Chandra Grahan 2025: 7 या 8 सितबंर कब है साल का दूसरा चंद्र ग्रहण? क्या भारत में दिखेगा और लगेगा सूतककाल

Chandra Grahan 2025: साल 2025 का दूसरा चंद्र ग्रहण अगले महीने लगने वाला है। ज्योतिषीय दृष्टि से ये दूसरा ग्रहण बेहद खास माना जा रहा है। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्र ग्रहण का प्रभाव न केवल धार्मिक कार्यों पर पड़ता है बल्कि राशियों पर भी देखा जाता है। यही वजह है कि लोग जानना चाहते हैं कि यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा या नहीं, इसका सूतककाल कब से कब तक रहेगा और क्या यह शुभ है या अशुभ।

इसके साथ ही इस बार के चंद्र ग्रहण पर एक बात और खास है कि ये पितृ पक्ष के पहले दिन ही पड़ रहा है। आइए जानते हैं साल 2025 के दूसरे चंद्र ग्रहण से जुड़ी पूरी जानकारी कि वो कब पड़ने वाला है और इस दौरान किन-किन सावधानियों को बरतना चाहिए।

कब है साल का दूसरा चंद्र ग्रहण?

साल के दूसरे चंद्र ग्रहण की तारीख को लेकर लोगों में उत्सुकता बनी हुई है। हर कोई जानना चाहता है कि ये ग्रहण कब है। दरअसल, साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 7 सितंबर 2025 को दिखाई देगा। इस दिन ब्लडमून होगा। बता दे कि इसी दिन से ही पितृ पक्ष पर शुरू हो रहे हैं।

Chandra Grahan 2025

कब से कब तक होगा सूतककाल?

7 सितम्बर, 2025 की रात को, हम दशक की सबसे शक्तिशाली खगोलीय घटनाओं में से एक का अनुभव करेंगे। पूर्ण चन्द्र ग्रहण और पूर्ण रक्त चंद्रमा होगा जिसे ब्लडमून कहते हैं। विश्व की लगभग 85% जनसंख्या (लगभग 7 अरब लोग) पृथ्वी की छाया को पूर्ण चंद्रमा के गहरे लाल रंग में बदलते हुए देखेंगे, जो एक दुर्लभ और विस्मयकारी संयोग होगा। आपको बता दें कि चंद्र ग्रहण रविवार की रात 9 बजकर 58 मिनट से 1 बजकर 26 मिनट पर होगा।

कब से लगेगा सूतककाल

बता दें कि सूतक काल ग्रहण से 9 घंटे पहले ही शुरू हो जाता है। ऐसे में 7 सितंबर की दोहपर को 12 बजकर 57 मिनट से सूतक काल आरंभ हो जाएगा। इस दौरान पूजा-पाठ करना वर्जित होता है और मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को न तो घर से बाहर निकलने दिया जाता है और न ही उनसे सिलाई-कटाई का काम करवाया जाता है। वैसे तो ये एक खगोलीय घटना होती है, मगर ज्योतिश शास्त्र कहता है कि इसका राशियों पर भी अच्छा और बुरा असर पड़ता है।

चंद्र ग्रहण कहां-कहां दिखेगा? (Chandra Grahan 2025)

साल क दूसरा चंद्र ग्रहण अफ्रीका, एशिया और ऑस्ट्रेलिया में पूर्णतः दिखाई देगा। दक्षिण अमेरिका और पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका में चंद्रास्त से ठीक पहले आंशिक या समाप्ति दृश्य दिखाई देंगे। उत्तरी अमेरिका के अधिकांश भाग और दक्षिण अमेरिका के कुछ भाग पूर्णतः दिखाई नहीं देंगे, हालांकि उनमें अभी भी उपछाया की झलक दिखाई दे सकती है। वहीं भारत( हैदराबाद, लखनऊ, कोलकाता, दिल्ली, चंडीगढ़, मुंबई, पुणे ) में भी दिखाई देगा। यह ग्रहण एक घंटे से अधिक समय तक चलेगा, जो हमें रुकने, चिंतन करने और एक ही आकाश के नीचे हमारे संबंध के आश्चर्य को महसूस करने का गहन निमंत्रण देता है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।

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