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गर्भ में ही पता चल जाएगा, बच्चे का भविष्य
वैज्ञानिकों ने मां-बाप के लिए वरदान बनने वाली एक पद्धति को विकसित करने में सफलता हासिल की है। इसकी मदद से गर्भ के दौरान ही यह पता लगाने में सफलता मिलेगी कि बच्चा कैसा होगा। उसे भविष्य में होने वाली 3,500 अनुवांशिक बीमारियों की पहचान का रास्ता भी साफ हो गया है।

शोधकर्ताओं ने पहली बार गर्भवती महिला के खून और उसके पति की लार की जांच से होने वाले बच्चे के गुणसूत्रों का पता लगाया है। इसकी मदद से बच्चे के डीएनए का ब्लूप्रिंट उसके पैदा होने के कई महीनों पहले तैयार किया जा सकेगा। डॉक्टरों ने इसे चिकित्सा जगत में नई क्रांति के जैसा बताया है।
पैतृकता के आधार पर गुणसूत्रों की कडि़यों को जोड़ने का यह अब तक का सबसे अनूठा तरीका है। इससे पहले डीएनए मैपिंग के परीक्षण स्पर्म के जरिये ही होते थे। इस नए तरीके के ब्लूप्रिंट की मदद से कई ऐसी अनुवांशिक बीमारियों का पता लगाया
जा सकेगा जो मां या पिता के किसी एक जीन या उनकी वंशावली में हो सकते हैं। किसी भी एक जीन के किसी भी संक्रमण के उस भ्रूण में भविष्य में प्रभावी रूप से उभरने का यह अब तक का सबसे प्रमाणिक लेखा-जोखा होगा। चूंकि भ्रूण मां के गर्भ
में उसके खून से बने प्लाज्मा में जीता और विकसित होता है। इसलिए मां के ब्लड टेस्ट को इसके लिए सबसे उपयुक्त पाया गया। इसलिए 18 हफ्ते यानी करीब साढ़े चार महीने की गर्भवती महिला का ब्लड टेस्ट और उस भ्रूण के पिता की लार के परीक्षण से सबसे सटीक नतीजे हासिल होंगे।
वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के अनुवांशिकी विभाग के वैज्ञानिकों ने इस शोध को अंजाम दिया है। यह शोध पत्र साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन जर्नल में छपा है। शोध के बारे में कनेक्टिकट यूनिवर्सिटी के अनुवांशिकी विभाग के प्रोफेसर पीटर बेन ने कहा कि यह तकनीक का अद्भुत चमत्कार है। वैज्ञानिकों ने भू्रण की डीएनए कडि़यों का पता लगाने के लिए नई तेज गति वाली डीएनए कडि़यों (डीएनए सीक्वेंसिंग), आंकड़ों और कंप्यूटर ग्राफिक्स का इस्तेमाल किया।
इसके नतीजे 98 फीसदी तक सही आए। वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता जे शिंडर ने बताया कि इस टेस्ट की कीमत 20-50 हजार डॉलर (करीब 28 लाख रुपये) पड़ेगी। शोधकर्ताओं ने कहा कि तीन से पांच साल के अंदर पूरी दुनिया में उपलब्ध हो जाएगा। हम इसे न केवल सस्ता बल्कि पूरी तरह से सही परिणाम देने वाला बना देंगे।



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