Jeet Adani Wedding: गौतम अदाणी के बेटे की शादी पर बन रहा है 'गजकेसरी योग', क‍ितना शुभ है ये मूहूर्त

बिजनेस टायकून और अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी के छोटे बेटे जीत अदाणी की शादी इन दिनों चर्चा में हैं। गौतम जीत अदाणी की शादी दिवा जैमिन शाह से 7 फरवरी को होगी। बेटे की शादी की तारीख की घोषणा गौतम अदाणी ने प्रयागराज में आयोज‍ित हो रहे महाकुंभ में ह‍िस्‍सा लेने के दौरान की थी और उन्होंने बताया कि यह शादी बहुत ही साधारण और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न होगी। अदाणी परिवार अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है और इसीलिए शादी में भव्यता के बजाय सादगी को महत्व दिया जाएगा। इस घोषणा के बाद जीत अदाणी की शादी को लेकर उत्सुकता और भी बढ़ गई है।

गौतम अदाणी के बेटे जीत अदाणी की शादी को लेकर सोशल मीडिया पर 7 फरवरी 2025 की तारीख वायरल हो रही है, जिससे लोगों में जिज्ञासा बढ़ गई है कि यह दिन इतना विशेष क्यों है। माना जा रहा है कि इस दिन अत्यंत शुभ गजकेसरी योग बन रहा है, जो समृद्धि और सफलता का प्रतीक है। आइए जानते हैं इस योग की खासियत।

Gautam Adani s Son to Marry on February 7 in Auspicious Gajkesari Yoga

गजकेसरी योग क्या होता है?

गजकेसरी योग को ज्योतिष में अत्यंत शुभ योग माना जाता है, जो व्यक्ति को समृद्धि, बुद्धिमत्ता और सफलता प्रदान करता है। यह योग तब बनता है जब चंद्रमा से केंद्र (1st, 4th, 7th, या 10th भाव) में बृहस्पति स्थित होता है। इस योग के प्रभाव से जातक को संपन्न और अच्छे परिवार से जीवनसाथी मिलने की संभावना रहती है। साथ ही, विवाह समय पर या जल्दी होने की संभावना अधिक होती है। यह योग जातक को सुखद, समृद्ध और स्थिर वैवाहिक जीवन प्रदान करता है।

7 फरवरी 2025 पंचांग

7 फरवरी 2025, शुक्रवार के दिन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है, जो रात 21:28:52 तक रहेगी। इस दिन रोहिणी नक्षत्र शाम 18:41:02 तक रहेगा, जबकि चंद्रमा वृषभ राशि में स्थित रहेगा।

इस दिन एन्द्र योग 16:16:27 तक रहेगा, जो शुभ फलदायक माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:13:30 से 12:57:25 तक रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए उत्तम है।

हालांकि, राहु काल 11:13:06 से 12:35:28 तक रहेगा, जो अशुभ माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से विवाह और मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है।

विवाह के लिए ताराबल का महत्व

ज्योतिष ग्रंथों में विवाह के लिए ताराबल को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि यह शुक्र और बृहस्पति ग्रह से जुड़ा होता है। शुक्र और बृहस्पति को तारा कहा जाता है, और विवाह के शुभ मुहूर्त में इनका विचार करना अनिवार्य होता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब ये दोनों ग्रह अस्त होते हैं, तो विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। शुक्र ग्रह प्रेम, रोमांस और भौतिक सुख-संपत्ति का कारक है, जबकि बृहस्पति सुखद दांपत्य जीवन, ज्ञान और शुभ कार्यों का प्रतीक माना जाता है। इसलिए, विवाह के लिए ताराबल का विशेष ध्यान रखा जाता है ताकि वैवाहिक जीवन सुखमय और समृद्ध बना रहे।

Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।

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