Garhwali Sweet Rice Arsa Recipe: पारंपरिक तरीके से बनाएं उत्तराखंड की खास मिठाई

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उत्तराखंड की वादियों का जिक्र हो और वहां के पारंपरिक स्वाद 'अर्सा' की बात न हो, ऐसा मुमकिन नहीं है। यह पहाड़ी मिठाई न केवल स्वाद में लाजवाब है, बल्कि गढ़वाल और कुमाऊं की संस्कृति का एक अहम हिस्सा भी है। शादियों और त्योहारों के मौके पर इसे खास तौर पर बनाया जाता है। इसकी सोंधी खुशबू और गुड़ की मिठास हर किसी का दिल जीत लेती है।

अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि घर पर अर्सा बनाते समय वह बहुत सख्त हो जाता है या तेल में जाते ही फटने लगता है। अगर आप भी इसी समस्या से परेशान हैं, तो यह रेसिपी आपके लिए है। आज हम आपको बताएंगे कि कैसे आप घर पर एकदम नरम और कुरकुरा Arsa तैयार कर सकते हैं। इसे बनाना बहुत आसान है, बस कुछ छोटी बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

पारंपरिक गढ़वाली अर्सा मिठाई की तैयार डिश

स्वादिष्ट पहाड़ी अर्सा बनाने के लिए जरूरी सामग्री

पहाड़ी स्टाइल में अर्सा तैयार करने के लिए आपको बहुत ज्यादा तामझाम की जरूरत नहीं है। इसके लिए बस कुछ बेसिक चीजों की आवश्यकता होती है जो आपकी रसोई में आसानी से मिल जाएंगी। सबसे जरूरी है चावल का सही चुनाव और गुड़ की क्वालिटी।

  • चावल (भीगे हुए): 2 कप (मोटा चावल सबसे अच्छा रहता है)
  • गुड़ (बारीक कटा हुआ): 1 कप
  • पानी: आधा कप (चाशनी बनाने के लिए)
  • सौंफ: 1 छोटा चम्मच (बेहतरीन खुशबू के लिए)
  • सफेद तिल: 1 बड़ा चम्मच (ऊपर से लगाने के लिए)
  • तलने के लिए: रिफाइंड तेल या शुद्ध देसी घी

Veg पहाड़ी अर्सा बनाने की सबसे आसान विधि

सबसे पहले चावल को अच्छे से धोकर करीब 5 से 6 घंटे के लिए पानी में भिगो दें। जब चावल अच्छी तरह फूल जाएं, तो इनका पानी छान लें। अब एक सूती कपड़े पर चावल को फैला दें ताकि इनकी ऊपरी नमी सूख जाए। ध्यान रहे कि चावल को पूरी तरह नहीं सुखाना है, उनमें हल्की नमी बनी रहनी चाहिए।

अब इन हल्के नम चावलों को मिक्सी में डालकर पीस लें। हमें इसका बहुत बारीक पाउडर नहीं बनाना है, बल्कि इसे थोड़ा दरदरा रखना है। पिसे हुए चावल के आटे को एक छलनी से छान लें ताकि बड़े टुकड़े अलग हो जाएं। यही दरदरापन अर्से को असली टेक्सचर और कुरकुरापन देता है।

अगले स्टेप में एक भारी तले की कड़ाही लें और उसमें गुड़ और पानी डालें। इसे धीमी आंच पर तब तक पकाएं जब तक गुड़ पूरी तरह पिघल न जाए। हमें एक तार की चाशनी तैयार करनी है। चाशनी को चेक करने के लिए एक कटोरी पानी में इसकी एक बूंद डालें, अगर वह जम जाए तो समझें चाशनी तैयार है।

अब आंच को बिल्कुल धीमा कर दें और इसमें धीरे-धीरे चावल का आटा मिलाएं। इसे लगातार चलाते रहें ताकि इसमें कोई गुठली न पड़े। जब यह मिश्रण कड़ाही छोड़ने लगे और एक डो (Dough) की तरह बन जाए, तो गैस बंद कर दें। इसमें सौंफ और थोड़े से तिल मिलाकर अच्छे से मिक्स कर लें।

तैयार मिश्रण को एक प्लेट में निकालें और हल्का ठंडा होने दें। अब अपनी हथेलियों पर थोड़ा सा तेल या घी लगाएं। मिश्रण से छोटी-छोटी लोइयां तोड़ें और उन्हें गोल करके हल्का सा चपटा कर दें। आप चाहें तो इनके ऊपर थोड़े और सफेद तिल चिपका सकते हैं, जो दिखने में बहुत सुंदर लगते हैं।

एक कड़ाही में तेल या घी गर्म करें। जब तेल मध्यम गर्म हो जाए, तो इसमें एक-एक करके अर्से डालें। इन्हें धीमी से मध्यम आंच पर ही तलें। अगर आंच तेज होगी, तो ये बाहर से काले पड़ जाएंगे और अंदर से कच्चे रह जाएंगे। जब ये दोनों तरफ से सुनहरे भूरे हो जाएं, तो इन्हें बाहर निकाल लें।

अंत में

लीजिए, आपकी पारंपरिक पहाड़ी मिठाई अर्सा बनकर तैयार है। इसे आप पूरी तरह ठंडा होने के बाद एक एयरटाइट डिब्बे में भरकर रख सकते हैं। यह मिठाई हफ्तों तक खराब नहीं होती और चाय के साथ इसका स्वाद दोगुना हो जाता है। इस आसान तरीके से आप भी अपने घर में उत्तराखंड का पारंपरिक स्वाद घोल सकते हैं और सबको खुश कर सकते हैं।

Story first published: Wednesday, June 24, 2026, 17:01 [IST]
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