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मुझे माईग्रेन है, क्या गर्भवती होने से पहले मुझे इसके लिये कुछ करना होगा?
हर महिला के जीवन में गर्भावस्था सबसे ज्यादा खास समय होता है, इस दौरान उसके शरीर से लेकर उसकी भावनाओं तक में परिवर्तन आ जाता है और उसे खुद में नयापन महसूस होता है।
गर्भावस्था के दौरान सिर्फ औरत की शारीरिक अवस्था में परिवर्तन होता है बल्कि उसकी मानसिक अवस्था में भी काफी अंतर आ जाता है, उसमें मातृत्व की भावना आने लगती है।
इस अवस्था में सबसे बड़ी चुनौती सिरदर्द को ठीक करना होता है क्योंकि इसकी वजह से काफी दर्द होता है। गर्भावस्था के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन नामक हारमोन का स्तर काफी बढ़ जाता है जिसकी वजह से सिर में दर्द होना स्वाभाविक होता है।
जिन महिलाओं को पहले माईग्रेन की कोई समस्या नहीं थी, उन्हें ऐसी स्थिति में बहुत परेशानी झेलनी पड़ती है। पहली बार गर्भवती होने पर ये दिक्कत ज्यादा महसूस होती है।

गर्भावस्था में शुरूआती तीन महीने में सिरदर्द बहुत ज्यादा होता है उसके बाद महिला को भी आदत हो जाती है और फिर समस्या भी इतनी ज्यादा नहीं रहती है। परन्तु गर्भावस्था में होने वाला सिरदर्द, उल्टी, मतली और चक्कर आने का प्रमुख कारण भी बन जाता है।
गर्भावस्था के दौरान सिरदर्द का कारण सिर्फ हारमोन्स में परिवर्तन ही नहीं होता है बल्कि कई अन्य वजह भी होती हैं। सही तरीके से न बैठना भी सिरदर्द की वजह बन सकता है जिस पर बहुत कम स्त्रियां ही ध्यान देती हैं।

गर्भावस्था के दौरान सिरदर्द होने के अन्य कारण, नींद सही से न ले पाना, भूख, तनाव, डिहाईड्रेशन और कम ब्लड सुगर लेवल भी होते हैं। पूरी नींद लेना, तनावरहित होना, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ खाते रहने से सिरदर्द की समस्या दूर हो जाती है।
जो महिलाएं बहुत ज्यादा कॉफी का सेवन करती हैं उन्हें भी इसे छोड़ देना चाहिए, क्योंकि कॉफी में कैफीन होती है तो सिरदर्द का कारण बनती है और यह गर्भावस्था में नुकसान भी करती है।

अगर आप गर्भ धारण करने के बारे में सोच भी रही हैं तो सबसे पहले कॉफी पर काबू पाना होगा, उसके बाद ही आप गर्भधारण कर पाएगी।

गर्भावस्था के दौरान होने वाले सिरदर्द को ठीक करने के लिए दवाओं का सेवन सुरक्षित नहीं है, इन्हें जितना संभव हो नहीं लेना चाहिए। प्राकृतिक उपचार, जैसे- तुलसी की चाय, या किसी प्रकार की हर्ब का सेवन फायदा करता है और पूरी तरह सुरक्षित भी होता है।



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