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14 साल की नाबालिग को मिली गर्भपात की मंजूरी, भारत में कितने हफ्ते तक करा सकते हैं अबॉर्शन
abortion rules in india : सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम मामले में अर्जेंट सुनवाई करते हुए 14 साल की रेप विक्टिम को करीब 30 हफ्ते की प्रेगनेंसी टर्मिनेट करने की मंजूरी दी है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने संविधान के अनुच्छेद-142 का इस्तेमाल करते हुए यह फैसला सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले से पहले 19 अप्रैल को 14 साल की इस नाबालिग लड़की के मेडिकल एग्जामिनेशन का आदेश देते हुए एक मेडिकल बोर्ड गठित की थी। जिसमें कहा गया था कि अगर प्रेगनेंसी के स्टेज पर लड़की का अगर गर्भपात कराया जाता है तो शारीरिक और मानसिक तौर पर उस पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
यह ही मेडिकल रिपोर्ट आज कोर्ट में पेश की गई, जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया। हालांकि अक्टूबर 2023 में 26 हफ्ते की प्रेगनेंट शादीशुदा महिला को अबॉर्शन की इजाजत नहीं दी गई थी। ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर भारत में कितने हफ़्ते में कोई गर्भवती महिला अबॉर्शन करा सकती है और अबॉर्शन को लेकर क्या नियम हैं?

प्रेग्नेंसी अबॉर्शन का नियम क्या कहता है?
भारत में अबॉर्शन को लेकर MTP एक्ट में बदलाव साल 2020 में किया गया था। उससे पहले 1971 में बना कानून लागू होता था। इसमें यह नियम लागू होते हैं
- प्रेग्नेंसी अबॉर्शन का नियम क्या कहता है मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट के तहत, 20 हफ्ते तक वो डॉक्टर्स की सलाह पर गर्भपात करवा सकती है।
- किसी भी शादीशुदा महिला, रेप विक्टिम, दिव्यांग महिला और नाबालिग लड़की को 24 हफ्ते तक की गर्भपात करने की इजाजत दी जाती है।
- 24 हफ्ते से ज्यादा प्रेग्नेंसी होने पर मेडिकल बोर्ड की सलाह पर कोर्ट से गर्भपात की इजाजत लेनी पड़ती है।
इन स्थितियों में भी करवा सकती हैं अबॉर्शन?
- शादीशुदा जोड़े का अबॉर्शन के लिए दोनों का सहमत होना अनिवार्य हैं।
- रेप विक्टिम को कोर्ट गर्भपात करने की मंजूरी देता है।
- सिंगल मदर अकेले फैसला ले सकती है।
- इसके अलावा अगर महिला ये बात साबित कर देती है कि प्रेगनेंसी की वजह से वह शारीरिक या मानसिक रुप से असुरक्षित हैं, तो वह कोर्ट उसे गर्भपात की मंजूरी देता है।



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