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जानिये क्रिसमस के जुड़ी 5 गलत भ्रान्तियां
सदियों से मनाएं जाने वाले पर्व, क्रिसमस में घर-परिवार और दोस्त मिलते है, क्रिसमस ट्री को सजाते है और रंगीन माहौल में जश्न मनाते है। इस पर्व के बारे में कई लोगों के बीच काफी मिथक भी व्याप्त हैं हालांकि क्रिसमस, दुनिया का सबसे लोकप्रिय पर्व है जो हर देश में धूमधाम से मनाया जाता है। आइए जानते है कि क्रिसमस के बारे में क्या- क्या मिथक हैं और उनके पीछे की सच्चाई क्या है : -
आश्चर्यचकित करने वाले 5 मिथक

सांता गोलमटोल, सफेद दाड़ी वाला होता है : क्रिसमस के पर्व के दौरान आने वाले सांता को हम सभी जानते है। सांता के बारे में वास्तविक विवरण कहीं भी नहीं मिलता है। सांता की परम्परा सेंट निक, जो कि 4 सदी में एक डीमरे पादरी थे, से प्रभावित है, वह बच्चों से बहुत प्यार करते थे और उनके लिए एक बोरी में तोफहों को भरकर लाते थे और सभी के बीच बांट देते थे। इसके बाद, दुनिया के कोने - कोने के लेखकों ने सांता का कान्सेप्ट बताया और हर जगह लोग सांता बनने लगे। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि वास्तव में सांता, गोलमटोल नहीं थे और उनको दाड़ी भी नहीं थी।
क्रिसमस ट्री में आग जल्दी पकड़ती है : कई लोग ऐसा मानते है कि क्रिसमस ट्री जल्दी आग पकड़ता है। लेकिन ऐसा नहीं है, क्रिसमस असली हो या नकली, इसमें आग यूं ही नहीं लगती। नकली ट्री होने पर लाइट में कोई फॉल्ट आने पर जल सकता है।
क्रिसमस से ज्यादा लोकप्रिय ईस्टर है : क्रिसमय पर्व से जुड़ी कहानियां इसके महत्व को बताती है लेकिन ईसाई कैलेंडर अलग कहानी बताता है। उसके अनुसार, ईसाईयों के लिए सबसे पवित्र दिन ईस्टर को होता है जब ईसामसीह जीवित हो उठे थे।
क्रिसमस पर ग्रीटिंग कार्ड भेजना एक परम्परा है : हर साल क्रिसमस के दौरान लोगों और परिचतों को ग्रीटिंग कार्ड भेजना एक परम्परा है, ऐसा लगभग सभी लोगों का मानना है। लेकिन वास्तविकता यह है कि 19 वीं सदी की शुरूआत में व्यापारियों ने एक नए व्यवसाय के रूप में इसे परम्परा बना दिया।
क्रिसमस ट्री सजाना एक परम्परा है : क्रिसमस के पर्व के दौरान क्रिसमस ट्री को सजाना एक परम्परा माना जाता है हालांकि सच्चाई कुछ और है। 18 वीं सदी में जर्मनी में पहली बार क्रिसमस पर्व के दौरान एक पेड़ को सजावट के तौर पर अच्छी तरह से डेकोरेट करके रखा गया। बाद में, 19 वीं शताब्दी में विक्टोरियन ने इसे अपना लिया और धीरे - धीरे यह चलन दुनिया भर में शुरू हो गया।



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