Latest Updates
-
Ganesh Chaturthi Decoration Ideas: गणेश चतुर्थी पर ऐसे सजाएं बप्पा का दरबार, कम खर्च में ये आइडियाज आएंगे काम -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर हाथों में लगी मेहंदी का चाहती हैं डार्क कलर, तो आजमाएं ये 4 आसान टिप्स -
Modak Recipe: गणेश चतुर्थी पर बप्पा के लिए घर पर बनाएं उनके प्रिय उकडिचे मोदक, जानें इसकी आसान रेसिपी -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज का व्रत कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व -
ना मूर्ति, ना पुजारी, सूर्यास्त के बाद एंट्री भी मना, जानिए फिल्म 'The Vvaan' वाले वन देवी मंदिर का रहस्य -
नेपाल में बाढ़ के बाद भूकंप, इंडोनेशिया में फटा ज्वालामुखी, क्या बाबा वेंगा की भविष्यवाणी हुई सच? -
Pithori Amavasya 2026: आज या कल, पिठोरी अमावस्या कब है? जानें सही तारीख, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और महत्व -
World Suicide Prevention Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
तांबे के बर्तन में पानी पीने से मिलेंगे ये 5 फायदे, डायजेशन के साथ इम्यूनिटी भी होगी मजबूत -
Ganesh Chaturthi 2026: कब है गणेश चतुर्थी? जानें तिथि, गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और विसर्जन की तारीख
Makar Sankranti 2025: इस साल 13 या 14 जनवरी कब मनाई जाएगी मकर संक्रांति, दूर करें तिथि को लेकर कन्फ्यूजन
Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति का पर्व सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश (गोचर) के दिन मनाया जाता है। हर साल यह तिथि खगोलीय गणनाओं के आधार पर तय होती है।
इस वर्ष (2025) मकर संक्रांति की तिथि और शुभ मुहूर्त को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। आइए विस्तार से जानते हैं इस साल मकर संक्रांति कब है और इसका महत्व क्या है।

2025 में मकर संक्रांति कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार, मंगलवार, 14 जनवरी 2025 को सुबह 9:03 बजे सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ, 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा।
- पुण्य काल: प्रातः 9:03 बजे से सायं 5:40 बजे तक।
- महापुण्य काल: प्रातः 9:03 बजे से 10:48 बजे तक।
मकर संक्रांति का महत्व
मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य उत्तरायण होते हैं, जिसे शुभ और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व शुभ कार्यों की शुरुआत का संकेत है, क्योंकि इस दिन खरमास समाप्त हो जाता है।
इस दिन:
1. भगवान सूर्य की पूजा का विशेष महत्व है।
2. भगवान विष्णु की आराधना भी की जाती है।
3. पवित्र नदी या जलाशय में स्नान और जरूरतमंदों को दान करना पुण्यकारी माना जाता है।
मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाई थी, जो इंद्रलोक तक पहुंची। तभी से इस दिन पतंगबाजी की परंपरा शुरू हुई।
तिल और खिचड़ी का महत्व
मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ से बने व्यंजन तैयार किए जाते हैं।
- तिल का दान करने से राहु और शनि ग्रह की अनुकूलता बढ़ती है।
- खिचड़ी का सेवन और दान दोनों शुभ माने जाते हैं।
मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि धार्मिक और खगोलीय दृष्टि से भी विशेष है। इसकी पूजा, स्नान और दान न केवल आत्मिक शांति प्रदान करते हैं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल का कारण बनते हैं। इस वर्ष इसे 14 जनवरी को मनाया जाएगा, इसलिए शुभ मुहूर्त में पूजा और दान अवश्य करें।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
