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Women's Day 2025: निराश्रितों की बेटी बनी अनुराधा आडवाणी, 23 साल से बेसहारा वृद्धों को दे रही है सहारा
अगर इरादे मजबूत हों तो फिर महिलाओं को कोई रोक नहीं सकता," यह कहावत जोधपुर की अनुराधा आडवाणी पर पूरी तरह फिट बैठती है। 40 साल पहले, जब अनुराधा ने नरेंद्र आडवाणी से इंटर कास्ट लव मैरिज की थी, तो उन्हें परिवार और समाज से कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। लेकिन उन्होंने किसी की न सुनी और अपनी शादी को एक मिसाल बना दिया, जो आज भी बेमिसाल है।
समय के साथ, उनकी ताकत और दृढ़ता का नया पहलू सामने आया। उनके इस साहसिक कदम ने न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे शहर को मिसाल दी, और महिलाओं को अपनी राह खुद तय करने की प्रेरणा दी।

बुजुर्ग सास-ससुर की पीड़ा को देख शुरु किया वृद्धाश्रम
थिएटर आर्टिस्ट, एंकर और सोशल वर्क से जुड़ी अनुराधा ने अपनी सास-ससुर को आठ साल तक बीमारी के कारण बिस्तर पर सिसकते देखा और बुजुर्गों की पीड़ा समझी। उन्होंने कई बुजुर्गों की दर्द भरी कहानियां सुनीं, जो इस उम्र में बच्चों के सहारे की कमी महसूस कर रहे थे। 2002 में उन्होंने शहर का पहला वृद्धाश्रम, अनुबंध वृद्धजन कुटीर संस्था शुरू किया। उस समय लोग उनका मजाक उड़ा रहे थे, लेकिन उन्होंने समाज में एक नई दिशा देने का साहस दिखाया।
ऐसी की शुरुआत
अनुराधा ने थोड़ा पैसा लगाकर एक कच्ची बिल्डिंग में कुछ कमरे बनाए और जैसे ही वह रहने लायक बनी, आधी रात को एक बुजुर्ग ने दरवाजा खटखटाया। उसने अपनी स्थिति बताई कि उसके चार बेटे और तीन बेटियां थीं, लेकिन सभी ने उसे घर से निकाल दिया था। वह 15 दिनों से मंदिर की सीढ़ियों पर रातें बिता रहा था। यह पहला केस था, और बाद में कई अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। बुजुर्गों को शुरू में उनकी मदद को लेकर संकोच था, खासकर जब वे महिला के साथ बात करने में हिचकिचाते थे। वे कहते थे कि वे पति, पिता या किसी पुरुष से बात करना चाहते हैं। लेकिन अनुराधा ने इन बुजुर्गों से धीरे-धीरे संपर्क बढ़ाया और डॉक्टर के साथ उनके पास रात में पहुंची। इससे उनका विश्वास बढ़ा और वे अपनी परेशानियां खुलकर शेयर करने लगे, जिससे अनुराधा का उद्देश्य साकार हुआ।
150 बेसहारा बुर्जुगों को करती हैं सेवा
अनुराधा ने कई रातें इन बुजुर्गों को समझाने और उनकी बात सुनने में निकालीं। आज भी जरूरत पड़ने पर वह आधी रात को अकेले वृद्धाश्रम पहुंच जाती हैं। अब यहां करीब 150 के आसपास बुजुर्ग रह रहे हैं, जो उनकी मदद से सुरक्षित हैं। अनुराधा आडवाणी अपनी सेवा के प्रति इतनी समर्पित हैं कि जब इन बेसहारा बुजुर्गों के मरने के बाद कोई इन्हें कंधा नहीं देता हैं, तो यह ही आगे आकर इन्हें कंधा देकर अंतिम संस्कार करती हैं।
कोरोना में भी की काफी सेवा
कोरोना महामारी के दौरान, 'अनुबंध' वृद्धाश्रम का परिवार 16 मार्च 2020 से लॉकडाउन में था। असंभावित खतरों के बावजूद, सीमित संसाधनों और सेवा भावनाओं से भरी टीम ने बुजुर्गों की 24 घंटे देखभाल की। उनका समर्पण और मेहनत इस कठिन समय में अविस्मरणीय साबित हुआ।



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