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ये संकेत बताते हैं कि महिला सुपर फर्टाइल है या नहीं
किसी भी महिला के लिए गर्भधारण करना जिंदगी का सबसे सुंदर एहसास है। मगर इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता है कि मां बनने का यह एहसास हर महिला के लिए आसान नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि आजकल की भागदौड़ वाली जिंदगी और बाहरी खानपान की वजह से कहीं ना कहीं फर्टिलिटी पर बहुत असर पड़ रहा है। जबकि इसके उलट कुछ महिलाओं के लिए मां बनना बहुत आसान हो जाता है। कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है?
असल में विज्ञान की मानें तो इसके लिए बहुत से कारण हो सकते हैं। किसी भी महिला के केस में इन कारणों का पता लगाना भी बहुत ही आसान काम है। आज इस आर्टिकल के जरिए हम कुछ ऐसे ही बिंदुओं के बारे में चर्चा कर रहे हैं, जिनसे यह अंदाजा लगाना आसान है कि महिला सुपर फर्टाइल है या नहीं।

पीरियड साइकिल की सही टाइमिंग
हर महीने और सही तारीख पर अगर आपको पीरियड्स आ रहे हैं तो, इसका मतलब है कि आप सेहतमंद हैं और आप फर्टाइल भी हैं। इससे जाहिर होता है कि आपके शरीर के सभी फंक्शन सुचारु रूप से चल रहे हैं। जबकि दूसरी ओर, पीरियड्स की टाइमिंग गड़बड़ा जाने की वजह से आपको बहुत सी तकलीफों से गुजरना पड़ता है। साथ ही यह गर्भाशय में इंफेक्शन होने का संकेत भी हो सकता है इसलिए सही समय में जांच जरूर करवाएं।

शरीर का कर्व में बने रहना
बॉडी का सही कर्व में होना बहुत जरूरी है। महिलाओं के केस में बॉडी का कर्व उनके स्तन पर निर्भर करता है। स्तन का हेल्दी होने का मतलब है कि आपके हार्मोनल ग्लांड्स सही तौर पर काम कर रहे हैं जिसका मतलब है कि आपको फर्टिलिटी से जुड़ी कोई समस्या नहीं है। हालांकि स्तनों का बड़ा होना ही सुपर फर्टाइल होने का संकेत नहीं है, यह तो सिर्फ एक आधार है कि आप स्वस्थ हैं।

प्रेग्नेंट होना, पॉजिटिव साइडइफेक्ट
जिन महिलाओं को फर्टिलिटी की कोई समस्या नहीं होती है वह बर्थ कंट्रोल आजमाने के बाद भी जन्म दे सकती हैं। हालांकि इस तरह की प्रेगनेंसी हर बार नहीं होती है, लेकिन यह एक अच्छा संकेत है कि आप सुपर फर्टाइल और स्वस्थ हैं। यह सुपर फर्टाइल होने का एक सकारात्मक साइडइफेक्ट होता है।

मेडिकल जांच
अच्छी डाइट और बेहतर लाइफस्टाइल संग मेडिकल तौर पर भी आपका स्वस्थ होना जरूरी है। इसके लिए समय पर अपना चेकअप करवाते रहें, एक्सरसाइज करें और दवाएं पूरी लें। साथ ही साफ़-सफाई का आप पूरा ख्याल रखते हैं तो, इसका मतलब है कि आप फर्टाइल हैं।

बेहतर ओव्यूलेशन साइकिल
एक्सपर्ट्स की मानें तो महिलाओं में ओव्यूलेशन (एक ऐसी प्रक्रिया, जिसमें अंडाशय से अंडाणु रिलीज होकर फैलोपियन ट्यूब में जाता है फिर वो शुक्राणु से फर्टिलाइजेशन में मदद करता है, जो आखिर में गर्भाशय में भ्रूण बनता है।) के दौरान महिलाओं की सूंघने की शक्ति बढ़ जाती है। साथ ही माहावारी के दौरान फेरोमोन (एक तरह का केमिकल) के प्रति महिलाएं सेंसटिव हो जाती हैं। एक अच्छी ओव्यूलेशन साइकिल दर्शाती है कि महिला गर्भवती हो सकती है।

गर्भधारण के संकेत
ऐसा माना जाता है कि माहावारी के मध्य में सबसे ज्यादा फर्टाइल होती हैं। साथ ही यह एक अच्छा साइन माना जाता है कि गर्भाशय आसानी से स्पर्म को आने दे और उसके इमप्लाटेंशन में मदद करें। इसी वजह से गर्भधारण के शुरूआती दिन अच्छे से निकल जाते हैं। साथ ही एस्ट्रोजन का बनाना आपके हार्मोनल सिस्टम के लिए बढ़िया संकेत है क्योंकि यही एस्ट्रोजन एक हेल्दी प्रेगनेंसी में बहुत सहायक होते हैं।



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