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सन्तानोत्पत्ति से पूर्व और इन्तजार करने के 9 कारण
जब सन्तानोत्पत्ति से पूर्व इन्तजार करने की बात आती है तो सभी के कारण अलग-अलग हो सकते हैं। और आप अगर ऐसा सोच रहें हैं तो आप अकेले नहीं हैं। आप कितना इन्तजार करते हैं - यह काफी पेचीदा हो सकता है क्योंकि इसका कोई सटीक समय नहीं होता है और ज्यादा इन्तजार करने पर काफी देर हो सकती है। यह केवल आप पर निर्भर करता है कि आपके लिये उचित समय क्या है और यदि आपको लगता है कि 20 और 30 की अवस्थायें इस कार्य के लिये काफी जल्दी है तो आपके इन्तजार के लिये निम्नलिखित कारण सुझाये गये हैं।
सन्तानोत्पत्ति के लिये इन्तजार करने के कई आधारभूत कारण होते हैं और यह एक व्यक्तिगत फैसला होता है। इन कारणों में से कोई भी कारण इस बात की तरफ इसारा नहीं करता कि आप युवावास्था में सफल परवरिश नहीं कर सकते। अगर आप अपनी शादी के बाद मातृत्व सुख के लिये इन्तजार करने की सोच रहे हैं तो गौर कीजिये कि उपरोक्त में से कौन सा कारण इसके लिये उत्तरदायी है।

आर्थिक स्थिति
सन्तानोत्पत्ति से पूर्व और इन्तजार करने का यह सबसे महत्वपूर्ण कारण है। बच्चों पर पूरे जीवन भर निवेश होता है। जिनके बच्चे नहीं हैं वे शायद इस बात से बेहतर समझ सकें कि बच्चे शोरूम से निकली लक्ज़री गाड़ी के समान है जिनका स्वामित्व और रख-रखाव दोनों ही खर्चीला है। तो शायद आप समझ गये होंगे कि हर संतान पर आप को किस प्रकार खर्च करना पड़ सकता है और इसमे कोई कटौती सम्भव नहीं है।

धैर्य
यदि आपके देर से संताने होंगी तो शायद तब तक आपको जीवन के मामलों से जूझना आ जायेगा। बच्चों की परवरिश का यह एक अहम बिन्दु है। धैर्य आपको सन्तुलन प्रदान करता है और परवरिश करने के लिये बहुत मूल्यवान गुण है।

युवावस्था की मौज-मस्ती का खो जाना
20 की अवस्था में या इससे पूर्व बच्चों का होना आपके जीवन को पूरी तरह से बदल देता है। पूरे सप्ताह और सप्ताहान्तों पर प्राकृतिक रूप से अन्जान जगहों पर नये मित्रों के साथ रात-रात भर मौज-मस्ती करना समाप्त हो जाता है। जब आपके बच्चे हो जाये तो आप जीवन के इन पन्नों को फाड़ कर फेक सकते हैं क्योंकि अब इनकी आवश्यकता आपको कभी नहीं पड़ेगी। नये स्थानों की खोज और नये लोगों से मिलने के बजाय अब आप भावनात्मक और मनोवौज्ञानिक रूप से बच्चों से ज्यादा जुड़ जाते हैं और अपने आप को सीमित कर लेते हैं।

आप सही व्यक्ति के साथ होंगें
सामाजिक बाध्यता के अनुसार लोगों की शादी जल्दी हो जाती थी। इसके कारण उनके बच्चे भी जल्दी दो जाते थे। और 45 की अवस्था तक पहुँचते पहुँचते तकरार होने के कारण तलाक हो जाता है। ऐसे बहुत कम लोग हैं जो अपने जीवनसाथी के साथ सामंजस्य बना कर चल सकें। यदि आप सन्तानोत्पत्ति का विचार कुछ दिनों के लिये लम्बित कर दे तो शायद आपको मनपसन्द जीवनसाथी मिल सके।

आत्मा की यात्रा
ज्यादातर लोगों को काफी देर से यह पता चलता है कि वे क्या हैं और जीवन से क्या चाहते हैं और शायद बच्चों के होने से पूर्व इस विशेष अन्वेषण के लिये उन्हें और समय की आवश्यकता होती है। अपने परिवार की शुरूआत से पूर्व अपने जीवनसाथी और अपने आप को समय दे जिससे कि जीवन के कुछ अनुभवों के साथ किसी के मार्गदर्शन से पूर्व स्वयं को भली-भाँति स्थापित कर सकें।

जीविका
जीविकोपार्जन के लिये तथा जीवन में स्थायित्व प्राप्त करने के लिये कुछ समय मिल जाता है क्योंकि बच्चों के जन्म के पश्चात जिम्मेदारियों में परिवर्तन हो जाता है। आप जीवन में थोड़ा और इन्तजार करें क्योंकि जीविका को स्थापित करने, अपनी कम्पनी बनाने, अपनी साख बनाने और उस मकाम तक पहुँचने में समय लग जाता है जहाँ आप थोड़ा ठहर कर इस बारे में सोच सकें।

यात्रायें
बियर खरीदने के लिये जेब में पर्याप्त पैसे रखे हुये एक बैकपैक के साथ यात्रा करना और एक बच्चे को लेकर यात्रा करना दो बिल्कुल अलग चीजे हैं। इससे पहले कि आप परिवार बसाकर बच्चों के बारे में सोचें आप और आपका जीवनसाथी बिना बच्चों के सारी दुनिया की यात्रा कर विभिन्न चीजों को देख और महसूस कर सकते हैं।

घर खरीदना
अपने बच्चे की परवरिश कोई भी एक बेडरूम वाले घर में नही करना चाहता। जब आप की नई-नई शादी हुई हो, आप कठोर परिश्रम कर रहे हों और अपना नाम कमा रहे हों तो वास्तव में आपके जीवन की वही सच्चाई होती है। बच्चों के फैसले को टालने का वास्तविक कारण यह है कि इससे आपको बगीचे और तरणताल युक्त घर खरीदने के लिये थोड़ा समय मिल जायेगा और उस समय केवल आपको उस घर में बच्चों को लाना होगा।

पढ़ाई पूरी करना
आजकल के आर्थिक वातावरण में ऊँची पढ़ाई करना और भी महत्वपूर्ण हो गया है। बच्चों का भरणपोषण और उनसे सम्बन्धित जिम्मेदारियाँ निभाते हुये डिग्री हासिल करना एक पागलपन है- इस स्थिति में कहीं तो नुकसान होगा ही और वह हमेशा आपका ही होगा। अपनी पढ़ाई को पूरा करके मातृत्व सुख के लिये इन्तजार करना एक बहुत ही उत्तम सुझाव है।



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