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R Ashwin को बचपन से थी घरघराहट की समस्या, कम उम्र की बच्चों में कितनी सामान्य है ये समस्या?
How Common Is Wheezing in Kids : भारत के दिग्गज ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। आपको बता दें कि बचपन में अश्विन को टीबी और घरघराहट जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा।
पांच साल की उम्र में घरघराहट की वजह से उन्हें खेलने और दौड़ने में कठिनाई होती थी। उनके अनुभव से यह सवाल उठता है कि क्या बच्चों में घरघराहट जैसी समस्याएं आम हैं, और इन्हें कैसे पहचानकर इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।

इन लक्षणें को न करें इग्नोर
छोटे बच्चों में घरघराहट की समस्या काफी आम है। सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज सुनाई देना इसका प्रमुख लक्षण है। यह समस्या तब होती है, जब बच्चों का श्वसन तंत्र कमजोर होता है। कमजोर श्वसन तंत्र वाले बच्चों में टीवी (टीबी) और अस्थमा का खतरा अधिक रहता है। श्वसन संबंधी समस्याएं अक्सर एलर्जी, संक्रमण, या पर्यावरणीय कारणों से उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे बच्चों की देखभाल में विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है, ताकि समय रहते उनका सही इलाज हो सके।
बच्चों में घरघराहट की वजह
बच्चों में घरघराहट कई कारणों से हो सकती है। सबसे सामान्य कारण वायरल संक्रमण जैसे सर्दी या ब्रोंकाइटिस है, जो श्वास नली को प्रभावित करता है और घरघराहट का कारण बनता है। इसके अलावा, हवा में मौजूद धूल, धुआं, परागकण या पालतू जानवरों के बालों से एलर्जी भी इस समस्या का प्रमुख कारण हो सकती है।
समय से पहले जन्मे (प्रीमैच्योर) बच्चों में यह समस्या अधिक देखी जाती है, क्योंकि उनके फेफड़े पूरी तरह से विकसित नहीं होते, जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है। इन कारणों के अलावा, कमजोर इम्यून सिस्टम या आनुवांशिक कारण भी बच्चों में श्वसन समस्याएं उत्पन्न कर सकते हैं।
बच्चों में घरघराहट के लक्षण
शिशु रोग विशेषज्ञ के अनुसार, बच्चों में घरघराहट के कई लक्षण हो सकते हैं। इसमें सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आना सबसे प्रमुख है। इसके अलावा, सांस लेने में कठिनाई और बेचैनी महसूस होना, खासतौर पर खांसी जो रात में अधिक बढ़ जाती है, भी इसके लक्षण हैं।
छाती का कड़ा महसूस होना या हल्का से तेज दर्द होना भी घरघराहट का संकेत हो सकता है। इन लक्षणों पर ध्यान देकर समय पर चिकित्सा सहायता लेना आवश्यक है।
बच्चों को घरघराहट से बचाने के कुछ उपाय
घर की सफाई: घर को नियमित रूप से साफ रखें। खासकर बच्चे के कमरे में धूल, मिट्टी, पालतू जानवरों के बाल, और पराली के कणों को आने से रोकें।
धूम्रपान से बचाव: बच्चों के आसपास धूम्रपान न करें, क्योंकि इससे घरघराहट और अन्य सांस संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। बच्चों के स्वास्थ्य के लिए स्वच्छ और धूम्रपान रहित वातावरण बनाएं।
बच्चों को साफ-सफाई की आदत डाले: बच्चों में खाना खाने से पहले और शौच के बाद हाथ धोने की शिक्षा दें। साबुन और पानी से हाथ धोने से कीटाणु नष्ट होते हैं और श्वसन सहित अन्य बीमारियों का खतरा कम होता है
बच्चों को अच्छी डाइट खिलाएं : बच्चों की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए उन्हें पोषण युक्त खाना खिलाएं। उनके आहार में हरी सब्जियां, फल, और विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें। यह बीमारियों का खतरा कम करने में सहायक होता है।



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