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पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों ने किया बेहाल; जानें कैसे रसोई के बजट से लेकर हॉलीडे प्लान तक हुआ ठप्प
Fuel Price Hike Impact on Lifestyle: आज सुबह का सूरज एक बार फिर महंगाई का नया पैगाम लेकर आया है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगी आग अब आम आदमी की बर्दाश्त के बाहर होती जा रही है। पेट्रोल के दामों में 2.61 रुपये और डीजल के रेट में 2.71 रुपये की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस नए उछाल के बाद अब पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गया है। मिडिल क्लास परिवारों के लिए हर महीने घर चलाना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है। एक तरफ कॉर्पोरेट सेक्टर या नौकरियों में सैलरी वहीं की वहीं है, या फिर इंक्रीमेंट के नाम पर सिर्फ लॉलीपॉप थमा दिया गया है क्योंकि वो तो बस नाममात्र का हुआ है। वहीं दूसरी तरफ, ईंधन महंगा होने से रोजमर्रा की हर चीज के दाम रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रहे हैं। सब्जियों से लेकर दूध, राशन, ऑनलाइन फूड डिलीवरी, बच्चों की स्कूल बस फीस और यहां तक कि समर हॉलीडे ट्रिप तक पर इसका सीधा और गहरा असर दिखाई देने लगा है। लोग अब खर्चों में भारी कटौती करने को मजबूर हो रहे हैं और अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी दो बार सोचने लगे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि कैसे ईंधन के ये बढ़ते दाम हमारे पूरे लाइफस्टाइल को तहस-नहस कर रहे हैं।

रसोई का बजट सबसे ज्यादा प्रभावित
सबसे पहले बात कर लेते हैं हमारी रसोई की, जिसे ईंधन के बढ़ते दामों ने सबसे ज्यादा और सीधे तौर पर प्रभावित किया है। दरअसल, पेट्रोल और डीजल महंगा होने का सबसे बड़ा 'डोमिनो इफेक्ट' माल ढुलाई पर पड़ता है। ट्रकों और मालवाहक गाड़ियों का डीजल खर्च बढ़ते ही मंडियों तक आने वाली सब्जियां, फल, दूध और रोजमर्रा की जरूरत का सामान महंगा हो जाता है। वर्तमान में कई प्रमुख शहरों में टमाटर, प्याज और हरी सब्जियों के दाम अचानक आसमान छूने लगे हैं और इसके पीछे की मुख्य वजह यही ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट मानी जा रही है। घर की गृहिणियों का साफ कहना है कि पहले जिस तय बजट में महीनेभर का पूरा राशन और हरी सब्जियां आ जाती थीं, अब उसी बजट में आधा सामान ही खरीद पाना मुश्किल हो रहा है। मिर्ची से लेकर धनिया तक के बढ़े दामों ने रसोई के स्वाद को फीका कर दिया है।
समर हॉलीडे और रोड ट्रिप पर लगी ब्रेक
पूरे साल बच्चे अपनी गर्मियों की छुट्टियों (Summer Vacations) का बेसब्री से इंतजार करते हैं और महीनों पहले से प्लान करने लगते हैं कि इस बार वे कहां घूमने जाएंगे। लेकिन ईंधन के लगातार बढ़ते दामों ने इस बार के समर हॉलीडे प्लान को पूरी तरह ठप्प कर दिया है। जो परिवार हर साल गर्मियों में हिल स्टेशन या लॉन्ग ट्रिप्स पर जाना पसंद करते थे, इस बार बढ़ते फ्यूल प्राइस ने उनका पूरा ट्रैवल बजट बिगाड़ कर रख दिया है। अपनी निजी कार से लंबी रोड ट्रिप पर जाना अब जेब पर बहुत भारी पड़ रहा है। यही वजह है कि कई लोग अब निजी गाड़ियों को घर पर खड़ी करके मजबूरन ट्रेन या बसों का सहारा ले रहे हैं। वहीं, बड़ी संख्या में ऐसे परिवार भी हैं जिन्होंने महंगाई के चलते इस बार का अपना हॉलीडे प्लान ही कैंसिल कर दिया है या फिर अपने लॉन्ग ट्रिप को बहुत शॉर्ट कर लिया है।

