Latest Updates
-
क्या 1876 जैसी तबाही फिर होगी? 150 साल बाद लौट सकता है विनाशकारी अल नीनो! सूखा और अकाल का खतरा -
बरसात में भूलकर भी न खाएं ये 10 सब्जियां, वरना शरीर बन सकता है बीमारियों का घर -
अनचाहे गर्भ से बचने के लिए कौन-सा तरीका है सबसे सुरक्षित? एक्सपर्ट से जानें पूरी जानकारी -
World Population Day 2026 Quotes: 'आबादी पर लगाम, तरक्की को सलाम', इन कोट्स व स्लोगन से फैलाएं जागरूकता -
अमिताभ बच्चन बने पॉलिसीबाजार के ब्रांड एंबेसडर, शुरू हुआ भारत का सबसे बड़ा इंश्योरेंस जागरुकता अभियान -
बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेंगी ये दवाएं, अल्कोहल की मात्रा को लेकर सरकार ने लागू किया कड़ा नियम -
World Population Day 2026: 11 जुलाई को ही क्यों मनाया जाता है जनसंख्या दिवस? जानिए इतिहास-महत्व और थीम -
Corona Alert: फिर लौट रहा कोरोना? आंध्र प्रदेश में 2 मौतें, 4 नए केस से बढ़ी चिंता -
बारिश में बनाएं क्रिस्पी मूंग दाल के पकौड़े और हरे धनिए-पुदीने की चटनी, नोट कर लें आसान रेसिपी -
योगिनी एकादशी की शुभकामनाएं संस्कृत में भेजें, देवभाषा के इन मंत्रों और सूक्तियों से अपनों का दिन बनाएं मंगलमय
14 साल की नाबालिग को मिली गर्भपात की मंजूरी, भारत में कितने हफ्ते तक करा सकते हैं अबॉर्शन
abortion rules in india : सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम मामले में अर्जेंट सुनवाई करते हुए 14 साल की रेप विक्टिम को करीब 30 हफ्ते की प्रेगनेंसी टर्मिनेट करने की मंजूरी दी है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने संविधान के अनुच्छेद-142 का इस्तेमाल करते हुए यह फैसला सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले से पहले 19 अप्रैल को 14 साल की इस नाबालिग लड़की के मेडिकल एग्जामिनेशन का आदेश देते हुए एक मेडिकल बोर्ड गठित की थी। जिसमें कहा गया था कि अगर प्रेगनेंसी के स्टेज पर लड़की का अगर गर्भपात कराया जाता है तो शारीरिक और मानसिक तौर पर उस पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
यह ही मेडिकल रिपोर्ट आज कोर्ट में पेश की गई, जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया। हालांकि अक्टूबर 2023 में 26 हफ्ते की प्रेगनेंट शादीशुदा महिला को अबॉर्शन की इजाजत नहीं दी गई थी। ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर भारत में कितने हफ़्ते में कोई गर्भवती महिला अबॉर्शन करा सकती है और अबॉर्शन को लेकर क्या नियम हैं?

प्रेग्नेंसी अबॉर्शन का नियम क्या कहता है?
भारत में अबॉर्शन को लेकर MTP एक्ट में बदलाव साल 2020 में किया गया था। उससे पहले 1971 में बना कानून लागू होता था। इसमें यह नियम लागू होते हैं
- प्रेग्नेंसी अबॉर्शन का नियम क्या कहता है मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट के तहत, 20 हफ्ते तक वो डॉक्टर्स की सलाह पर गर्भपात करवा सकती है।
- किसी भी शादीशुदा महिला, रेप विक्टिम, दिव्यांग महिला और नाबालिग लड़की को 24 हफ्ते तक की गर्भपात करने की इजाजत दी जाती है।
- 24 हफ्ते से ज्यादा प्रेग्नेंसी होने पर मेडिकल बोर्ड की सलाह पर कोर्ट से गर्भपात की इजाजत लेनी पड़ती है।
इन स्थितियों में भी करवा सकती हैं अबॉर्शन?
- शादीशुदा जोड़े का अबॉर्शन के लिए दोनों का सहमत होना अनिवार्य हैं।
- रेप विक्टिम को कोर्ट गर्भपात करने की मंजूरी देता है।
- सिंगल मदर अकेले फैसला ले सकती है।
- इसके अलावा अगर महिला ये बात साबित कर देती है कि प्रेगनेंसी की वजह से वह शारीरिक या मानसिक रुप से असुरक्षित हैं, तो वह कोर्ट उसे गर्भपात की मंजूरी देता है।



Click it and Unblock the Notifications