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जानें किन कारणों से नहीं पीटना चाहिये अपने मासूम बच्चे को
क्या आप अपने बच्चों को मारते हैं और यह बोलने में गर्व महसूस करते हैं "मारपीट से बच्चा एक बेहतर इंसान बनता है!"?
तो आपको अपने आपको सही कर लेना चाहिए क्यूंकि समाज शास्त्र के अनुसार बच्चों पर मारपीट का गलत शारीरिक और भावनात्मक असर पड़ता है।
बच्चों का मन बहुत कोमल होता है, अगर आप उसे मारेंगे या धमकाएंगे तो वह आपको अपना साथी कभी नहीं समझेगा और आपसे अपनी बातें छुपाएगा। ऐसे ही कई और कारण हैं, जिनकी वजह से मां-बाप या टीचर को बच्चों पर हाथ नहीं उठाना चाहिये।

1. गलत सामाजिक आदर्श सिखाता है
मारपीट से आदर में कमी दिखती है। जब आप अपने बच्चे को मारते हैं तो आप उनके साथ इंसानों की तरह नहीं बल्कि किसी वस्तु की तरह पेश आते हैं। इसका बुरा असर हो सकता है और बच्चे सज़ा को दर्द के साथ जोड़ सकते हैं और यह समझ सकते हैं कि प्यार भरे रिश्ते में भी मारपीट की जा सकती है।

2. यह धारणा बनाती है कि ताकतवर ही सही होता है
अगर आपको अपने बच्चे को कुछ समझाना है तो मारपीट बिल्कुल ही सही तरीका नहीं है क्यूंकि अगर आप बच्चे को उसकी गलती के लिए मारते हैं तो आप यह सीखा रहे हैं कि जो बड़ा या ताकतवर होता है वही हमेशा सही होता है।

3. यह सिखाता है कि बड़ों को बच्चों को मारने का अधिकार है
आपने सुना होगा कि बच्चे अपने बूढ़े माँ बाप को पीटते हैं। कितना घिनौना लगता है। है ना? इसलिये जब आप अपने बच्चे को मारते हैं तो आप उनके सामने यह जाता रहे हैं कि बड़े और ताकतवर छोटे और कमज़ोर को मार सकते हैं। अगर आप ऐसा अपने बच्चों में अनुशाशन लाने के लिए कर रहे हैं, यह सोचिये कि इसका तब क्या असर होगा जब वह बड़ा और आप बूढ़े हो जाएंगे।

4. उत्तेजना से हर समस्या का हल नहीं निकलता
मारपीट से यह भी दिखता है कि जीवन में हिंसा ही ज़्यादातर समस्याओं का समाधान है। मारपीट भी एक तरह का धौंस दिखाना है जिससे बच्चे यह सीखते हैं कि यह एक सही तरीका है जिससे वह अपना कोई भी काम करवा सकते हैं।

5. बच्चे के आत्मविश्वास पर असर पड़ता है
अगर आप अपने बच्चे में आत्मविश्वास देखना चाहते हैं तो मारपीट अच्छा उपाय नहीं है। जब वही लोग जिनको उन्हें बचाना चाहिए, उनको पीटते हैं तो बच्चा अपने ही अस्तित्व पर सवाल करने लगता है।

6. इससे मानसिक बीमारी भी हो सकती है
एक अध्ययन के अनुसार पता चला है कि जिन बच्चों को अनुशाशन सिखाने के लिए बचपन में मार पड़ी थी उनको जवानी में कई तरह की मानसिक बीमारियों का सामना करना पड़ा। इसलिए अगली बार जब आप अपने बच्चे को मारते हैं तो यह ज़रूर ध्यान रखें कि इसकी मनोवैज्ञानिक समस्या बाद में दिख सकती है।



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