ऑफिस आने-जाने का खर्च भी बढ़ा
हर दिन दफ्तर जाने वाले नौकरीपेशा लोगों की जेब पर भी पेट्रोल की यह महंगाई सबसे तगड़ी मार मार रही है। रोज अपनी बाइक या कार से ऑफिस जाने वालों का मासिक फ्यूल खर्च अचानक हजारों रुपये बढ़ गया है। जितनी देर गाड़ी ट्रैफिक जाम में स्टार्ट रहती है, उतनी देर लोगों का ब्लड प्रेशर बढ़ता रहता है। इस भारी खर्च से बचने के लिए अब कर्मचारियों ने कम्यूटिंग का नया जुगाड़ निकाला है। अब लोग अपनी पर्सनल कार निकालने के बजाय कारपूल, मेट्रो और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल ज्यादा करने लगे हैं। वहीं, इस महंगाई को देखते हुए कुछ आईटी और कॉरपोरेट कंपनियां भी अपने कर्मचारियों को फिर से 'वर्क फ्रॉम होम' का विकल्प देने पर विचार करने लगी हैं ताकि कर्मचारियों पर कम्यूटिंग का वित्तीय बोझ कम हो सके।
ऑनलाइन फूड और डिलीवरी सेवाएं भी हुईं महंगी
पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर डिजिटल लाइफस्टाइल और फूड डिलीवरी ऐप्स पर भी देखने को मिल रहा है। जोमैटो (Zomato) और स्वीगी (Swiggy) जैसे प्लेटफॉर्म्स से ऑनलाइन खाना मंगाना अब पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो गया है क्योंकि कंपनियों ने दूरी के हिसाब से डिलीवरी चार्ज और सर्ज प्राइस बढ़ा दिए हैं। यही नहीं, क्विक-कॉमर्स और ऑनलाइन किराना डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स ने भी कई जगह अपनी फ्री डिलीवरी की लिमिट बढ़ा दी है या फिर एक्स्ट्रा डिलीवरी फीस जोड़ दी है। इस अतिरिक्त खर्च के कारण मध्यमवर्गीय परिवारों ने अब बाहर से खाना मंगाने या वीकेंड्स पर कैफे जाने की अपनी आदतों में 40% तक की कटौती कर ली है।
बच्चों की पढ़ाई और एक्स्ट्रा एक्टिविटीज पर असर
महंगे ईंधन की आंच अब बच्चों की शिक्षा और उनके विकास तक पहुंच चुकी है। स्कूल वैन और बस संचालकों ने डीजल के दाम बढ़ते ही मासिक बस फीस में भारी बढ़ोतरी कर दी है। इसके अलावा, बच्चों की समर क्लासेज, स्पोर्ट्स एक्टिविटीज या ट्यूशन सेंटर तक रोजाना उन्हें छोड़ने और लाने का पेट्रोल खर्च भी पहले के मुकाबले लगभग दोगुना हो चुका है। ऐसे में पेरेंट्स अब बच्चों की गैर-जरूरी हॉबी क्लासेस और एक्टिविटीज को बंद करने या उन्हें घर पर ही ऑनलाइन सिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
मिडिल क्लास की सबसे बड़ी चिंता बना ईंधन खर्च
लगातार महंगे होते पेट्रोल-डीजल ने मिडिल क्लास परिवारों की मंथली सेविंग्स पर सीधा और जानलेवा हमला किया है। पहले जहां लोग अपनी सैलरी का एक हिस्सा भविष्य के लिए बचा पाते थे या अपनी खुशियों जैसे शॉपिंग, मूवी पर खर्च कर लेते थे, अब वही पैसा केवल गाड़ी की टंकी भरने और महंगे राशन को खरीदने में ही स्वाहा हो रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है: यदि फ्यूल की कीमतें इसी तरह बेलगाम बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में माल ढुलाई और महंगी होगी, जिससे चौतरफा मंदी और महंगाई का माहौल बन सकता है। इसका सबसे बुरा असर देश के उस मध्यमवर्ग पर पड़ेगा जिसकी आय का जरिया सीमित है और खर्चे असीमित।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से माल ढुलाई (Transportation Cost) का खर्च बढ़ जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों से मंडियों तक सब्जियां, फल और राशन पहुंचाने वाले ट्रकों का फ्यूल खर्च जैसे ही बढ़ता है, कंपनियां और व्यापारी उसकी भरपाई सामान की कीमतें बढ़ाकर करते हैं। इसे अर्थशास्त्र में 'डोमिनो इफेक्ट' कहा जाता है।
1. रोजाना ऑफिस जाने के लिए कारपूलिंग, मेट्रो या पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सहारा लें।
2. ऑनलाइन फूड डिलीवरी और गैर-जरूरी वीकेंड आउटिंग पर कुछ समय के लिए रोक लगाएं।
3. नजदीकी मार्केट जाने के लिए बाइक या कार निकालने के बजाय पैदल चलने या साइकिल की आदत डालें।



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