Latest Updates
-
शाम 7 बजे के बाद गलती से भी मत करना ये 5 काम, बढ़ता है हार्ट अटैक का रिस्क -
बिना मारे चूहों को घर से भगाने का देसी तरीका! आटे में मिलाकर रख दें ये एक चीज, फिर कभी नहीं आएंगे नजर -
Pahadi Crispy Snack Singal Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड का पारंपरिक और कुरकुरा स्वाद -
कौन हैं पंकज त्रिपाठी के भाई बिजेंद्र नाथ तिवारी? आखिर क्यों हुआ जानलेवा हमला, गंभीर हालत में AIIMS में भर्ती -
Swapna Shastra: सपने में किन्नर को देखना होता है शुभ और अशुभ संकेत? जानिए इसका मतलब -
Cooling Summer Lunch Curd Rice Recipe: गर्मियों में पेट को ठंडक देने वाली सबसे आसान रेसिपी -
काले धब्बों वाले प्याज खाना चाहिए या नहीं? सेहत पर क्या होगा असर, यहां जानें इसका सही जवाब -
Ambubachi Mela 2026: कामाख्या मंदिर में शुरू हुआ अंबुबाची मेला, 3 दिनों तक बंद रहेंगे कपाट, जानें इसका महत्व -
Soft Dahi Paratha Recipe: घर पर बनाएं एकदम नरम और स्वादिष्ट दही का पराठा -
Aaj Ka Rashifal 22 June 2026: सोमवार को इन 5 राशियों पर बरसेगी महादेव की कृपा, धन लाभ के प्रबल योग
Makar Sankranti 2025: इस साल 13 या 14 जनवरी कब मनाई जाएगी मकर संक्रांति, दूर करें तिथि को लेकर कन्फ्यूजन
Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति का पर्व सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश (गोचर) के दिन मनाया जाता है। हर साल यह तिथि खगोलीय गणनाओं के आधार पर तय होती है।
इस वर्ष (2025) मकर संक्रांति की तिथि और शुभ मुहूर्त को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। आइए विस्तार से जानते हैं इस साल मकर संक्रांति कब है और इसका महत्व क्या है।

2025 में मकर संक्रांति कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार, मंगलवार, 14 जनवरी 2025 को सुबह 9:03 बजे सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ, 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा।
- पुण्य काल: प्रातः 9:03 बजे से सायं 5:40 बजे तक।
- महापुण्य काल: प्रातः 9:03 बजे से 10:48 बजे तक।
मकर संक्रांति का महत्व
मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य उत्तरायण होते हैं, जिसे शुभ और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व शुभ कार्यों की शुरुआत का संकेत है, क्योंकि इस दिन खरमास समाप्त हो जाता है।
इस दिन:
1. भगवान सूर्य की पूजा का विशेष महत्व है।
2. भगवान विष्णु की आराधना भी की जाती है।
3. पवित्र नदी या जलाशय में स्नान और जरूरतमंदों को दान करना पुण्यकारी माना जाता है।
मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाई थी, जो इंद्रलोक तक पहुंची। तभी से इस दिन पतंगबाजी की परंपरा शुरू हुई।
तिल और खिचड़ी का महत्व
मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ से बने व्यंजन तैयार किए जाते हैं।
- तिल का दान करने से राहु और शनि ग्रह की अनुकूलता बढ़ती है।
- खिचड़ी का सेवन और दान दोनों शुभ माने जाते हैं।
मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि धार्मिक और खगोलीय दृष्टि से भी विशेष है। इसकी पूजा, स्नान और दान न केवल आत्मिक शांति प्रदान करते हैं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल का कारण बनते हैं। इस वर्ष इसे 14 जनवरी को मनाया जाएगा, इसलिए शुभ मुहूर्त में पूजा और दान अवश्य करें।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications