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महिलाओं में मेनोपॉज के दौरान क्यों बढ़ जाता है डायिबटीज का जोखम? जानें इसके पीछे की असली वजह
Diabetes During Menopause: महिलाओं के जीवन में 40 की उम्र पार करने के बाद कई तरह के शारीरक और हामनल बदलाव आते हैं। इन्हीं में से एक मुख्य पड़ाव है मेनोपॉज यानी रजोिनवृत्त। मेनोपॉज एक बेहद सामान्य और प्राकृ तक प्रिक्रया है, जसके बाद महिलाओं में पीरयड्स आने बं द हो जाते हैं। हालांिक, यह सफ प्रजनन क्षमता के समाप्त होने तक सीिमत नहीं है, बल्क इस दौरान शरीर के भीतर कई बड़े मेटाबॉलक यानी चयापचय से जुड़े बदलाव भी होते हैं। हाल के वष में यह देखा गया है िक मेनोपॉज के बाद महिलाओं में टाइप 2 डायिबटीज होने का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है।

'ज्ञान बाय गणेश - मे कग इं िडया िवन ओवर डायिबटीज' (Gyaan by Ganesh - Making India Win Over Diabetes), सन फाम और अमे रकन डायिबटीज एसोसएशन की एक जागरूकता पहल है। इसका मकसद िवशेषज्ञों की जानकारी के ज़रए भारतीयों को डायिबटीज को बेहतर ढं ग से समझने, उससे बचाव करने और उसे मैनेज करने में मदद करना है। आज इस लेख में हम िवस्तार से समझेंगे िक आखर मेनोपॉज के दौरान डायिबटीज का जोखम क्यों बढ़ जाता है और मिहलाएं इससे अपना बचाव कैसे कर सकती हैं -
मेनोपॉज के दौरान हामनल बदलाव मेनोपॉज के दौरान शरीर में होने वाले हामनल उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर हमारे मेटाबॉलज्म को प्रभािवत करते हैं। जब शरीर में मुख्य हामन्स का स्तर िगरने लगता है, तो ब्लड शुगर को िनयं ित्रत करने की शरीर की क्षमता पर भी इसका असर पड़ता है। यही वजह है िक इस उम्र में महिलाओं को अपनी सेहत को लेकर अधक सतक रहने की जरूरत होती है।
मेनोपॉज के दौरान शरीर में क्या बदलता है?
मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के अं डाशय से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे महत्वपूण हामन्स का उत्पादन धीरे-धीरे कम होने लगता है। एस्ट्रोजन केवल प्रजनन प्रणाली को ही स्वस्थ नहीं रखता, बल्क यह शरीर में ग्लूकोज के प्रबं धन और इंसुलन की कायप्रणाली में भी अहम भूिमका िनभाता है। जब इस हामन का स्तर िगरता है, तो शरीर में फैट यानी वसा चब जमा होने का पैटन बदल जाता है। पहले जो फैट शरीर के िनचले िहस्सों में जमा होता था, वह अब पेट के आसपास जमा होने लगता है। और पेट की यह चब, जसे हम िवसेरल फैट कहते हैं, इंसुलन रेजस्टेंस की सबसे बड़ी जड़ है।
"मेनोपॉज के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हामन का स्तर कम होने लगता है। इसके कारण इंसुलन की कायक्षमता प्रभािवत हो सकती है, पेट के आसपास चब बढ़ सकती है और ब्लड शुगर को िनयं ि त करना किठन हो सकता है। हालांिक हर मिहला में यह जोखम समान नहीं होता। सं तुलत आहार, िनयिमत व्यायाम और समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच से इस जोखम को काफी हद तक कम िकया जा सकता है।"
Dr Sakshi Gagneja, DNB (General Medicine-Gold Medal), DrNB (Endocrinology) Consultant Endocrinology, Apollomedics Super Speciality Hospitals,LDA Colony, Kanpur Road, Lucknow

मेनोपॉज के दौरान क्यों बढ़ जाता है डायबिटीज का जोखिम?
