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कैसा होना चाहिये बच्चे का प्री-स्कूल

जरुरी बातें-
1. दूरी- स्कूल आने जाने में लगने वाले समय, सड़क पर प्रदूषण, बच्चे की सुरक्षा और उस पर पड़ने वाले तनाव आदि का ख्याल रखते हुए प्री स्कूल आपके घर के पास हो।
2. पृष्ठभूमि- किसी भी संस्थान के आयोजक और कर्मचारी उसकी रीढ़ होते हैं। इसलिए आपको कोई ऐसा प्री स्कूल तलाशना चाहिये, जिसे पढे़ लिखे जानकार पेशेवर चलाते हों। इसकी वजह यह है कि ऐसे प्री स्कूल में काम के लिए संयोजित और योजनाबद्ध् प्रणाली होती है, जिसका विकास कई वर्षों के अनुसंधान के बाद किया जाता है। इसके अलावा, पुराने प्री स्कूल में बाल मनोविज्ञान की अच्छी समझ का आपको फायदा मिलेगा।
3. विश्वसनीयता- जानी-मानी शिक्षा प्रणाली वाला कोई स्थापित ब्रांड आपके बच्चे के भविष्य को किसी अनजाने नाम के साथ जोखिम में डालने के मुकाबले सुरक्षित है। इसलिए ऐसे प्री स्कूल का पता लगाइये जिसकी अच्छी ख्याती हो।
4. बच्चों की संख्या- प्री स्कूल अगर छोटा होगा तो हर टीचर हरेए बच्चे के बारे में निजी तौर पर जानकारी रखेगा। बच्चे को भिन्न आयोजनों में हिस्सा लेने के लिए पर्याप्त मौका मिलेगा जबकि बड़े स्कूलों में बच्चे भीड़ में खोए से रहते हैं।
5. माहौल- जब आप किसी प्री-स्कूल में जाते हैं तब देखिये कि बच्चे खुश, संतुष्ट और भिन्न गतिविधियों में सक्रियता से लगे नजर आ रहे हैं या नहीं। यह भी देखिये कि कर्मचारी और शिक्षक वास्तव में बच्चों का ख्याल रखते हैं या नहीं तथा उनका संबंध मित्रवत है या नहीं। स्कूल का माहौल शांतिपूर्ण होना चाहिये, जहां कोई चीखता-चिल्लाता न हो। पूरा परिवेश, साफ-सुथरा और बच्चों के अनुकूल होना चाहिये।
6. पाठ्यक्रम और गुणवत्ता- शाखा की प्रधानाध्यापिका से आगे प्री स्कूल सिस्टम, पाठ्यक्रम, परिवहन, यूनिफॉर्म, मिड डे मील के प्रावधान आदि के बारे में पूछिए। भोजन तैयार करने के तरीके के बारे में पूछिए। आप यह भी पूछ सकते हैं कि स्कूल बच्चों को कहीं बाहर यानी की पिकनिक आदि ले जाता है या नहीं। 2-4 साल की आयु में बच्चे के मिस्तिष्क का 50 फीसदी विकास हो जाता है। यह पता कीजिए कि वहां सांस्कृतिक समारोह आदि कैसे आयोजन किए जाते हैं। इसके कोई अतिरिक्त पैसे तो नहीं लगेगें।



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