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बच्चों का भी होता है मूड स्विंग, ऐसे करें उन्हें डील

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अपने बच्चे पर नजर रखें और मूड स्विंग होने वाले कारणों से सचेत रहें। कुछ बच्चे उस वक्त चिड़चिड़े हो जाते हैं जब उन्हें भूख लगती है या नींद आती है। कुछ बच्चों को अकेले में वक्त बिताना होता है और इसलिए वो अकेले में जाकर बैठ जाते हैं।

अगर आप टीनेजर या फिर उससे छोटे बच्चे की परवरिश कर रहे हैं तो आपने जोर से दरवाजा बंद होने, कमरे का सामान फेंकने, आंखों से आंसू बह जाने, पैर पटक कर जाने जैसे वाकये देखे होंगे। मुझे अकेला छोड़ दो, जो करना है करो, जैसे डायलॉग भी आपने उनसे सुने होंगे।

child’s mood swings

कुछ मौकों पर ये सही हैं लेकिन ज्यादातर समय ये एक अनचाहा ड्रामा ही होता है। ऐसे समय में जब आप अपने बच्चे से बात करने की कोशिश करते हैं तब मामला शांत होने के बजाय उल्टा बढ़ जाता है। ऐसा देखकर आपको भी गुस्सा ही आता है।

सच्चाई ये है कि हर माता पिता और बच्चे इस दौर से गुजरते हैं। हमने भी एक समय में अपने माता पिता से रुखा और बुरा बर्ताव कभी ना कभी किया है। इस बार आपकी बारी है अपने बढ़ते हुए बच्चे के बर्ताव को संभालने की। बढ़ते हुए बच्चे में मूड स्विंग्स की समस्या होना सामान्य है, आप उसे ठीक नहीं कर सकते हैं लेकिन स्थिति बेहतर करने का रास्ता जरूर ढूंढ सकते हैं।

उन्हें सहानुभूति दें और उन्हें समझें

उन्हें सहानुभूति दें और उन्हें समझें

आप खुद को उनकी जगह पर रखकर देखें। आजकल के बच्चों को कई चीजों से निपटना पड़ता है। पढ़ाई को लेकर दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। उन्हें रोजाना स्कूल, एक्स्ट्रा एक्टिविटी और फिर होमवर्क पूरा करना होता है। ऐसे समय में वो खुद को अकेला और खोया हुआ सा महसूस करते हैं।

उन्हें बताएं आप उनके सपोर्ट के लिए हमेशा मौजूद हैं

उन्हें बताएं आप उनके सपोर्ट के लिए हमेशा मौजूद हैं

अगर वो चिल्ला कर बात कर रहे हैं तो उसपर प्रतिक्रिया देने के बजाय उनके इस बर्ताव के पीछे छिपे कारण का पता लगाएं। ये जानने की कोशिश करें कि आखिर क्यों उनके व्यवहार में ये परिवर्तन आया है। उसके मूड स्विंग पर गुस्सा ना हों बल्कि उन्हें अपना सपोर्ट दिखाएं। उनसे बात करने की कोशिश करें और पता लगाएं कि आखिर उन्हें कौनसी बात परेशान कर रही है। अगर वो आपसे बात करने से इंकार कर दें तो उन्हें अकेला छोड़ दें लेकिन उन्हें ये बात महसूस हो जाएगी कि आप उनके साथ है। जब वो शांत हो जाएं तब खाना खाते या फिर टीवी देखते समय दोबारा इस बारे में पूछ सकते हैं।

अपनी सीमाएं तय करें

अपनी सीमाएं तय करें

आपको अपने बच्चे का कैसा व्यवहार स्वीकार और अस्वीकार है इस बारे में आप स्पष्ट रहें। ये आपके लिए एक दायरा तैयार करने में मदद करेगा। आपका बच्चा आपकी सीमा की परीक्षा लेगा। वो जानना चाहेगा कि वो कहा तक अपने इस व्यवहार को ले जा सकता है और ये आपके ऊपर है कि आप उसे कितनी छूट देते हैं। अगर वो हद से बाहर जाने लगे तो उन्हें सचेत करें।

आप शांत रहें और आलोचना ना करें

आप शांत रहें और आलोचना ना करें

आप उनकी निंदा करने और उन्हें जज करने से बचें। संभावना है कि आपका बच्चा ओवररिएक्ट कर रहा हो। लेकिन आपको अपना धैर्य बनाये रखना है और स्थिति को नियंत्रित करना है। उसकी इमोशनल स्थिति में आप खुद ना बह जाएं। अगर आप उसका मजाक उड़ाएंगे और ताना मारेंगे तो उन्हें लगेगा कि पूरी दुनिया ही उनके खिलाफ है। अगर आप अपना धैर्य ऐसे समय में खो देंगे तो स्थिति इससे भी ज्यादा खराब हो जाएगी।

अपने बच्चों के साथ खेलें

अपने बच्चों के साथ खेलें

अगर आपका बच्चा खराब मूड में है तो उनके साथ खेल खेलने की कोशिश करें। ये उनके मूड को बेहतर करेगा और उन्हें रिलैक्स होने का मौका मिलेगा। शारीरिक कसरत से एंडोर्फिन रिलीज होता है और इससे भी मूड स्विंग में राहत मिलती है।

अगर आपको लगे कि आपके और बच्चे के बीच रोज ही तकरार हो रहा है तो आप खुद को अकेला ना समझें। आप दूसरे माता पिता से बात करें और उनके अनुभव जानें। निराश ना हों, ये वक्त भी चला जायेगा और स्थिति बेहतर होगी।

Read more about: parenting tips kids how to
English summary

How to deal with your child’s mood swings

Mood swings is a common problem among teenagers.Parenting teenagers can a little tough on parents as teenage issues can be very sensitive. Certain parenting tips are given below to deal with mood swings so to know more read on
Story first published: Friday, February 8, 2019, 17:07 [IST]
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