मेनोपॉज के बाद डायबिटीज का रिस्क बढ़ने के पीछे कई कारण होते हैं, जिनमें शामिल है -
इंसुलिन सेंसिटिविटी कम होना
शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी होने के कारण कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति उतनी संवेदनशीलता नहीं दिखा पातीं जितनी पहले दिखाती थीं। जब इंसुलिन सेंसिटिविटी कम होती है, तो पैंक्रियाज द्वारा बनाया गया इंसुलिन रक्त में मौजूद ग्लूकोज को ऊर्जा में बदलने में असमर्थ होने लगता है। नतीजतन, खून में शुगर का स्तर धीरे-धीरे बढ़ने लगता है।
पेट के आसपास चर्बी का बढ़ना
उम्र बढ़ने और एस्ट्रोजन की कमी का सबसे पहला असर वजन पर दिखता है। इस दौरान महिलाओं में सेंट्रल एडिपोसिटी यानी पेट के निचले हिस्से और कमर के आसपास चर्बी जमा होने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स पेट की इस जिद्दी चर्बी को इंसुलिन रेजिस्टेंस का सबसे बड़ा कारण मानते हैं।
स्लो मेटाबॉलिज्म
उम्र के इस पड़ाव पर शरीर की कैलोरी बर्न करने की क्षमता प्राकृतिक रूप से धीमी हो जाती है। मेटाबॉलिज्म स्लो होने के कारण यदि महिलाएं अपनी डाइट और शारीरिक गतिविधियों में बदलाव न करें, तो उनका वजन बहुत तेजी से बढ़ता है। बढ़ा हुआ वजन सीधेतौर पर प्री-डायबिटीज और डायबिटीज के खतरे को बढ़ाता है.
मांसपेशियों में कमी आना
मेनोपॉज के बाद शरीर में मस्कुलर मास यानी मांसपेशियों की मात्रा घटने लगती है। हमारे शरीर में मांसपेशियां ग्लूकोज को सोखने और उसे ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करने का सबसे बड़ा जरिया होती हैं। मांसपेशियों की कमी के कारण खून में अतिरिक्त ग्लूकोज तैरता रहता है, जो अंततः शुगर लेवल को बढ़ा देता है।
नींद की कमी और मानसिक तनाव
इस उम्र में महिलाओं को हॉट फ्लैशेस, रात में पसीना आना और मूड स्विंग्स जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन कारणों से उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती। नींद की कमी और लगातार रहने वाला तनाव शरीर में कोर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन को बढ़ाता है। कोर्टिसोल का बढ़ा हुआ स्तर सीधे तौर पर भूख को बढ़ाता है और ब्लड शुगर के संतुलन को बिगाड़ देता है।
आंतरिक सूजन या इन्फ्लेमेशन
वैज्ञानिक शोधों में यह बात सामने आई है कि एस्ट्रोजन की कमी से शरीर में एक धीमी और क्रॉनिक सूजन यानी लो-ग्रेड इन्फ्लेमेशन की स्थिति पैदा हो जाती है। यह आंतरिक सूजन धीरे-धीरे इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को प्रभावित करती है, जिससे डायबिटीज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
इन लक्षणों को पहचानने में न करें भूल
अक्सर महिलाएं मेनोपॉज के लक्षणों और डायबिटीज के शुरुआती संकेतों के बीच अंतर नहीं कर पातीं। अत्यधिक थकान होना, बार-बार यूरिन के लिए जाना, सामान्य से अधिक प्यास लगना, याददाश्त में धुंधलापन या ब्रेन फॉग होना, अचानक वजन में बदलाव आना और नींद न आना ऐसे लक्षण हैं जो दोनों ही स्थितियों में देखे जाते हैं। अधिकांश महिलाएं इन संकेतों को सिर्फ मेनोपॉज का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे बीमारी का पता सही समय पर नहीं चल पाता और इलाज में देरी होती है।
किन महिलाओं को होता है सबसे ज्यादा खतरा?
सभी महिलाओं में मेनोपॉज के बाद डायबिटीज का खतरा एक जैसा नहीं होता। जिन महिलाओं का वजन पहले से अधिक है या जिन्हें मोटापे की शिकायत है, उनमें यह जोखिम सबसे ज्यादा होता है। इसके अलावा, यदि परिवार में पहले से ही किसी को डायबिटीज रही हो, तो आनुवंशिक कारणों से खतरा बढ़ जाता है। जिन महिलाओं को अपने जीवनकाल में कभी पीसीओएस यानी पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम रहा हो या प्रेग्नेंसी के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज की शिकायत रही हो, उन्हें मेनोपॉज के बाद विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए।
क्या मेनोपॉज सीधे तौर पर डायबिटीज पैदा करता है?
