Latest Updates
-
Kumaoni Kheera Raita: गर्मी के मौसम में वरदान है उत्तराखंड का ये खीरे का रायता, 10 मिनट में ऐसे करें तैयार -
Surya Grahan 2026: किस अमावस्या को लगेगा दूसरा सूर्य ग्रहण? क्या भारत में दिन में छा जाएगा अंधेरा? -
Jamun Side Effects: इन 5 लोगों को नहीं खाने चाहिए जामुन, फायदे की जगह पहुंचा सकता है भारी नुकसान -
Amarnath Yatra 2026: सावधान! ये 5 लोग नहीं कर सकते अमरनाथ यात्रा, कहीं आप भी तो शामिल नहीं? -
26 या 27 अप्रैल, कब है मोहिनी एकादशी? जानें व्रत की सही तारीख और पारण का शुभ समय -
बेसन या सूजी का चीला, जानें वजन घटाने के लिए कौन सा नाश्ता है सबसे बेस्ट? नोट करें रेसिपी -
तपती धूप में निकलने से पहले खा लें प्याज-हरी मिर्च का ये खास सलाद, लू के थपेड़े भी रहेंगे बेअसर -
Somvar Vrat Katha: सोमवार व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, भगवान शिव पूरी करेंगे हर मनोकामना -
Aaj Ka Rashifal, 20 April 2026: मालव्य योग से चमकेंगे इन राशियों के सितारे, जानें आज का भाग्यफल -
Birthday Wishes for Boss: बॉस के बर्थडे पर भेजें ये खास और सम्मानजनक शुभकामनाएं, बोलें 'हैप्पी बर्थडे'
Makar Sankranti 2025: इस साल 13 या 14 जनवरी कब मनाई जाएगी मकर संक्रांति, दूर करें तिथि को लेकर कन्फ्यूजन
Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति का पर्व सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश (गोचर) के दिन मनाया जाता है। हर साल यह तिथि खगोलीय गणनाओं के आधार पर तय होती है।
इस वर्ष (2025) मकर संक्रांति की तिथि और शुभ मुहूर्त को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। आइए विस्तार से जानते हैं इस साल मकर संक्रांति कब है और इसका महत्व क्या है।

2025 में मकर संक्रांति कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार, मंगलवार, 14 जनवरी 2025 को सुबह 9:03 बजे सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ, 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा।
- पुण्य काल: प्रातः 9:03 बजे से सायं 5:40 बजे तक।
- महापुण्य काल: प्रातः 9:03 बजे से 10:48 बजे तक।
मकर संक्रांति का महत्व
मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य उत्तरायण होते हैं, जिसे शुभ और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व शुभ कार्यों की शुरुआत का संकेत है, क्योंकि इस दिन खरमास समाप्त हो जाता है।
इस दिन:
1. भगवान सूर्य की पूजा का विशेष महत्व है।
2. भगवान विष्णु की आराधना भी की जाती है।
3. पवित्र नदी या जलाशय में स्नान और जरूरतमंदों को दान करना पुण्यकारी माना जाता है।
मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाई थी, जो इंद्रलोक तक पहुंची। तभी से इस दिन पतंगबाजी की परंपरा शुरू हुई।
तिल और खिचड़ी का महत्व
मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ से बने व्यंजन तैयार किए जाते हैं।
- तिल का दान करने से राहु और शनि ग्रह की अनुकूलता बढ़ती है।
- खिचड़ी का सेवन और दान दोनों शुभ माने जाते हैं।
मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि धार्मिक और खगोलीय दृष्टि से भी विशेष है। इसकी पूजा, स्नान और दान न केवल आत्मिक शांति प्रदान करते हैं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल का कारण बनते हैं। इस वर्ष इसे 14 जनवरी को मनाया जाएगा, इसलिए शुभ मुहूर्त में पूजा और दान अवश्य करें।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications











