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प्राचीन तरीके से करें शिशु की देखभाल
सदियों पहले जब किसी घर में शिशु पैदा होता था तब उसके देखभाल के लिए दादी और नानी ही जिम्मेदार हुआ करतीं थीं। वह अपने पुराने नुस्खों के दा्रा मां और शिशु का पूरी तरह से देखभाल करती थीं। पर आजकल मॉर्डन जमाने में रहने वाले दंपती अपने शिशुओं की कुछ अलग तरह से ही देखभाल करते हैं, जिससे जब वह बच्चा बड़ा होने लगता है, तब वह कमजोर होने के साथ साथ कई अन्य बीमारियों से घिर जाता है। इसलिए आइये जानते हैं कि मां और बच्चे की देखभाल पुराने और नए तरीको को अपना कर कैसे की जा सकती है।

जरुरी सलाह-
1. पुराने जमाने में प्रसव के बाद जब मां घर पर आती थी, तब मां और शिशु दोनों को बिल्कुल अलग एक कमरे में रखा जाता था, जहां पर किसी भी मित्र या घर के सदस्यों का जाना वर्जिश था। यह इसलिए किया जाता था जिससे मां और शिशु को कोई रोग या संक्रमण न हो।
2. इसी तरह प्रसव के कुछ दिन बाद मां के शरीर की मलिश भी की जाती थी। इसके लिए गरम आयुर्वेदिक तेल का प्रयोग किया जाता था जिससे मां के जोड़ों को रहत मिल सके। इसी तरह बच्चे की शरीर की भी मालिश होती थी जिससे उसकी मासपेशियां मजबूत बन सके।
3. शिशु की मालिश करने से न केवल उसकी मासपेशियां और हड्डियां मजबूत होती हैं बल्कि खून का दौरा भी तेज होता है। साथ ही गरम तेल की मालिश से बच्चा जल्दी जल्दी चलना सीख जाता है।
4. उस समय मां को केवल दूध और उससे बने पदार्थों पर ही रखा जाता था। उसे किसी भी तरह का नॉन वेज आहार खाने के लिए मना किया जाता था। यह इसलिए किया जाता था कि कहीं मां को मांसाहार खा कर किसी प्रकार का संक्रमण न हो जाए। दूध और घी से मां के शरीर के लिए जरुरी पोषण पूरा हो जाता था। इसके अलावा मसालों का प्रयोग भी बंद कर दिया जाता था।
5. आज भी प्रसव के पहले मां को प्रिजर्व मीट वगैरह लेने से मना किया जाता है। जिससे कि जब बच्चा पैदा हो तो उनके ऊपर इस चीज का कोई असर न पड़े। आजकल तो सॉस आदि भी गर्भवती महिला के लिए खतरनाक माने जाते हैं।
6. पुराने जमाने में देखभाल करने के तरीके से मां में आगे चल कर तनावा की शिकायत कम होती है। जैसे की महिला को मां के घर पर भेज दिया जाता था और इससे वह तनावमुक्त और खुश रहती थी। आजकल तो हर महिला जॉब करने के चक्कर में प्रसव के तुरंत बाद ही काम के लिए घर से बाहर निकल जाती है। घर में अकेले पड़ जाने और पूरा भार खुद पर संभालने की वजह से उसपर तनावा हावी हो जाता है।



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