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मेनोपॉज सीधे तौर पर डायबिटीज का कारण नहीं बनता है। मेनोपॉज को आप एक ऐसे उत्प्रेरक के रूप में देख सकते हैं, जो शरीर के भीतर के माहौल को बदल देता है। यदि किसी महिला में पहले से ही डायबिटीज के जोखिम कारक जैसे खराब जीवनशैली या जेनेटिक्स मौजूद हैं, तो मेनोपॉज के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव डायबिटीज के खतरे को बढ़ा सकते हैं.
डायबिटीज के जोखिम को कम करने के उपाय
डायबिटीज के बढ़ते जोखिम को सही लाइफस्टाइल अपनाकर पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है -
संतुलित और फाइबर युक्त आहार
अपनी थाल डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और लीन प्रोटीन शामिल करें। पैकेटबंद फूड, मीठे पेय पदार्थों और मैदा युक्त चीजों से पूरी तरह दूरी बना लें। फाइबर युक्त भोजन ब्लड शुगर को अचानक बढ़ने से रोकता है।
नियमित व्यायाम और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग
सिर्फ वॉक करना काफी नहीं है। महिलाओं को हफ्ते में कम से कम दो से तीन बार हल्का वजन उठाने वाले व्यायाम या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करनी चाहिए। इससे मांसपेशियां मजबूत होती हैं और इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार होता है।
वजन और तनाव को कंट्रोल करें
पेट के आसपास की चर्बी को कम करने की कोशिश करें। तनाव से बचने के लिए योग, ध्यान या गहरी सांस लेने वाले प्राणायाम का सहारा लें।
बेहतर नींद लें
रात में सात से आठ घंटे की आरामदायक नींद लेने का प्रयास करें। सोने का एक निश्चित समय तय करें और सोने से पहले गैजेट्स का इस्तेमाल बंद कर दें।
नियमित जांच है सबसे जरूरी
मेनोपॉज की उम्र में कदम रखते ही महिलाओं को हर साल अपने स्वास्थ्य की रूटीन जांच करानी चाहिए। फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज, एचबीए1सी (HbA1c) टेस्ट और जरूरत पड़ने पर ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट कराने से शरीर में हो रहे शुरुआती बदलावों का पता आसानी से चल जाता है।
संतुलित खानपान और स्वस्थ लाइफस्टाइल से कम हो सकता है डायबिटीज का रिस्क
मेनोपॉज भले ही जीवन का एक चुनौतीपूर्ण दौर हो, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि बीमारी का होना तय है। सही समय पर लक्षणों की पहचान, नियमित हेल्थ स्क्रीनिंग और खानपान में थोड़े से बदलावों की मदद से आप मेनोपॉज के बाद भी पूरी तरह स्वस्थ, सक्रिय और डायबिटीज मुक्त जीवन जी सकती हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह सामग्री केवल रोगी शिक्षा एवं जागरूकता के उद्देश्य से प्रदान की गई है। यह किसी भी प्रकार से चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह का विकल्प नहीं है। सन फ़ार्मास्युटिकल्स लेबोरेट्रीज़ लिमिटेड (SPLL) सटीक एवं समयानुकूल जानकारी उपलब्ध कराने का हर संभव प्रयास करता है, लेकिन इसकी पूर्ण सटीकता होने की कोई गारंटी नहीं देता। कृपया अपने स्वास्थ्य संबंधी किसी भी निर्णय के लिए केवल अपने चिकित्सक या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह पर ही भरोसा करें। सन फ़ार्मास्युटिकल्स लेबोरेट्रीज़ लिमिटेड (SPLL) को पूर्व सूचना दिए बिना इस सामग्री के किसी भी भाग को यांत्रिक या इलेक्ट्रॉनिक किसी भी माध्यम से पुनर्प्रकाशित, प्रसारित या संग्रहित नहीं किया जा सकता। SPI-IN-CVD-ZT---07-20260096



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