराध होगा और ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट में इसकी सुनवाई होगी। इस एक्ट के तहत उसे कम से कम 6 महीने और अधिकतम 5 साल तक की जेल और 5 हजार रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक का जुर्माने का प्रावधान हैं।
वहीं अगर इस हिंसा में मेडिकल प्रेक्टिशनर को गंभीर चोट आती है तो इंडियन पीनल कोड 1860 के सेक्शन 320 के तहत दोषी को 3 से 10 साल की जेल और 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकेगा। इसके अलावा इस एक्ट के अंदर आने वाले मामलों की जांच डिप्टी सुप्रिटेंडेंट ऑफ पुलिस रेंक के अधिकारी से नीचे का पुलिस अधिकारी नहीं करेगा।
अभी है यह कानून
हालांकि वर्तमान में डॉक्टर्स की सुरक्षा के लिए महामारी रोग (संशोधन) अध्यादेश, 2020 लागू है। इसके तहत हिंसा या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर 3 या 5 साल तक की सजा हो सकती है। साथ ही 50 हजार से 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लग सकता है।



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