Latest Updates
-
Restaurant Style Kadai Sabzi Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसी चटपटी और मसालेदार सब्जी -
Blue Moon 2026: 31 मई को आसमान में दिखेगा दुर्लभ 'ब्लू मून'; जानिए इसकी खासियत, कहां और कैसे देखें -
Hindi Journalism Day: 30 मई को ही क्यों मनाया जाता है हिंदी पत्रकारिता दिवस? जानें इस दिन का इतिहास और महत्व -
Kumaoni Sweet Bal Mithai Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड की पारंपरिक और स्वादिष्ट मिठाई -
महिलाओं के लिए वरदान से कम नहीं है हलीम के बीज, अनियमित पीरियड्स समेत इन 5 समस्याओं को कर सकते हैं दूर -
गर्मियों में पसीने से होने वाली 5 कॉमन स्किन प्रॉब्लम्स, एक्सपर्ट से जानें इन समस्याओं से बचने के घरेलू उपाय -
World Digestive Health Day: क्यों मनाया जाता है विश्व पाचन स्वास्थ्य दिवस? जानें इस दिन का महत्व और इतिहास -
Grandma Style Aloo Baingan Recipe: दादी के हाथों जैसा चटपटा और लाजवाब स्वाद -
क्या ज्यादा तनाव लेने से ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है? AIIMS न्यूरोसर्जन ने बताई सच्चाई -
June 2026 Vrat Tyohar: निर्जला एकादशी से लेकर वट पूर्णिमा तक, जून के महीने में आएंगे ये प्रमुख व्रत-त्योहार
कोलकाता कांड के बाद क्यों बढ़ी Central Protection Act की मांग? जानिए सजा के क्या हैं प्रावधान
What is Central Protection Act : कोलकाता में 31 वर्षीय महिला डॉक्टर के साथ रेप और हत्या के बाद पूरे देश में आक्रोश का माहोल है। इस घटनाक्रम के बाद प्रदर्शनकारी डॉक्टर्स ने सुरक्षा के लिए सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग की।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से भी सेंट्रल प्रोटेक्शन बिल को जल्द से जल्द लागू करने की मांग की है। आइए इसी के साथ जानते हैं कि आखिर इस बिल में ऐसा क्या है और यह कानून कैसे डॉक्टरों को सुरक्षा प्रदान करेगा?

क्यों कर रहे CPA की मांग?
दरअसल चिकित्सा कर्मचारियों के लिए केंद्रीय सुरक्षा अधिनियम के नाम से जाना जाने वाला यह बिल दो साल पहले लोकसभा में पेश किया गया था। यह बिल डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा को परिभाषित करता है और सजा का प्रावधान करता है। यह बिल डॉक्टरों, नर्सों, मेडिकल स्टूडेंट्स और अस्पताल के अन्य कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान करेगा। अगर ये बिल पास हो जाता है तो स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ हिंसा गैर-जमानती अपराध बन जाएगा। इससे ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।
मिलेगी यह सजा
अगर यह बिल पास होता है तो इस कानून के मुताबिक अगर किसी भी हेल्थकेयर प्रोफेशनल के साथ किसी भी तरह की हिंसा या बदसलूकी होती है तो यह गैर जमानती अपराध होगा और ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट में इसकी सुनवाई होगी। इस एक्ट के तहत उसे कम से कम 6 महीने और अधिकतम 5 साल तक की जेल और 5 हजार रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक का जुर्माने का प्रावधान हैं।
वहीं अगर इस हिंसा में मेडिकल प्रेक्टिशनर को गंभीर चोट आती है तो इंडियन पीनल कोड 1860 के सेक्शन 320 के तहत दोषी को 3 से 10 साल की जेल और 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकेगा। इसके अलावा इस एक्ट के अंदर आने वाले मामलों की जांच डिप्टी सुप्रिटेंडेंट ऑफ पुलिस रेंक के अधिकारी से नीचे का पुलिस अधिकारी नहीं करेगा।
अभी है यह कानून
हालांकि वर्तमान में डॉक्टर्स की सुरक्षा के लिए महामारी रोग (संशोधन) अध्यादेश, 2020 लागू है। इसके तहत हिंसा या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर 3 या 5 साल तक की सजा हो सकती है। साथ ही 50 हजार से 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लग सकता है।



Click it and Unblock the Notifications