Latest Updates
-
Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में भूलकर भी न करें ये 6 काम, वरना नाराज हो सकते हैं पितर -
Fact Check: चेहरे पर 'गोल्ड ऑयल' लगाने से मिलेगी जवां-ग्लोइंग स्किन? जानें वायरल दावे का सच -
लड्डू-मोदक नहीं, यहां बप्पा को लगता है बबल टी का भोग! गणपति पूजा का अनोखा अंदाज हुआ वायरल -
Parivartini Ekadashi Vrat Katha: परिवर्तिनी एकादशी पर जरूर पढ़ें राजा बलि की कथा, सभी पापों से मिलेगी मुक्ति -
Parivartini Ekadashi 2026 Wishes: हरि की भक्ति...इन संदेशों से अपनों को भेजें परिवर्तिनी एकादशी की शुभकामनाएं -
अब 1000 से 2000 रूपये में किराए पर मिलेगा गरबा पार्टनर, वारयल पोस्ट ने सोशल मीडिया पर मचाया बवाल -
World Alzheimer's Day 2026: भूलने की आदत कहीं अल्जाइमर का शुरुआती संकेत तो नहीं, जानें इसके लक्षण और इलाज -
Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि कब से शुरू? जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और अष्टमी-नवमी की तारीख -
बार-बार पेशाब आना इन 5 बीमारियों का होता है संकेत, डॉक्टर से जानें बचाव के उपाय -
Parivartini Ekadashi 2026: कब है परिवर्तिनी एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और पारण का समय
Hariyali Teej Solah Shringar: हरियाली तीज पर क्यों जरूरी है सोलह श्रृंगार? यहां देखें 16 श्रृंगार की लिस्ट
Hariyali Teej Solah Shringar: हरियाली तीज हर साल सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने की परंपरा है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं। हरियाली तीज पर सोलह श्रृंगार का भी खास महत्व माना जाता है। महिलाएं इस दिन मेहंदी लगाकर, नए कपड़े पहनकर और पारंपरिक गहनों से सजकर पूजा करती हैं। कई जगहों पर माता पार्वती को भी सुहाग से जुड़ी चीजें अर्पित करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सोलह श्रृंगार करके शिव-पार्वती की पूजा करने से सौभाग्य और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साल 2026 में हरियाली तीज 15 अगस्त, शनिवार को मनाई जाएगी। आइए, जानते हैं सोलह श्रृंगार में कौन-कौन सी चीजें शामिल होती हैं -

1. स्नान
श्रृंगार की शुरुआत स्नान से मानी जाती है। महिलाएं स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर तैयार होती हैं। हरियाली तीज पर साड़ी, लहंगा-चुनरी या अन्य पारंपरिक वस्त्र पहनने की परंपरा है।
2. बिंदी
माथे पर लगाई जाने वाली बिंदी सोलह श्रृंगार का अहम हिस्सा मानी जाती है। सुहागिन महिलाएं पूजा के समय कुमकुम या दूसरी तरह की बिंदी लगाती हैं।
3. सिंदूर
सिंदूर को सुहाग का प्रतीक माना जाता है। विवाहित महिलाएं इसे मांग में लगाती हैं और धार्मिक परंपरा में इसका विशेष महत्व बताया गया है।
4. काजल
आंखों का श्रृंगार काजल से किया जाता है। पारंपरिक रूप से इसे आंखों की खूबसूरती बढ़ाने वाले श्रृंगार के रूप में देखा जाता है। कुछ लोक मान्यताओं में काजल को बुरी नजर से बचाने से भी जोड़ा जाता है।
5. मेहंदी
मेहंदी सोलह श्रृंगार का खास हिस्सा है। सावन और तीज के त्योहारों पर महिलाएं हाथों और पैरों में मेहंदी लगाती हैं। इसे शुभता और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है।
6. चूड़ियां
हाथों में चूड़ियां पहनना सुहागिन महिलाओं के पारंपरिक श्रृंगार का हिस्सा है। हरियाली तीज पर हरी चूड़ियों का विशेष चलन है, हालांकि अलग-अलग जगहों पर रंग और डिजाइन की परंपरा अलग हो सकती है।
7. मंगलसूत्र
मंगलसूत्र विवाहित महिला के सुहाग का प्रतीक माना जाता है। इसे विवाह के बाद धारण करने की परंपरा है और सोलह श्रृंगार में भी इसे महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है।
8. नथ या नथनी
नाक में पहनी जाने वाली नथ या नथनी पारंपरिक श्रृंगार का हिस्सा है। अलग-अलग राज्यों और समुदायों में इसके आकार और पहनने का तरीका अलग होता है।
9. गजरा
फूलों से बना गजरा बालों में लगाया जाता है। इससे बालों का श्रृंगार पूरा होता है और फूलों की खुशबू भी आती है। तीज जैसे त्योहारों पर गजरा लगाने की परंपरा कई जगह देखने को मिलती है।
10. मांग टीका
मांग टीका माथे पर मांग के बीच पहना जाता है। यह पारंपरिक आभूषण है और सोलह श्रृंगार में इसे भी शामिल किया जाता है।
11. झुमके या बालियां
कानों में पहने जाने वाले झुमके या बालियां चेहरे और पूरे श्रृंगार की खूबसूरती बढ़ाते हैं। इन्हें भी सोलह श्रृंगार के पारंपरिक आभूषणों में गिना जाता है।
12. अंगूठी
हाथ की उंगलियों में पहनी जाने वाली अंगूठी भी सोलह श्रृंगार का हिस्सा मानी जाती है। शादी या सगाई की अंगूठी को महिलाएं खास तौर पर पहनती हैं।
13. बाजूबंद
बाजूबंद हाथ के ऊपरी हिस्से यानी बाजू पर पहना जाता है। यह पारंपरिक आभूषण है और पुराने समय से महिलाओं के श्रृंगार का हिस्सा रहा है। आज इसका चलन पहले की तुलना में कम जरूर हुआ है।
14. कमरबंद
कमर में पहना जाने वाला कमरबंद या करधनी भी पारंपरिक श्रृंगार में शामिल है। इसे आमतौर पर साड़ी या लहंगे जैसे पारंपरिक कपड़ों के साथ पहना जाता है।
15. बिछिया
पैरों की उंगलियों में पहनी जाने वाली बिछिया विवाहित महिलाओं के सुहाग से जुड़ी पारंपरिक निशानी मानी जाती है। आमतौर पर यह चांदी की होती है और कई क्षेत्रों में शादी के बाद इसे पहनने की परंपरा है।
16. पायल या पाजेब
पैरों में पहनी जाने वाली पायल या पाजेब सोलह श्रृंगार का एक और पारंपरिक आभूषण है। इसकी छनक और डिजाइन पैरों के श्रृंगार को पूरा करती है। कई भारतीय परंपराओं में पैरों के आभूषण चांदी के पहनने का चलन है।



Click it and Unblock the Notifications
