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डिलीवरी के बाद हैवी ब्लीडिंग के लिए मैटरनिटी पैड चुनें या सैनिटरी पैड, जानिए दोनों में क्या है अंतर
डिलीवरी के बाद, तुरंत बाद ही गर्भाशय अपने पहले के आकार में आने की प्रक्रिया शुरू कर देता है, इसलिए डिलीवरी होने के बाद मां को हैवी ब्लीडिंग होती है। डिलीवरी के बाद होने वाला ब्लड डिस्चार्ज, पीरियड ब्लीडिंग की तुलना में बहुत गहरे रंग और हैवी क्लॉटिंग से भरी होती हैं।
ये ब्लड डिस्चार्ज डिलीवरी के चार से छह सप्ताह तक रहती हैं। डिलीवरी के बाद जैसे जैसे दिन बढ़ते हैं वैसे वैसी इस वजाइनल डिस्चार्ज के बहाव और रंग में भी अंतर देखने को मिलता हैं। वैसे मेडिकल टर्म में इस रक्तस्राव को ''लोचिया'' कहा जाता है और यह एक सामान्य प्रक्रिया है जो गर्भाशय की सभी अतिरिक्त सतह और प्लेसेंटा के अलग होने तक चलती हैं।

डिलीवरी की वजह से वजाइना का साइज भी बड़ा हो जाता है, इसलिए यह ब्लीडिंग का फ्लो तेज ही रहता है। इस समय में साधारण सैनिटरी पैड ज्यादा उपयोगी नहीं साबित होते है। ज्यादा ब्लीडिंग होने से इंफेक्शन होने का खतरा भी बढ़ जाता है और बार-बार पैड चेंज करने की झंझट और लीकेज से बचने के लिए डॉक्टर सैनिटरी पैमैटर्निटी पैड यूज करने की सलाह देते हैं। आइए जानते हैं मैटरनिटी पैड के बारे में, कैसे ये पैड डिलीवरी के बाद हैवी ब्लीडिंग की समस्या से बचने में आपकी मदद करते हैं।

मैटरनिटी पैड को सैनिटरी पैड से बदलने से क्या फर्क पड़ेगा?
डिलीवरी के बाद मैटरनिटी पैड का इस्तेमाल किया जाता है जबकि सैनिटरी पैड का इस्तेमाल आमतौर पर नियमित पीरियड्स में किया जाता है। सैनिटरी पैड की तुलना में मैटरनिटी पैड में दोगुनी सोखने की क्षमता होती है। मैटरनिटी पैड आकार में मोटे होते हैं और महिलाओं के बड़े क्षेत्र को कवर करने के लिए लंबे होते हैं जबकि सैनिटरी पैड पतले होते हैं और कम क्षेत्र को कवर करते हैं। प्रेगनेंसी के वक्त वजाइना में टांके आते हैं। हैवी फ्लो को रोकने के लिए ऐसे में अगर साधारण सैनिटरी पैड का यूज किया जाता है तो इससे टांको में तकलीफ होने का डर रहता है। क्योंकि साधारण सैनिटरी पैड्स में जो मैटेरियल यूज होता है वह सख्त होता है। वहीं मैटरनिटी पैड्स में सॉफ्ट मैटेरियल यूज होता है।
बात अगर कम्फर्ट की है तो मैटरनिटी पैड ज्यादा सही रहते हैं, इसे इस्तेमाल करने से पैंटी या अन्य अंडरक्लॉथ पर दाग नहीं लगता है और टांके वाली जगह में भी कोई परेशानी नहीं होती है। सैनिटरी पैड के बजाय मैटरनिटी पैड खरीदना सही रहता है क्योंकि वे सामान्य पैड की तुलना में लंबे, नरम और मोटे होते हैं। डिलीवरी के बाद होने वाली हैवी ब्लीडिंग को जल्दी सोखने के साथ ही लीकेज की समस्या से भी बचाते हैं।

कितने पैड करें यूज
डिलीवरी के बाद कई महिलाओं को बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है तो कई महिलाओं को बहुत कम इसलिए शुरुआत में 2-3 मैटर्निटी पैड्स का इस्तेमाल होता है। मगर कुछ दिनों बाद 1 पैड से भी काम चल जाता है। डिलीवरी के बाद हर महिला को कम से कम 2 पैकेट अपने पास जरूर रखने चाहिए। और शुरुआती दिनों में कम से कम 3 बार पैड जरूर बदलना चाहिए।
मैटरनिटी पैड का इस्तेमाल कब बंद कर देना चाहिए?
यह आप पर निर्भर करता है। पहले कुछ दिनों और हफ्तों के लिए, जब रक्तस्राव अपने चरम पर होता है, तो मैटरनिटी मैक्सी पैड का उपयोग करना सबसे आसान होता है क्योंकि ये विशेष रूप से बहुत भारी रक्तस्राव को अवशोषित करने के हिसाब से ही डिज़ाइन किए गए होते हैं। जैसे-जैसे आपका प्रवाह हल्का होता जाता है, आप सामान्य स्थिति में वापस आने के साथ-साथ आप सामान्य पैड का इस्तेमाल कर सकती हैं।



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